जाति आधारित कानून
जोकर अजीब देखो, ज्ञानियों की खीस देखो
नंगन की नाच देखो, गीत सुनो गूंगन के ।
ऐसे हास्य दृश्य के अनेक आइटम देखो
चित्र हैं विचित्र औ चरित्र राजनीति के ।
कोई इतना बढ़िया ज्ञान नहीं दे सकता जितना सरकार ने दिया : "बंटोगे तो कटोगे।" दूसरी तरफ सरकार ही इसारा करती है : "जोर-जोर कहो ये मनुवादी हैं" ... कहो "तिलक, तराजू औ तरवार - इनको चहिए जूते चार।" ...कहो यूरेशिया के हो वहीँ भाग जाओ।" तीसरी तरफ बोलती है : "ले यूजीसी पकड़ और न तो खुद पढ़, न इन्हें पढ़ने दे, साथ ही इनकी शिक्षा की दुकानें भी लूट ले।"
तुम वह हो जो सबसे ज्यादा पी सकते हो,
पीना बुरी बात है भी बेहतर कर सकते हो।
लगता था कमल पर बैठकर देवता उतर आये। जातीय घृणा दूर होगी, भाईचारा होगा, देश हिन्दू राष्ट्र बनेगा। सपना समाप्त हुआ - आँख खुली तो क्या देखा :-
दामन मिला आदमी का मगर
जिंदगी है मिली एक हैवान की।
आदमी की शकल हो गयी आम है
आदमी दिख रहा आज शैतान भी।
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