उच्च शिक्षा आयोग

 

जब हिन्दू को दो वर्गों में बांटकर उन्हें संघर्ष के लिए आमने सामने खड़ा कर दिया जाय तब हिन्दू एकता की बात तो पाखंड है। और यदि तंत्र पाखंड पर आधारित हो गया हो तो संविधान या प्रजातंत्र का मतलब ही खतम। हम आजाद भारत में गुलामी से बड़ी गुलामी में हैं तो हमारे लिए आजादी का क्या मतलब? यूजीसी अधिनियम ने तो हमारी नागरिकता ही समाप्त कर दी है क्योंकि एक नागरिक का स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा जन्म सिद्ध अधिकार होता है। सरकार क्या कर रही है? वह तो हिन्दू राष्ट्र बनाते बनाते गजब-ए-हिन्द का रास्ता साफ कर रही है। हम ऐसा भी नहीं चाहते कि दलित या पिछड़ा वर्ग पर कोई अत्याचार हो। कानून अच्छी नियत से सबके कल्याण को ध्यान में रख कर बनाया जाना चाहिए़ न कि तुष्टिकरण या दुर्भावना भावना से ।

यूजीसी अधिनियम सिद्ध करता है कि देशी सरकार हिंदुत्व की खाल में मुगली हुकूमत है, बर्तानिया कब्जेदारी है। जिसका उद्देश्य भारतीय समाज को कलंकित करना और संस्कृति नष्ट करना था। मोदी सरकार धृतराष्ट्र है। उसे द्रोपदी चीर हरण प्रिय है। पांडवों की आँखों के सामने अब उनकी पत्नी ही नहीं बल्कि बहन, बेटियों की इज्जत लुटेगी। मोदी रावण बन गया है। सीता हरण उसे पसंद है। सत्ता मद में अन्धा आज का धृतराष्ट्र भ्रम में है कि पांडव केवल पांच हैं, कौरव सौ जिनके वोट से वह अपराजेय बना रहेगा। आज का अहंकारी रावण भ्रम में है कि सीता के साथ केवल दो बनवासी हैं, राक्षस अनगिनत हैं अतः वह अजेय हैं। मोदी सरकार देश में महाभारत चाहती है। मोदी सरकार लंका दहन चाहती है। हम तीन वो वर्ग हैं जिनमें अभी भी महाराजा सुहेल देव हैं, महाराणा प्रताप हैं, शिवाजी हैं, लक्ष्मी बाई हैं, दुर्गावती हैं जो अपने स्वाभिमान, अपने लाज की रक्षा प्राणों की कीमत पर करने में सक्षम हैं। हम वे लोग हैं जिनके ह्रदय में कृष्ण निवास करते हैं, हमारी बहन बेटियों का भाई कान्हा है। हमारा आश्रय माता सीता के चरणों में है, परम पिता राम के चरणों में है। हम वे लोग हैं जिन्होंने त्रिलोकी नाथ राम के लिए ही मोदी सरकार बनाये थे। सोचा था राम राज आ गया। यह सोचा ही नहीं था कि ऋषि के वेश में रावण आया है जिसका उद्देश्य धर्म की आड़ में हमें वेइज्जत करना है। सत्ता लोभ में अन्धे बहुरूपिये तू कुछ नहीं कर सकेगा। सुदर्शनधारी तुम्हें नष्ट कर देगा। जो अपने परिवार का हो न सका, जो अपने अंधभक्तों का जिन्होंने प्रधानमंत्री बनाया उनका भी न हो सका वह आरक्षित वर्ग का कैसे हो सकता है?

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