भावनाओं का भाँग


 

राम मंदिर निर्माण, धारा 370 निरस्त, भारतीय संस्कृति का पुनरुत्थान, संशाधनों का अभूतपूर्व विस्तार, आर्थिक और औद्योगिक विकास, ईडब्लूएस कानून, वक्फ कानून में सुधार आदि बहुत सारे सराहनीय कार्य मोदी सरकार ने किये हैं, किन्तु इसमें सवर्ण को क्या मिला? हम राष्ट्रवादी हैं, भारतीय संस्कृति के पोषक हैं इसलिए हमें देश के विकास पर गर्व मिला है। अब यदि अपने सवर्ण वर्ग विशेष की दृष्टि से देखें तो सबसे अधिक हमारा ही नुक्सान हुआ है क्योंकि सबका साथ सबका विकास नहीं बल्कि बड़े को काट छोटे को खैरात हुआ है। साथ ही इसके पीछे अल्पसंख्यक का दोनों धार्मिक और आर्थिक विकास इतना हुआ है जितना आरक्षण से आरक्षित वर्गों को 75 वर्षों में नहीं हो सका। कांग्रेस काल में हमेशा मुस्लिम और दलित का जीवन स्तर सामान रहा है। किन्तु मोदी सरकार के दौरान दलित और ओबीसी वर्ग मुस्लिम रोजगारियों के मजदूर बन गए हैं। मुस्लिम व्यापारियों के उत्थान से सवर्ण व्यापारियों की रीढ़ टूट गई है क्योंकि वे हर तरह से व्यापार नहीं कर सकते। अब यदि बात ब्राह्मणों की करें तो मोदी सरकार में इनकी वही स्थिति हुई है जो स्थिति पकिस्तान में हिन्दुओं की है। आज इस वर्ग का विरोध करके, इसे गाली दे करके सबकी सरकारें बनती हैं। जातीय घृणा ने इसके धार्मिक और सामाजिक दोनों व्यवसाय हड़प लिए हैं। यह वर्ग ऐसा है चाय नहीं बेच सकता - यह भारतीयता, सनातन चेतना का रक्षक है, अच्छा छात्र है और अच्छा शिक्षक है। मोदी सरकार ने यदि किसी चीज की बुरी उपेक्षा की है तो वह शिक्षा है। अंत में जब इससे भी काम नहीं चला तो सरकार ने यूजीसी के माध्यम से सवर्ण छात्रों को शिक्षा संस्थानों से वेदखल कर देने का उपाय निकाला है। हिन्दू भाइयों सभी सरकारें आपको भावनाओं का भाँग खिला रही हैं आपकी रोटी चुपके से अपने पालतू को खिसका रही हैं।  

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