जनता को चिंता हो करता नेता वही
जनता की चिन्ता नेता की चिन्ता नहीं। जनता को चिंता हो करता नेता वही। बंगलादेश में हिन्दुओं की सामूहिक ह्त्या हुई। जनता डरी और इंतज़ार करने लगी। कब भारत की सेना जाएगी, बंगलादेश में तबाही मचाएगी। सेना तो गई नहीं, तेल जाने लगा सहायता जाने लगी। भाषण हुआ रोहिंगिया की बाढ़ आ गयी। जनता चीखी रोहिंग्या भीड़ हमारी रोजी-रोटी खा गई। उनके आधार चुपके से बनने लगे, हम भारत के नागरिक हैं वे कहने लगे। गरजा हिन्दू का ठेकेदार अब तो होगा आरपार। आतंक मिटेगा दुनिया से, हिन्दू राष्ट्र बनेगा भारत ये। अचानक मोहब्बत की हूक हुई, मदरसों की डिग्री वैलिड हो गई। सदियों से दलितों पर अत्याचार का किया गया परचार। छिपकर इसके पीछे बैठ, बनाया एससी/एसटी एक्ट। आकाशवाणी हुई "यदि बंटोगे तो कटोगे"। पीछे से आई यूजीसी बोली, “देखते हैं मिलजुल कर तुम कैसे रहोगे !“ मुसलामान होता कभी नहीं देश के साथ, वे बोलते रहे और करते रहे सबका साथ उनका विकास।
जहां जहां है भारी भीड़, वहीँ परोसें मोदी खीर।
प्रतिभा बैठे जहां-जहां, वे धूल उड़ाएं वहां-वहां।
हिन्दू हिन्दू मात्र दिखावा, राष्ट्रवाद पाखण्ड।
वोट देवता जहां जहां, वहीँ आदि अव अन्त।
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