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Showing posts from January 25, 2026

सवर्ण

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यूजीसी कानून का विरोध करने वाला सवर्ण आखिर जाएगा कहाँ जब देश की हर पार्टी इस कानून की समर्थक है? इस प्रश्न का उत्तर है किसी के पास ? मेरे पास है तो सुनों। पेड़ों में जब बसन्त आना होता है तो पतझड़ आता है। बंटवारे के समय पकिस्तान से पलायन किये हुए सिंधी आज सभी अरबपति हैं और हिन्दुस्तानी मूल के लोगों को नौकर रखे हुए हैं। बिहार और तमिनाडु से बहुत बड़ी संख्या में सामान्य वर्ग पलायन कर चुका है। सामान्य वर्ग पर जब अत्याचार बढ़ेगा तो प्राकृतिक रूप से जहां वे अधिक होंगे सुरक्षा के कारण वहीँ इकट्ठे होने लगेंगे और जब बड़ी संख्या में एकत्रित हो जाएंगे तो उन्हें स्वयं का तंत्र विकिसित करना सरल हो जाएगा। सवर्ण के समाज में जाति हटा दी जाएगी - वहां न कोई ब्राह्मण होगा न वैश्य न क्षत्री सभी सनातनी होंगे। भूसा नहीं सिर्फ गेहूं होगा। भेड़ों के झुण्ड नहीं शेरों के परिवार होंगे। सबको अपने राष्ट्र से प्यार होगा। सम्मुख अत्याचारी, ईर्ष्यालु समाज के सापेक्ष आपस में प्रेम होगा, संघर्ष करने की प्रेरणा होगी। वहां उसके अपने शिक्षा संस्थान होंगे, अपनी सरकार होगी। उनकी आबादी बड़ी तेजी से व्यापार करेगी और पैसा होने से उत्त...

अयोग्य शिक्षक ही देश को पूरी तरह समाप्त कर सकता है

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किसी देश को युद्ध से पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता है। यदि उसे समूल नष्ट कर देना है तो एक मात्र और सबसे सरल तरीका है कि उसकी शिक्षा भ्रष्ट कर दो। शिक्षा का स्तर गिरने से बड़ी संख्या में लोगों को डाक्टर ही मार देंगे, इंजिनियर पुल-बिल्डिंग बनाएंगे कुछ उसमें दबकर मर जाएंगे। अर्थशास्त्री देश को भूखों मार देंगे। नौकरशाह गृहयुद्ध पैदा कर देंगे और एक साथ ये सारी तबाही लाने में अयोग्य शिक्षकों का समूह अकेले ही काफी होगा। एक गुजराती ने हिन्दू राष्ट्र बनने नहीं दिया था। आज दो गुजराती हैं, पूरी वर्वादी के सरल तरीके को वे ही खोज सके हैं। खैर, भोजन, कपड़ा और मकान के वगैर जीवन नहीं चल सकता। उसी तरह संघर्षों से बचकर जीवित नहीं रहा जा सकता। देश या हिन्दू समाज द्रोहियों से संघर्ष स्वतंत्रता संग्राम की तरह अनिवार्य हो गया है। साथ में अब हमारा यह भी कर्तव्य है कि अपने छोटे भाइयों को द्रोहियों के झांसे से बचाएं। उन्हें समझाएं कि देश से अधिक सत्ता के लोभी हमारे खिलाफ मुस्लिमों को भी ललकार सकते हैं। उन्हें समझाएं कि वे हमसे ईर्ष्या न करें क्योंकि हमसे संचालित मंदिरों की आय में उनका भी हिस्सा है, हमारे व्य...

विश्व विद्यालय अनुदान आयोग विनियम 2026

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विश्व विद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम 2026 केवल धर्म, नस्ल , लिंग, जन्म स्थान, जाति या अपंगता के आधार पर विशेष तौर पर एससी/एसटी, सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग, गरीब, विकलांग के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करना कानून का उद्देश्य है। हर विद्यालय या विश्वविद्यालय में सामान अवसर केंद्र स्थापित होगा। यह केंद्र नजर रखेगा कि वंचितों का लाभ उन्हें ठीक से मिल रहा है या नहीं। इसके हेतु केंद्र जिला प्रशासन, पुलिस, मिडिया से संपर्क रखेगा। उच्च शिक्षा संस्थान की प्रशासनिक या प्रबंध समिति एक वरिष्ठ प्रोफेसर को कोआर्डिनेटर नामित करेगा। यह प्रोफेसर ऐसा होगा जो वंचित वर्ग के कल्याण के प्रति अच्छी धारणा रखता हो। सामान अवसर केंद्र में एक समता समिति होगी जिसका अध्यक्ष संसथान प्रमुख होगा। वरिष्ठ संकाय सदस्य के रूप में तीन प्रोफ़ेसर, सदस्य होंगे, एक कर्मचारी सदस्य, दो समाज के प्रतिनिधि एवं दो छात्र प्रतिनिधि से समिति का गठन होगा। इसका सचिव सामान अवसर केंद्र का कोआर्डिनेटर होगा। समित के ये सभी प्रतिनिध अन्य पिछड़ा, एससी/एसटी, महिला, दिव्यांग वर्ग के होने अनिवा...

उच्च शिक्षा आयोग

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  जब हिन्दू को दो वर्गों में बांटकर उन्हें संघर्ष के लिए आमने सामने खड़ा कर दिया जाय तब हिन्दू एकता की बात तो पाखंड है। और यदि तंत्र पाखंड पर आधारित हो गया हो तो संविधान या प्रजातंत्र का मतलब ही खतम। हम आजाद भारत में गुलामी से बड़ी गुलामी में हैं तो हमारे लिए आजादी का क्या मतलब? यूजीसी अधिनियम ने तो हमारी नागरिकता ही समाप्त कर दी है क्योंकि एक नागरिक का स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा जन्म सिद्ध अधिकार होता है। सरकार क्या कर रही है? वह तो हिन्दू राष्ट्र बनाते बनाते गजब-ए-हिन्द का रास्ता साफ कर रही है। हम ऐसा भी नहीं चाहते कि दलित या पिछड़ा वर्ग पर कोई अत्याचार हो। कानून अच्छी नियत से सबके कल्याण को ध्यान में रख कर बनाया जाना चाहिए़ न कि तुष्टिकरण या दुर्भावना भावना से । यूजीसी अधिनियम सिद्ध करता है कि देशी सरकार हिंदुत्व की खाल में मुगली हुकूमत है, बर्तानिया कब्जेदारी है। जिसका उद्देश्य भारतीय समाज को कलंकित करना और संस्कृति नष्ट करना था। मोदी सरकार धृतराष्ट्र है। उसे द्रोपदी चीर हरण प्रिय है। पांडवों की आँखों के सामने अब उनकी पत्नी ही नहीं बल्कि बहन, बेटियों की इज्जत लुटेगी। मोदी राव...

यूजीसी अधिनियम

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यूजीसी अधिनियम कानून की शक्ल में एक घातक हथियार है जिसे सरकार ने अपराध रोकने के लिए नहीं बल्कि अपराध करने के लिए बनाया है। इस हथियार से आरक्षित युवा बेरोकटोक अनारिक्षत छात्राओं को अनैतिक रूप से ब्लैकमेल कर सकता है और छात्रों के सीढ़ी का सांप बन सकता है। ऐसे अन्याय को अनारक्षित युवा चुपचाप सहन तो नहीं करेंगे - प्रतिशोध स्वाभाविक रूप से उभर आने की संभावना रहेगी। यदि राय लिया जाय तो आरक्षित वर्ग भी बेवजह पचड़े में पड़ना नहीं चाहेगा। माँ-बाप खुद मर सकते हैं किन्तु अपने बच्चों को मरते नहीं देख सकते। मोदी जी के प्रति तात्कालिक श्रद्धा एवं विश्वास के कारण लोगों ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम को स्वीकार कर लिया था किन्तु बच्चों की कीमत पर इस कानून को सामान्य वर्ग स्वीकार नहीं करेगा। देश के प्रत्येक क्षेत्र में कार्यरत सामान्य वर्ग के मां-बाप की निष्ठा हिल सकती है तो सोचो परिणाम क्या हो सकता है। यदि वैश्य न होगा तो देश का व्यापार उनसे न हो सकेगा, यदि ब्राह्मण न होगा तो भारतीय संस्कृति की रक्षा और कोई नहीं कर सकता और यदि क्षत्रिय ह्रदय न होगा तो आसमान से छलांग लगाने वाले न होंगे। मैं यह नहीं ...

यूजीसी

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  मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था सुधारी है, उद्योगों का विकास किया है, हिन्दू मंदिरों का पुनर्निर्माण और यात्रा को आरामदायक बनाया है। राम मंदिर निर्माण, धरा 370 को हटाने जैसे असंभव को संभव किया है। स्वच्छ भारत अभियान में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। लेकिन मोदी सरकार ने हिन्दू समाज को तीन बराबर टुकड़ों में चीर डाला है। पहला भाग - महिला सशक्तिकरण के नाम पर पति-पत्नी को बांटने के अतिरिक्त सम्भ्रान्त परिवारों की लड़कियों को सड़क पर बेलगाम नंगा कर दिया है। उनका यह क़ानून मुस्लिमों पर नहीं चल सका। दूसरा भाग - एससी/एसटी एक्ट को एकतरफा बनाकर तथा आरक्षण कानून में उचित सुधार से मुंह मोड़कर सामान्य और शेडूल के बीच कभी न भरने वाली गहरी खाई खोद दी है। तीसरा भाग - अब यूजीसी एक्ट से बच्चों को बच्चों से अलग कर दिया है। ध्यान देने की बात यह है कि वोट तुष्टिकरण में सामान्य वर्ग बल्कि सम्पूर्ण हिन्दूसमाज मिटेगा या बचेगा इसका ध्यान बिलकुल नहीं दिया गया है। हर कानून में पहले से ही मान लिया गया है कि सामान्य वर्ग अपराधी स्वभाव का है, उसे अल्पसंख्यक से जोड़ दिया गया है। इन कानूनों से हिन्दू समाज में एकता ...