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Showing posts from January 4, 2026

हिन्दू और आरक्षण

  हिंदू समाज द्वारा ब्राह्मणों का तिरस्कार स्वयं के पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा है। थोड़ी देर के लिए पूर्वाग्रह से दूर हो जाओ और सोचो, आप इस निष्कर्ष पर अवश्य आएंगे कि हिन्दू समाज को यदि कोई संगठित कर सकता है तो वह ब्राह्मण वर्ग ही है। कथा, संगीत एवं साहित्य के माध्यम से सनातनी समाज में धर्म-संस्कृति के अनुकूल मनोवृति का वह सृजन करता है एवं उसे दृढ बनाता है। केवल ब्राह्मण ही ऐसा है जिसके न में हाँ होता है। उसे सनातन समाज और राष्ट्र विस्तार के प्रति सच्चा लगाव होता है क्योंकि वह उसकी उतपत्ति है। उसने राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की। पुनः उसने ही संघ के माध्यम से भारतीय जन संघ और जन संघ से भारतीय जनता पार्टी बनाई ताकि स्वतंत्रता के बाद भी देश की सत्ता बाहरी लोगों के हाथ लगने से बच सके। अंग्रेज मूर्ख नहीं थे - वे जानते थे हिन्दू समाज का विघटन तभी संभव है जब उससे ब्राह्मण अलग होगा और यही नीति कांग्रेस ने भी अपनाई। विश्व में सुखी और शांत जीवन केवल सनातन व्यवस्था में संभव है और सनातन व्यवस्था ब्राह्मण से संभव है। कांग्रेस ने आरक्षण नामक एक ही हथियार से सारे हिन्दू समाज को बेहोश कर ...

ब्राह्मण, क्षत्रिय एवं शूद्र

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  हमारा प्राचीन ग्रन्थ स्कन्द पुराण कहता है: "जन्मना जायते शूद्रः, संस्कारात् भवेत् द्विजः। वेद पाठात् भवेत् विप्रः, ब्रह्म जानाति इति ब्राह्मण।" जन्म के समय सभी शूद्र होते हैं। अच्छे संस्कार प्राप्त करने पर उन्हें द्विज की पदवी मिलती है। उसके बाद वेद ज्ञान अर्जित करने पर विप्र सम्मान मिलता है। अंत में ब्रह्म बोध के बाद ही वे ब्राह्मण कहलाने योग्य हो सकते हैं। प्राकृतिक रूप से सबकी प्रवृति एक सी तो हो नहीं सकती। उन्हीं किशोरों में कुछ को युद्ध विद्या पसन्द आयी तो क्षत्रिय की उपाधि मिली जिसका अर्थ है सुरक्षा क्षत्र। कुछ किशोरों ने मानसिक अथवा शारीरिक विकास में रूचि नहीं लिया तो वे शूद्र ही रह गये। किन्तु उन्होंने खेती, कौशल और पशुपालन में अच्छी रूचि दिखाई, प्रशंसनीय कार्य किये। बच्चा शूद्र होता है तो क्या वह प्यारा नहीं होता ? शूद्र प्रिय एवं मंगलकारी शब्द है घृणा का शब्द नहीं। शूद्र में शू का का अर्थ है त्वरित और द्र का गतिमान होना। इसीलिए बच्चा चंचल होता है। यह शब्द किसान एवं कुशल शिल्पकार के लिए है जिसका सम्बन्ध अन्नदात इंद्र और भगवान् विश्वकर्मा से है। समय के साथ सभ्यता का...