पत्रकार लड़की रूचि तिवारी

 



जेएनयू वामपंथियों की मांद है। ये वे लोग हैं जिनका स्वतंत्रता के बाद से अब तक आरक्षण के विशेषाधिकार पर कब्जा रहा है। ये धनवान और सक्षम लोग हैं, मुस्लिम समाज से इनका गहरा संबंध है, इन्हें भारतीयता के प्रति स्वाभाविक घृणा है। अतः अब ये हमारे हिन्दू समाज के चतुर्थ वर्ग के प्रतिनिधि नहीं हैं। इन्हें विशेषाधिकार कानूनों से अलग करके सामान्य किया जाना चाहिए क्योंकि ये वही आतंक कर रहे हैं जो जम्मू कश्मीर में आतंकी धर्म पूछकर करते हैं। इन्होने पत्रकार लड़की रूचि तिवारी के साथ पुलिस बल की उपस्थिति में जाति पूछकर दुर्व्योहार से दुराचार की ओर ले जाने की कोशिश की। पुलिस भी असहाय दिखी। हे तथाकथित राष्ट्रवादी पार्टी ! जब यही करना था तो धारा 370 क्यों हटा दिया? कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति की तरह खोल दो आतंकियों के लिए बार्डर और सौंप दो यूनिवर्सिटीज को उन्हें ! बना दो पुरे देश को जाहिल-जकड, आतंकी, नक्सली ! आजकल सरकारी कार्यालयों में नीले अमीरों की संख्या अधिक हो गई है। दलित नाम पर साहब लोग सामान्य वर्ग के मातहत लोगों को भद्दी-भद्दी गाली देते है, उनका सरेआम अपमान करते हैं। इस पर भी हमारे कुछ ऐसे मित्र हैं जो कहते हैं प्रधानमंत्री पर भरोसा रखो - यूजीसी 2026 के पीछे कोई न कोई कारण होगा। आपने कारण पूर्व पीएम वीपी सिंह के मंडल में भी देखा था, आपने 2018 के एससी/एसटी अधिनियम संशोधन में देखा था, अभी और देखना बाकी है?

मानता हूँ तुम सबसे ज़्यादा पी सकते हो,

पीना बुरी बात है भी बेहतर कह सकते हो ।


Comments

Popular posts from this blog

100th episode of PM Modi’s Man-ki-Baat

आचार्य प्रवर महामंडलेश्वर युगपुरुष श्री स्वामी परमानन्द गिरी जी महाराज द्वारा प्रवचन - प्रस्तुति रमेश चन्द्र तिवारी

A Discovery of Society