राक्षस VS ब्राह्मण

मानवता में केवल दो वर्ग हैं। दारू पीकर बलबलाने वाले, खैरात पर बिकने वाले, व्यभिचारी, भक्षाभक्ष्य, ब्र्ह्मद्रोही, नारायणद्रोही, पतित आदि सभी राक्षस हैं। इसके विपरीत वे सभी ब्राह्मण हैं जो सदाचारी हैं, ज्ञानी हैं, धर्मनिष्ठ हैं। ब्राह्मण वे भी हैं जो हरि या हर के समर्पित भक्त हैं। त्रिलोकी नाथ राम जी को गरीब नवाज कहा जाता है। उनके गरीब दुश्चरित्र नहीं थे। यूजीसी ब्राह्मण दमन का क़ानून है, रावण संहिता है, अधर्म है। इस सरकार के अच्छे दिनों का भण्डार समाप्त होने वाला है इसलिए उसका मतिभ्रम हुआ है और उसने ब्राह्मणों की प्रतिष्ठा नष्ट करने का निर्णय किया है। ब्राह्मण की प्रतिष्ठा ही वासुदेव की प्रतिष्ठा है और उसे कलंकित करने का अर्थ है विश्व में विनाश। ब्राह्मण ने तप करके ब्रह्माण्ड में महादेव के दर्शन किये हैं। वह माता भवानी का प्रतिनिधि है इसलिए किसी भी तूफ़ान में वह पथभ्रष्ट नहीं हुआ है। मोदी जी अभी भी समय है, धर्म का साथ दो - धृतराष्ट्र मत बनों, नहीं तो पाण्डव केवल पांच नहीं हैं, उनके साथ सुदर्शनधारी भी हैं। सब कुछ नष्ट होगा।

Comments

Popular posts from this blog

आचार्य प्रवर महामंडलेश्वर युगपुरुष श्री स्वामी परमानन्द गिरी जी महाराज द्वारा प्रवचन - प्रस्तुति रमेश चन्द्र तिवारी

100th episode of PM Modi’s Man-ki-Baat

Festivals With Poetic Greetings