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Showing posts from 2026

Happy Holi

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  "Festivals with Poetic Greetings" by Ramesh Chandra Tiwari is a curated collection of Indian religious, national, and international festivals arranged chronologically. Each entry features concise, informative descriptions alongside heartfelt verse wishes, designed for personal greetings, social media, and professional, relationship-based marketing. When winter ends and spring harvest arrives, the youth blossom and fragrance of love spread everywhere. Now the Holi season takes everyone into ecstasies. On the full moon day of the month of Phalguna, people, so full of fire, celebrate the popular festival of colour and love. It often falls in March, but sometimes in late February. Holi commemorates the victory of Bhagwan Vishnu over Hiranyakashipu. The gatekeepers of Bhagwan Vishnu, Jaya and Vijaya, annoyed Sanak, Sanandan, Sanat Kumar, and as a result, the Kumar’s cursed them, saying they be demons. In Satyuga, they were born to sage Kashyapa and Diti as Hiranyakashipu and Hir...

समय लग सकता है पर क्या रावण बच सकता है

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  जब सत्ताधारियों का ह्रदय भी जातिवाद का भवन बन जाय तो जनता के ह्रदय से राष्ट्रवाद पलायन करने लगता है। सत्ता की उष्मा बहुत मादक होती है - लम्बे समय तक कम ही लोग होश में रह पाते हैं। अधिकतर प्रतिशोध-राजनीति से सीना ठंढा करने लगते हैं। वे रोगाणुओं को मारते-मारते अपने ही प्रतिरक्षा तंत्र को नष्ट करने पर उतर आते हैं। अंततः ऐसे मतवाले हाथी दलदल में फंसकर असहाय हो जाते हैं। सत्ता का अहम् आर्थिक पतन, जनक्रांति, तख्तापलट, विदेशी हस्तक्षेप को जन्म देता है। मुसोलिनी, अडॉल्फ हिटलर, सद्दाम हुसैन, कर्नल गद्दाफी, मादुरो इसके कुछ उदहारण हैं। पकिस्तान में राजनितिक अस्थिरता का कारण प्रतिशोध राजनीति है। स्थाई और संतुलित राजनीति धैर्य मांगती है, होश मांगती है, अकड़ नहीं लोच मांगती है। जातिवाद से जले बिहार में जहां-तहाँ राख है। यूपी इत्यादि को भी होना क्या ख़ाक है? सत्ता को चाहिए वह एन्टीबायटिक औषधि का काम करे, साइड इफेक्ट न बने। वणिक की तरह वही कौड़ी खर्च करे जो नयी कौड़ियां ला सकती हैं न कि हर कौड़ी को तितर-बितर कर दे। गाय और ब्राह्मण हिंसक नहीं होते, उनसे हिंसा त्रिभुवन स्वामी राजा राम को चुनौती है। समय...

भावनाओं का भाँग

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  राम मंदिर निर्माण, धारा 370 निरस्त, भारतीय संस्कृति का पुनरुत्थान, संशाधनों का अभूतपूर्व विस्तार, आर्थिक और औद्योगिक विकास, ईडब्लूएस कानून, वक्फ कानून में सुधार आदि बहुत सारे सराहनीय कार्य मोदी सरकार ने किये हैं, किन्तु इसमें सवर्ण को क्या मिला? हम राष्ट्रवादी हैं, भारतीय संस्कृति के पोषक हैं इसलिए हमें देश के विकास पर गर्व मिला है। अब यदि अपने सवर्ण वर्ग विशेष की दृष्टि से देखें तो सबसे अधिक हमारा ही नुक्सान हुआ है क्योंकि सबका साथ सबका विकास नहीं बल्कि बड़े को काट छोटे को खैरात हुआ है। साथ ही इसके पीछे अल्पसंख्यक का दोनों धार्मिक और आर्थिक विकास इतना हुआ है जितना आरक्षण से आरक्षित वर्गों को 75 वर्षों में नहीं हो सका। कांग्रेस काल में हमेशा मुस्लिम और दलित का जीवन स्तर सामान रहा है। किन्तु मोदी सरकार के दौरान दलित और ओबीसी वर्ग मुस्लिम रोजगारियों के मजदूर बन गए हैं। मुस्लिम व्यापारियों के उत्थान से सवर्ण व्यापारियों की रीढ़ टूट गई है क्योंकि वे हर तरह से व्यापार नहीं कर सकते। अब यदि बात ब्राह्मणों की करें तो मोदी सरकार में इनकी वही स्थिति हुई है जो स्थिति पकिस्तान में हिन्दुओं की ...

आरक्षित अनारक्षित में विषैला भेदभाव

बीजेपी सरकार ने यूजीसी अधिनियम के माध्यम से आरक्षित और अनारक्षित के बीच में विषैला भेदभाव पैदा कर दिया है जो मिटेगा नहीं। ऐसा अचानक क्यों किया है इसे स्पष्ट रूप से कोई नहीं जानता। कोई कहता है पीडीए कांसेप्ट को निष्प्रभावी करके पिछड़े और दलित को आकर्षित करना है, तो कोई कहता है कि मुख्यमंत्री योगी जी की तेजी से बढती लोकप्रियता को समाप्त करना है। जो भी हो, ऐसी राजनीति देश के लिए अत्यंत अशुभ है। ओबीसी और सामान्य में शून्य भेदभाव था, हिन्दू के नाम पर दोनों को इकठ्ठा करना सरल था और इसी आधार पर बीजेपी का संगठन खड़ा हुआ। मण्डल आयोग ने दोनों को बाँट दिया और तबसे जहां सवर्ण प्रत्यासी होते हैं वहां बड़ी संख्या में ओबीसी वोट कट जाते हैं। किन्तु अब जो हुआ है उसने तो दोनों वर्गों को एक दूसरे का दुश्मन बना दिया है। परिणाम यह होगा कि जहां ओबीसी प्रत्याशी होगा वहां सवर्ण नोटा ठोंकेगा और जहां सवर्ण प्रत्यासी होगा वहा ओबीसी अपने प्रत्यासी की ओर झुकेगा, वह भले किसी पार्टी का हो। बीजेपी के अमृत काल में काल पैदा हो गया है। आने वाले समय में सवर्ण अपनी अलग राजनीति के विकल्प को तलाशेगा, अपनी बस्तियां मुस्लिम से ...

साहिब से सब होत है

मोदी जी ने बता दिया मैं साहिब हूँ और आप बन्दे: यदि मैं राइ से पर्वत बना सकता हूँ तो एक झटके में पर्वत को राइ भी कर सकता हूँ। लेकिन उन्हें यह भी जानना चाहिए जब बन्दे इकट्ठे हो जाते हैं तो साहिब के साहिब हो जाते हैं। वैसे आपका झोला तैयार हो चुका है, माननीय, क्योंकि अपने गुरु की तरह आपको भी जिन्ना से प्यार हो चुका है। चाहे हिन्दू हिन्दू को बांटो या मुस्लिम राजनीति को पोशो बात एक है। संघ प्रमुख का कहना है "मन में यह भाव नहीं होना चाहिए कि एक को दबाकर दूसरे को खड़ा किया जाना चाहिए। आपस में प्रेम भाव होना चाहिए। समाज को बांटने या बंटने में चिंता होनी चाहिए।" सौ वर्षों से संघ हिन्दुओं को संगठित करने की कोशिश कर रहा है और आपने चुटकी बजाते उन्हें खण्ड-खण्ड कर दिया। सीधा मतलब है कि आपने उस सगठन को दरकिनार किया है जिसने आपको शेर बनाया। यह भी मत भूलो, वह आपको पुनः चूहा भी बना सकता है, उसने ऐसा किया भी है और करने की सोच भी रहा है। आपके मंत्री कहते हैं किसी के साथ नाइंसाफी नहीं होगी। आपने नाइंसाफी की हद कर दी है तब ये आवाज उठनी शुरू हुई है, कोई अपने पैर में ऐसे ही कुल्हाड़ी नहीं मारता। ...

एआई दिल्ली सम्मलेन

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  एआई दिल्ली सम्मलेन में अमेरिका, चीन और भारत के वैज्ञानिकों में प्रतियोगिता हुई। अमेरिका वाले ने एक रोबोट बनाया जो हू-बहू आदमी की तरह काम करता था। चीन वाले ने उसी रोबोट को लिया और उसे संशोधित करके उसमें मानवीय संवेदना जोड़ दिया। अब बारी थी भारत की, भारतीय वैज्ञानिक बड़ी अकड़ से उठता है और उसी रोबोट को अपने वर्क प्लेटफार्म पर रखता है। दर्शक आश्चर्य में हैं कि अब इसमें नया क्या जोड़ा जा सकता है। किन्तु शीघ्र ही 'मेड इन इंडिया' की मुहर लगाकर गलगोटिया उसे अपने स्टाल पर सजा कर रख देती है। ऐसा भद्द कराया नेहा सिंह ने! उधर भारत मंडपम में ऐसी अफरातफरी होती है कि सब कुछ अस्त-व्यस्त हो जाता है। स्टानफोर्ड प्रोफ़ेसर सूर्य गांगुली कहते हैं कि अमेरिका में उच्च स्तरीय कंप्यूटर वज्ञानिक अधिकतर भारतीय मूल के हैं। यहां गलगोटिया वाले हैं क्योंकि सारे देश अपनी प्रतिभा को देश की बहुमूल्य संपत्ति मानते हैं, उन पर बड़ी रकम खर्च करते हैं, वहीँ हमारी सरकार को बुद्धिजीवियों से स्वाभाविक चिढ़ है क्योंकि उनकी सपत्ति राष्ट्र नहीं वोट है। आज जो देश तकनीक में पीछे हैं वे फिसड्डी ही हैं। आरक्षण वह चूहा है जो भीतर ...

राष्ट्र स्वस्वामी महाराज का चूहा शेर बन गया

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सरिता समुन्द्र की ओर बहती है, बहते-बहते पहाड़ पर नहीं चढने लगती। चन्द्रमा शीतल होता है, अचानक आग नहीं फेकने लगता। शेर मांस खाता है दाल चावल कभी नहीं। राम ने, कृष्ण ने अवतार लिया धर्म-संत रक्षा हेतु न कि उनसे खेलने हेतु। सभी दैविक पुरुष या तंत्र न चहरे बदलते, न उद्देश्य - चहरे बदलने वाले राम शत्रु होते हैं। केशव की कूटनीति जटिल थी किन्तु राष्ट्रीयता के पीछे शकुनि का पोषण नहीं करती थी। रोहिंग्या रहेंगे, देशी भगेंगे। घर वाले लड़ेंगे, बाहरी पलेंगे। राष्ट्र स्वस्वामी महाराज का चूहा शेर बन गया है - महाराज जी का जीवन संकट में आ गया है। गड़बड़ वहीँ हो गया जब भगवान् मोहक का अवतार कुयुग में हो गया। भगवान् ने करिश्मा दिखया तो भक्तों ने आरती सजाया। भगवान् ने भरमाय तो उन्होंने दीपक फूंक-फूंक कर बुझाया। लोग चकित हैं कि भगवान् भाई असली हैं या नकली?

ब्राह्मणवाद मुर्दावाद

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    Student Federation of India  मध्य प्रदेश में वेचारा 75 वर्षीय एक पुजारी एक केवट की घृणा का भेट चढ़ गया । हर एक शिक्षा संसथान बंटवारा ब्रिगेड के अड्डे बन रहे हैं। यूजीसी 2026 यदि लागू हो जाय तो क्या होगा आप कल्पना नहीं कर सकते। देश भर के विद्यालयों में टुकड़े-टुकड़े गैंग नारे लगा रहे हैं : ब्राह्मणवाद मुर्दावाद, ब्राह्मणवाद हो वर्वाद, ठाकुरवाद मुर्दावाद, ठाकुरवाद हो वर्बाद, आरएसएस को चीर दो, हिन्दू राष्ट्र मुर्दावाद, मनुवाद से आज़ादी, ब्राह्मण बनिया ठाकुर चोर। ये लोग पढ़ें अथवा न पढ़ें नौकरी तो इन्हें मिलनी है। ये अलगाववाद करें या राष्ट्रद्रोह करें इन्हें सौ खून माफ़ है। लेकिन शिक्षा वंचित होकर हम सवर्ण किसी काम के नहीं होंगे। अब यदि हम लोग भी नारा लगाएं : आरक्षण से आज़ादी, यूजीसी है वर्बादी, खैरातवाद से आज़ादी, ढपलीगैंग मुर्दावाद, भीमवाद से आज़ादी तो इसका मतलब हुआ कि न हम इनके साथ रहना चाहते हैं और न ये हमारे साथ। वहीँ सरकार इस स्थिति को पैदा करके चुप है। इन्हें छोड़ दिया गया है कि जितना हो सके सवर्णों को उतनी गाली दो क्योंकि उनके मुँह साध दिए गए हैं और हाथ बाँध दिए गए हैं। यह अ...

पत्रकार लड़की रूचि तिवारी

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  जेएनयू वामपंथियों की मांद है। ये वे लोग हैं जिनका स्वतंत्रता के बाद से अब तक आरक्षण के विशेषाधिकार पर कब्जा रहा है। ये धनवान और सक्षम लोग हैं, मुस्लिम समाज से इनका गहरा संबंध है, इन्हें भारतीयता के प्रति स्वाभाविक घृणा है। अतः अब ये हमारे हिन्दू समाज के चतुर्थ वर्ग के प्रतिनिधि नहीं हैं। इन्हें विशेषाधिकार कानूनों से अलग करके सामान्य किया जाना चाहिए क्योंकि ये वही आतंक कर रहे हैं जो जम्मू कश्मीर में आतंकी धर्म पूछकर करते हैं। इन्होने पत्रकार लड़की रूचि तिवारी के साथ पुलिस बल की उपस्थिति में जाति पूछकर दुर्व्योहार से दुराचार की ओर ले जाने की कोशिश की। पुलिस भी असहाय दिखी। हे तथाकथित राष्ट्रवादी पार्टी ! जब यही करना था तो धारा 370 क्यों हटा दिया? कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति की तरह खोल दो आतंकियों के लिए बार्डर और सौंप दो यूनिवर्सिटीज को उन्हें ! बना दो पुरे देश को जाहिल-जकड, आतंकी, नक्सली ! आजकल सरकारी कार्यालयों में नीले अमीरों की संख्या अधिक हो गई है। दलित नाम पर साहब लोग सामान्य वर्ग के मातहत लोगों को भद्दी-भद्दी गाली देते है, उनका सरेआम अपमान करते हैं। इस पर भी हमारे कुछ ऐसे मित्...

ब्राह्मण जीवन

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शराब और चरस की लत इतनी हानिकारक नहीं होती जितनी मोबाईल की लत होती है क्योंकि यह दृष्टि हर लेती है, स्वास्थ्य छीन लेती है, तर्क शक्ति समाप्त कर देती है और अंत में अवसाद को जन्म देती है। गली-गली शराब बिक रही है, ड्रग तस्करी चरम पर है,बच्चे से बाप के हाथों में मोबाईल है। भावी मानव समाज का क्या होगा? योग से, तपस्या से, त्याग से और घोर अध्ययन से श्रेष्ठता प्राप्त होती है। वर्तमान पीढ़ी शारीरिक और मानसिक दोनों ही श्रम से बचना चाहती है। घर में भोजन बनाना बहुत कम लोगों को पसंद है। किताब का नाम भर ले लो लोगों के सर में असहनीय पीड़ा होने लगती है। इसी तरह मंदिर में प्रार्थना-आरती लगती है जैसे जेठ की दोपहरी में वे आग के पास खड़े हों। ब्राह्मण भाई मेरा इशारा आपकी ओर भी है। जहां चाहें वहां तथा जो चाहें वह भोजन कर लें इसके लिए आप नहीं बने हैं। मनमानी दिनचर्या आपका जीवन नहीं हैं। पुस्तकें आपका आभूषण हैं और आपकी जीवन यात्रा अध्ययन है। अतएव, अपना डीएनए शुद्ध रखना आपकी पहली आवश्यकता भी है। हनुमान जी, राम जी, सीता माता, कृष्ण कन्हैया, राधा मइया, भोले बाबा, गणपति बप्पा, मात भवानी इनमे किसी एक के चरणों में सम्...

MAHA SHIVARATRI

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"Festivals With Poetic Greetings" is the book that provides complete information about important occasions of the year with warm greetings and motivational quotes. It will help sales personnel to build lasting relationship with customers and students to learn important facts about festivals that make an import section of general knowledge.   Light is created, but darkness is self-created; the universe emerged, but nothingness was already there. The dark void behind the Universe represents Shiva: one without beginning or end. The day before every new moon is the darkest day of the month, therefore known as Shivaratri; but the one that occurs in February-March on the fourteenth day of the dark fortnight in the lunar month of Phalguna is called Maha Shivaratri, as it is believed to have the greatest spiritual significance. A divine energy rises up in a human being on this night. Those who stay awake at the Maha Shivaratri night, holding their spine in an erect position, receive...

Valentine’s Day

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You can know about your religious festivals, national holidays, and international days, each explained in only one or a maximum of three paragraphs. Each chapter contains poems for best wishes and motivational quotes as well. Get your copy and I am sure you will be happy to find your desired book. Valentine’s Day is celebrated every 14th February. Candy, flowers, and gifts are exchanged between loved ones in the name of St Valentine in many countries. Love and affection are expressed to romantic partners and family members in many ways. It is believed that during the third century in Rome, Emperor Claudius II outlawed marriage for young men, contending that single men made better soldiers. Valentine, who was a Roman priest, defied the king and continued to perform marriages for young lovers secretly. When it was discovered, Claudius sentenced the priest to death. Because of this legend, Saint Valentine became known as the patron saint of love. Some people believe that the Christian chu...

शेरों का परिवार चाहिए

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मैंने यूजीसी 2026 को पढ़ा तो लगा कि अच्छे से बने हुए कानून को किसी ने जानबूझ कर जगह-जगह खुरच दिया है। जो भी हो, यहां कानून की काली कोठरी है जिसका एससी/एसटी अधिनियम नाम का दरवाजा आटोमेटिक है क्योंकि इसमें कोई किसी को धकेल कर अंदर तो कर सकता है किन्तु अंदर का व्यक्ति फिर बाहर नहीं आ सकता है। बड़ी संख्या में मेडिकल कालेज के नाम पर यमभवन भी बनाये जा रहे हैं, गरीबों के इलाज हेतु डाक्टर के नाम पर -40 वाले यमदूत पढ़ाये जा रहे हैं। सरकार भी क्या करे जब जलकुम्भी की तरह गरीब फ़ैल रहे हैं। बसंत महीनों में पिल्ले खूब हो जाते हैं। बचपन में हम लोग दो पिल्लों की गर्दन पकड़कर उनके मुँह आपस में रगड़ देते थे। वे गुर्राने और फिर पटकी-पटका करने लगते थे। सरकार भी यूजीसी से पिल्ले लड़ाकर कर मौज ले रही है, बोल नहीं रही है, मन ही मन हंस रही है - उद्देश्य जो भी हो। मुझे लगता है बीजेपी का आज कोई विकल्प नहीं है, स्वतंत्र है, मदमस्त है, सहत्रबाहु है जिसमें परशुराम के पिता को मारकर कामधेनु के अपहरण की महत्वाकांक्षा उत्पन्न हो गई है। अब आप समझ ही गए होंगे कि बालक परशुराम के प्रकट होने का समय आ गया हैं। कोई एक चोंटियाधारी...

Help your Head Servant

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  परिवर्तन बड़ा क्रूर होता है और जब इसकी गति बहुत तेज हो जाती है तब विनाश आता है। इतनी बढ़िया सरकार चल रही थी। पिछले बारह वर्षों में हिन्दू समाज काफी संगठित हुआ था। देश का आर्थिक विकास हो रहा था। उद्योग गाँव-गाँव फ़ैल रहे थे। भारत समृद्ध और सशक्त हो रहा था। मैं तो सपने देखने लगा था कि भारत चीन जैसा हो जायेगा जहा हर किसी के पास उद्यम है, सामान शिक्षा है और सामान नागरिक अधिकार हैं। अचानक राजनीति दैत्य ने मुंह खोला और खुशियां निगल गया। आज ब्राह्मण को उसकी राष्ट्रनिष्ठा के लिए पुरस्कृत किया गया है। शेष सभी जाति वर्ग उसको पत्थर मार सकते हैं और यह अपराध नहीं माना जाएगा। आज ब्राह्मण मंदिरों में सफाई कर्मी भर है - सारा दान तो सरकारी पंडितों को चढ़ जाता है। शिक्षा उसका आभूषण था उस पर डकैती की योजना बनी तैयार है। कथा करने में लोगों को आपत्ति है। सबकी ईर्ष्या उसी की ओर है। ब्राह्मणवाद से आजादी कहने वाले पूजनीय हैं। ब्राह्मणवाद से आजादी का अर्थ है भारतीय भाषा, संस्कृति, वन्दे मातरम, राष्ट्रीयता आदि सभी से आज़ादी अर्थात आज़ाद भारत से आज़ादी। स्वतंत्रता को अभिशाप मानने वालों की पूजा कांग्रेस ने किया बी...

बाहर नहीं युद्ध घर में कराया

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  एक शेर जंगल से इस तरह भाग रहा था जैसे मौत उसके पीछे पडी हो। माइक लेकर लोमड़ी दौड़ी और पूछा,"शेर भाई क्या हो गया? शेर ने हांफते-हांफते कहा, "मेरे पीछे एक भयानक महिला पड़ गई है। मौत में इज्जत मर्यादा तो फिर भी बची रहती है।" तभी एक तेंदुआ भागते दिखा। लोमड़ी उसके पास भी पहुंची और वही सवाल किया। तेंदुवा बोला, " एक पडोसी तेंदुवा जब मुझसे जीत नहीं सका तो मदद के लिए एक एससी भाई के पास चला गया।" इतना कहते हुए वह रोने लगा। इतने में सभी शेर, बाघ, तेंदुआ, चीते इकट्ठे होकर जो चिल्लाने लगे। लोमड़ी दौड़ी और पूछा अब क्या हो गया? एक शेर आगे आता है और माइक पकड़ता है : "जंगल के राजा ने जंगल के बाकी सभी नागरिकों को बन्दूक पकड़ा दिया है और उनसे कहा है जहां भी शेर, चीते या उनके बच्चे दिखें उन्हें खोज-खोज कर मारो।" हमारे चारों और इतने भाले, इतने कांटे बिछा दिए हैं सरकार ने कि जीना तोबा हो गया है। आरक्षित समाज के एक प्रतिशत लोगों को शायद ही आरक्षण का लाभ इन 77 वर्षों में मिल सका होगा किन्तु इसका नशा व्यापक हैं? मुगलों, अंग्रेजों ने तो प्यार किया था - सारा अत्याचार केवल सवर्णों ने ...

व्यक्तिगत विवाद

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  एक समय था जब लोग बड़े सम्मान से कहते थे "ठाकुर साहब" "पण्डित जी"। आज दोनों उपाधियाँ जैसे गाली बन गई हों। अंग्रेज बूट की ठोकर लगा कर कहते थे "इंडियन डॉग", मुग़ल तिरस्कार से कहते थे "काफिर"। किन्तु ये तो मालिक थे इनके द्वारा किये गए अपमान को भूल जाना चाहिए। प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने के लिए प्रचार करना पड़ता है "मैं पिछड़ा हूँ, मैं दलित हूँ"। जब आप अपने को पिछड़ा या दलित कहने में गर्व करते हो तो समरसता के लिए कम से कम हमें भी साहब या जी को हटाकर ही कहने दो मैं ठाकुर हूँ या पंडित हूँ। सामने वाला कहता है, "कौन सी जाति की हो ? गर्मी दूर कर दूंगा !" इसमें घोर अहंकार है ! फिर भी इस अहंकार को बुरा नहीं माना जाएगा ! अहंकार तो तब हुआ जब आस्था सिंह ने जवाब में अपना जाति बता दिया। 6 जनवरी की घटना 6 फरवरी के बाद वाइरल की जा रही है। दो सामान जातियों के लोगों ने गुस्से में एक दूसरे को गर्मी दिखाई और बिना किसी को नुक्सान किये शांत हो गए। इसका उद्देश्य निश्चित राजनीतिक है जिसके माध्यम से यह प्रचार करना है कि ठाकुर में अहंकार है । जबकि राजनीत...

एआई

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  जिस तरह कृषि उपकरण ने देशी पशुओं को आवारा कर दिया है, सामान्य जनमानस को उसी तरह एआई आवारा करने वाला है। सकल घरेलू उत्पाद का 50 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा सेवा क्षेत्र है, एआई मुख्य रूप से उसे ही टारगेट करने वाला है। पारम्परिक नौकरियाँ तो समाप्त ही होंगी, आईटी सेक्टर की नौकरियों को भी यह खा जाएगा। खैर ये तो दूर की बात हुई, नौकरियों के नाम पर सरकार की भी नीयत अच्छी नहीं रही है। एक आधार कार्ड में संशोधन आज के दिन तारे तोड़ने जैसा कार्य है और एक नया आधार कार्ड बनवाना तो इस पृथ्वी का सबसे कठिन कार्य हो गया है। यदि आधार एक आवश्यक कार्ड है तो सरकार आधार विभाग की सरकारी शाखाएं देश भर में क्यों नहीं खोलती जिसमें लाखों युवकों को रोजगार तो मिलेगा ही साथ ही जनता को भी सुविधा होगी। आज सरकार को जानने की जरूरत है कि राज तंत्र कोई बहुत मजबूत चीज नहीं है। यदि बड़ी संख्या में युवक वेरोजगार हो गए तो बांटो और राज करो से काम नहीं चलेगा - सारा तंत्र ध्वस्त हो जाएगा। पकिस्तान का राजतंत्र विगड़ चुका है। श्रीलंका और नेपाल में तो कोई तंत्र ही नहीं है। भारत सरकार को सावधान होना चाहिए। मॉस में युवक वेरोजगार हों...

सवर्ण

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यूजीसी कानून का विरोध करने वाला सवर्ण आखिर जाएगा कहाँ जब देश की हर पार्टी इस कानून की समर्थक है? इस प्रश्न का उत्तर है किसी के पास ? मेरे पास है तो सुनों। पेड़ों में जब बसन्त आना होता है तो पतझड़ आता है। बंटवारे के समय पकिस्तान से पलायन किये हुए सिंधी आज सभी अरबपति हैं और हिन्दुस्तानी मूल के लोगों को नौकर रखे हुए हैं। बिहार और तमिनाडु से बहुत बड़ी संख्या में सामान्य वर्ग पलायन कर चुका है। सामान्य वर्ग पर जब अत्याचार बढ़ेगा तो प्राकृतिक रूप से जहां वे अधिक होंगे सुरक्षा के कारण वहीँ इकट्ठे होने लगेंगे और जब बड़ी संख्या में एकत्रित हो जाएंगे तो उन्हें स्वयं का तंत्र विकिसित करना सरल हो जाएगा। सवर्ण के समाज में जाति हटा दी जाएगी - वहां न कोई ब्राह्मण होगा न वैश्य न क्षत्री सभी सनातनी होंगे। भूसा नहीं सिर्फ गेहूं होगा। भेड़ों के झुण्ड नहीं शेरों के परिवार होंगे। सबको अपने राष्ट्र से प्यार होगा। सम्मुख अत्याचारी, ईर्ष्यालु समाज के सापेक्ष आपस में प्रेम होगा, संघर्ष करने की प्रेरणा होगी। वहां उसके अपने शिक्षा संस्थान होंगे, अपनी सरकार होगी। उनकी आबादी बड़ी तेजी से व्यापार करेगी और पैसा होने से उत्त...

अयोग्य शिक्षक ही देश को पूरी तरह समाप्त कर सकता है

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किसी देश को युद्ध से पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता है। यदि उसे समूल नष्ट कर देना है तो एक मात्र और सबसे सरल तरीका है कि उसकी शिक्षा भ्रष्ट कर दो। शिक्षा का स्तर गिरने से बड़ी संख्या में लोगों को डाक्टर ही मार देंगे, इंजिनियर पुल-बिल्डिंग बनाएंगे कुछ उसमें दबकर मर जाएंगे। अर्थशास्त्री देश को भूखों मार देंगे। नौकरशाह गृहयुद्ध पैदा कर देंगे और एक साथ ये सारी तबाही लाने में अयोग्य शिक्षकों का समूह अकेले ही काफी होगा। एक गुजराती ने हिन्दू राष्ट्र बनने नहीं दिया था। आज दो गुजराती हैं, पूरी वर्वादी के सरल तरीके को वे ही खोज सके हैं। खैर, भोजन, कपड़ा और मकान के वगैर जीवन नहीं चल सकता। उसी तरह संघर्षों से बचकर जीवित नहीं रहा जा सकता। देश या हिन्दू समाज द्रोहियों से संघर्ष स्वतंत्रता संग्राम की तरह अनिवार्य हो गया है। साथ में अब हमारा यह भी कर्तव्य है कि अपने छोटे भाइयों को द्रोहियों के झांसे से बचाएं। उन्हें समझाएं कि देश से अधिक सत्ता के लोभी हमारे खिलाफ मुस्लिमों को भी ललकार सकते हैं। उन्हें समझाएं कि वे हमसे ईर्ष्या न करें क्योंकि हमसे संचालित मंदिरों की आय में उनका भी हिस्सा है, हमारे व्य...

विश्व विद्यालय अनुदान आयोग विनियम 2026

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विश्व विद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम 2026 केवल धर्म, नस्ल , लिंग, जन्म स्थान, जाति या अपंगता के आधार पर विशेष तौर पर एससी/एसटी, सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग, गरीब, विकलांग के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करना कानून का उद्देश्य है। हर विद्यालय या विश्वविद्यालय में सामान अवसर केंद्र स्थापित होगा। यह केंद्र नजर रखेगा कि वंचितों का लाभ उन्हें ठीक से मिल रहा है या नहीं। इसके हेतु केंद्र जिला प्रशासन, पुलिस, मिडिया से संपर्क रखेगा। उच्च शिक्षा संस्थान की प्रशासनिक या प्रबंध समिति एक वरिष्ठ प्रोफेसर को कोआर्डिनेटर नामित करेगा। यह प्रोफेसर ऐसा होगा जो वंचित वर्ग के कल्याण के प्रति अच्छी धारणा रखता हो। सामान अवसर केंद्र में एक समता समिति होगी जिसका अध्यक्ष संसथान प्रमुख होगा। वरिष्ठ संकाय सदस्य के रूप में तीन प्रोफ़ेसर, सदस्य होंगे, एक कर्मचारी सदस्य, दो समाज के प्रतिनिधि एवं दो छात्र प्रतिनिधि से समिति का गठन होगा। इसका सचिव सामान अवसर केंद्र का कोआर्डिनेटर होगा। समित के ये सभी प्रतिनिध अन्य पिछड़ा, एससी/एसटी, महिला, दिव्यांग वर्ग के होने अनिवा...

उच्च शिक्षा आयोग

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  जब हिन्दू को दो वर्गों में बांटकर उन्हें संघर्ष के लिए आमने सामने खड़ा कर दिया जाय तब हिन्दू एकता की बात तो पाखंड है। और यदि तंत्र पाखंड पर आधारित हो गया हो तो संविधान या प्रजातंत्र का मतलब ही खतम। हम आजाद भारत में गुलामी से बड़ी गुलामी में हैं तो हमारे लिए आजादी का क्या मतलब? यूजीसी अधिनियम ने तो हमारी नागरिकता ही समाप्त कर दी है क्योंकि एक नागरिक का स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा जन्म सिद्ध अधिकार होता है। सरकार क्या कर रही है? वह तो हिन्दू राष्ट्र बनाते बनाते गजब-ए-हिन्द का रास्ता साफ कर रही है। हम ऐसा भी नहीं चाहते कि दलित या पिछड़ा वर्ग पर कोई अत्याचार हो। कानून अच्छी नियत से सबके कल्याण को ध्यान में रख कर बनाया जाना चाहिए़ न कि तुष्टिकरण या दुर्भावना भावना से । यूजीसी अधिनियम सिद्ध करता है कि देशी सरकार हिंदुत्व की खाल में मुगली हुकूमत है, बर्तानिया कब्जेदारी है। जिसका उद्देश्य भारतीय समाज को कलंकित करना और संस्कृति नष्ट करना था। मोदी सरकार धृतराष्ट्र है। उसे द्रोपदी चीर हरण प्रिय है। पांडवों की आँखों के सामने अब उनकी पत्नी ही नहीं बल्कि बहन, बेटियों की इज्जत लुटेगी। मोदी राव...

यूजीसी अधिनियम

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यूजीसी अधिनियम कानून की शक्ल में एक घातक हथियार है जिसे सरकार ने अपराध रोकने के लिए नहीं बल्कि अपराध करने के लिए बनाया है। इस हथियार से आरक्षित युवा बेरोकटोक अनारिक्षत छात्राओं को अनैतिक रूप से ब्लैकमेल कर सकता है और छात्रों के सीढ़ी का सांप बन सकता है। ऐसे अन्याय को अनारक्षित युवा चुपचाप सहन तो नहीं करेंगे - प्रतिशोध स्वाभाविक रूप से उभर आने की संभावना रहेगी। यदि राय लिया जाय तो आरक्षित वर्ग भी बेवजह पचड़े में पड़ना नहीं चाहेगा। माँ-बाप खुद मर सकते हैं किन्तु अपने बच्चों को मरते नहीं देख सकते। मोदी जी के प्रति तात्कालिक श्रद्धा एवं विश्वास के कारण लोगों ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम को स्वीकार कर लिया था किन्तु बच्चों की कीमत पर इस कानून को सामान्य वर्ग स्वीकार नहीं करेगा। देश के प्रत्येक क्षेत्र में कार्यरत सामान्य वर्ग के मां-बाप की निष्ठा हिल सकती है तो सोचो परिणाम क्या हो सकता है। यदि वैश्य न होगा तो देश का व्यापार उनसे न हो सकेगा, यदि ब्राह्मण न होगा तो भारतीय संस्कृति की रक्षा और कोई नहीं कर सकता और यदि क्षत्रिय ह्रदय न होगा तो आसमान से छलांग लगाने वाले न होंगे। मैं यह नहीं ...

यूजीसी

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  मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था सुधारी है, उद्योगों का विकास किया है, हिन्दू मंदिरों का पुनर्निर्माण और यात्रा को आरामदायक बनाया है। राम मंदिर निर्माण, धरा 370 को हटाने जैसे असंभव को संभव किया है। स्वच्छ भारत अभियान में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। लेकिन मोदी सरकार ने हिन्दू समाज को तीन बराबर टुकड़ों में चीर डाला है। पहला भाग - महिला सशक्तिकरण के नाम पर पति-पत्नी को बांटने के अतिरिक्त सम्भ्रान्त परिवारों की लड़कियों को सड़क पर बेलगाम नंगा कर दिया है। उनका यह क़ानून मुस्लिमों पर नहीं चल सका। दूसरा भाग - एससी/एसटी एक्ट को एकतरफा बनाकर तथा आरक्षण कानून में उचित सुधार से मुंह मोड़कर सामान्य और शेडूल के बीच कभी न भरने वाली गहरी खाई खोद दी है। तीसरा भाग - अब यूजीसी एक्ट से बच्चों को बच्चों से अलग कर दिया है। ध्यान देने की बात यह है कि वोट तुष्टिकरण में सामान्य वर्ग बल्कि सम्पूर्ण हिन्दूसमाज मिटेगा या बचेगा इसका ध्यान बिलकुल नहीं दिया गया है। हर कानून में पहले से ही मान लिया गया है कि सामान्य वर्ग अपराधी स्वभाव का है, उसे अल्पसंख्यक से जोड़ दिया गया है। इन कानूनों से हिन्दू समाज में एकता ...

Vasant Panchami

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  #FestivalswithPoeticGreetings provides in-depth insights into major celebrations with warm wishes and heartfelt messages for your friends and family. it is available in all forms: Paperback, Hardcover and Kindle Edition online An Excerpt from my new book "Festivals with Poetic Greetings" Basant Panchami also known as Shri Panchami falls between late January and February, on the fifth day of the bright half of the month Magha. It is the festival of knowledge, music and arts, therefore dedicated to the goddess Saraswati. It also marks the arrival of the spring. In West Bengal, Saraswati Puja is observed in the same way as Durga Puja. Since Goddess Saraswati was born on this day, the festival is called ‘Saraswati Jayanti’. On this day, Goddess Saraswati is worshipped in the morning. Devotees adorn the deity with white or yellow clothes and flowers and offer sweet to her. The day of Vasant Panchami is significant for Vidya Arambha, the ritual of introducing children to ...

हिन्दू और आरक्षण

  हिंदू समाज द्वारा ब्राह्मणों का तिरस्कार स्वयं के पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा है। थोड़ी देर के लिए पूर्वाग्रह से दूर हो जाओ और सोचो, आप इस निष्कर्ष पर अवश्य आएंगे कि हिन्दू समाज को यदि कोई संगठित कर सकता है तो वह ब्राह्मण वर्ग ही है। कथा, संगीत एवं साहित्य के माध्यम से सनातनी समाज में धर्म-संस्कृति के अनुकूल मनोवृति का वह सृजन करता है एवं उसे दृढ बनाता है। केवल ब्राह्मण ही ऐसा है जिसके न में हाँ होता है। उसे सनातन समाज और राष्ट्र विस्तार के प्रति सच्चा लगाव होता है क्योंकि वह उसकी उतपत्ति है। उसने राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की। पुनः उसने ही संघ के माध्यम से भारतीय जन संघ और जन संघ से भारतीय जनता पार्टी बनाई ताकि स्वतंत्रता के बाद भी देश की सत्ता बाहरी लोगों के हाथ लगने से बच सके। अंग्रेज मूर्ख नहीं थे - वे जानते थे हिन्दू समाज का विघटन तभी संभव है जब उससे ब्राह्मण अलग होगा और यही नीति कांग्रेस ने भी अपनाई। विश्व में सुखी और शांत जीवन केवल सनातन व्यवस्था में संभव है और सनातन व्यवस्था ब्राह्मण से संभव है। कांग्रेस ने आरक्षण नामक एक ही हथियार से सारे हिन्दू समाज को बेहोश कर ...

ब्राह्मण, क्षत्रिय एवं शूद्र

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  हमारा प्राचीन ग्रन्थ स्कन्द पुराण कहता है: "जन्मना जायते शूद्रः, संस्कारात् भवेत् द्विजः। वेद पाठात् भवेत् विप्रः, ब्रह्म जानाति इति ब्राह्मण।" जन्म के समय सभी शूद्र होते हैं। अच्छे संस्कार प्राप्त करने पर उन्हें द्विज की पदवी मिलती है। उसके बाद वेद ज्ञान अर्जित करने पर विप्र सम्मान मिलता है। अंत में ब्रह्म बोध के बाद ही वे ब्राह्मण कहलाने योग्य हो सकते हैं। प्राकृतिक रूप से सबकी प्रवृति एक सी तो हो नहीं सकती। उन्हीं किशोरों में कुछ को युद्ध विद्या पसन्द आयी तो क्षत्रिय की उपाधि मिली जिसका अर्थ है सुरक्षा क्षत्र। कुछ किशोरों ने मानसिक अथवा शारीरिक विकास में रूचि नहीं लिया तो वे शूद्र ही रह गये। किन्तु उन्होंने खेती, कौशल और पशुपालन में अच्छी रूचि दिखाई, प्रशंसनीय कार्य किये। बच्चा शूद्र होता है तो क्या वह प्यारा नहीं होता ? शूद्र प्रिय एवं मंगलकारी शब्द है घृणा का शब्द नहीं। शूद्र में शू का का अर्थ है त्वरित और द्र का गतिमान होना। इसीलिए बच्चा चंचल होता है। यह शब्द किसान एवं कुशल शिल्पकार के लिए है जिसका सम्बन्ध अन्नदात इंद्र और भगवान् विश्वकर्मा से है। समय के साथ सभ्यता का...