एक दो लोग शराब पीते थे, आज एक दो लोग नहीं पीते है

दस पंद्रह वर्ष पहले गावों में एक दो लोग शराब पीते थे, आज एक दो लोग नहीं पीते है। मांस खाने की स्थति तो यह हो गई है कि आदमी गिद्ध हो गया है। देश नशे की लत में है। वहीँ हमारी सरकार जी को वोट का एडिक्शन है। उन्हें जब वोट की तलब आती है तब चाहे जिस कीमत में मिले उन्हें वोट चाहिए ही चाहिए। चाहे हिन्दू समाज टूट जाय, चाहे देश में एक और बंगलादेश देश बन जाय, कुछ हो जाय बस वोट चाहिए। वे वोट के लिए सारे देश को अपढ़ निरक्षर बना सकते हैं। वोट के कारण उन्हें यदि सबसे अधिक दुश्मनीं है तो ब्राह्मणों से है। जबकि जब वे वोट के लिए तड़पने लगते हैं तब ब्राह्मण ही उसकी व्यवस्था करते हैं चाहे अपना रक्त ही क्यों न पिलाना पड़ जाय। ब्रह्मण भारतीय शिक्षा का आधार है - उस पर हमला देश के शिक्षा तंत्र पर हमला है। ब्राह्मण अध्यापक से पढ़ेंगे तभी आरक्षण के लाभ मिलेंगे। फिर भी आज ब्राह्मण को पिछड़ा नफ़रत करता है, उससे ज्यादा दलित नफ़रत करता है, ब्राह्मण, क्षत्रिय में कुछ ऐसे भी वर्ग हैं जो अंदर ही अंदर प्रतिस्पर्धी हैं। पैसे वाला वैश्य नौकरी में ब्राह्मण लड़की/लड़कों को रखना पसंद करता है क्योंकि अधिकतर वे धोखेवाज नहीं होते हैं और साफ सुथरा रहते हैं। किन्तु सेठ अपने नौकर से अच्छा व्योहार नहीं करता और प्रयाप्त मजदूरी भी नहीं देता। आज समाज इस तरह विखंडित है। ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य में ही एक ऐसा वर्ग है जो बहुत सक्षम है। पहला परदे के पीछे सारा तंत्र चलाता है। दूसरा देश के स्वाभिमान का मस्तक है, तीसरा अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। फिर भी यदि इनसे बहुत नफ़रत है तो देश के किसी एक भाग पर कूड़ा समझकर इन्हें अलग कर दो, अछूत मान लो। हमारा धैर्य टूट रहा है - हमें संयुक्त परिवार नहीं चाहिए। अब शेष सभी जाति वादियों से अलग, हम सारे सवर्ण जाति नहीं सवर्ण बनकर रहना चाहते हैं।

Comments

Popular posts from this blog

100th episode of PM Modi’s Man-ki-Baat

आचार्य प्रवर महामंडलेश्वर युगपुरुष श्री स्वामी परमानन्द गिरी जी महाराज द्वारा प्रवचन - प्रस्तुति रमेश चन्द्र तिवारी

A Discovery of Society