हिन्दू और आरक्षण

 

हिंदू समाज द्वारा ब्राह्मणों का तिरस्कार स्वयं के पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा है। थोड़ी देर के लिए पूर्वाग्रह से दूर हो जाओ और सोचो, आप इस निष्कर्ष पर अवश्य आएंगे कि हिन्दू समाज को यदि कोई संगठित कर सकता है तो वह ब्राह्मण वर्ग ही है। कथा, संगीत एवं साहित्य के माध्यम से सनातनी समाज में धर्म-संस्कृति के अनुकूल मनोवृति का वह सृजन करता है एवं उसे दृढ बनाता है। केवल ब्राह्मण ही ऐसा है जिसके न में हाँ होता है। उसे सनातन समाज और राष्ट्र विस्तार के प्रति सच्चा लगाव होता है क्योंकि वह उसकी उतपत्ति है। उसने राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की। पुनः उसने ही संघ के माध्यम से भारतीय जन संघ और जन संघ से भारतीय जनता पार्टी बनाई ताकि स्वतंत्रता के बाद भी देश की सत्ता बाहरी लोगों के हाथ लगने से बच सके। अंग्रेज मूर्ख नहीं थे - वे जानते थे हिन्दू समाज का विघटन तभी संभव है जब उससे ब्राह्मण अलग होगा और यही नीति कांग्रेस ने भी अपनाई। विश्व में सुखी और शांत जीवन केवल सनातन व्यवस्था में संभव है और सनातन व्यवस्था ब्राह्मण से संभव है।

कांग्रेस ने आरक्षण नामक एक ही हथियार से सारे हिन्दू समाज को बेहोश कर दिया है। सरकारी नौकरी नाम की एक हड्डी पेंड पर लटका दी है, सारा समाज अपना पारम्परिक उद्योग त्यागकर सर उठाये उसे ही देख रहा है जबकि सभी जानते हैं कि लाभ केवल कुछ को ही मिल सकता है। इस कानून ने हिन्दू समाज को दो वर्गों में बाँट दिया है, जातिवाद का जहर घोल दिया है। एक बड़ा वर्ग दूसरे वर्ग को पेंड के करीब आने पर थके तक भौंकता है। हड्डी के चूरे गिरते हैं, खौ खौ ...सब झपट पड़ते हैं। दो चार को नसीब हो गया तो वे दूर बैठकर और जोर भोंकते हैं, मोछ चाटते हैं। अब होशियारी देखिये जिस पारम्परिक जीविका को इन्होने त्याग दिया उस पर अल्पसंख्यक ने कब्ज़ा कर लिया। इस तरह से कांग्रेस ने उनके जीवन स्तर को सुधार दिया और जिनकी गरीबी दूर करने का नारा दिया उसे गरीब बना दिया। अब जबसे मोदी सरकार आई है तबसे इन नौकरी व्यसन में लिप्त लोगों को उद्योग की और मोड़ा जा रहा है और समाज में दूरियां कम करने की कोशिश की जा रही है।

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