राष्ट्र स्वस्वामी महाराज का चूहा शेर बन गया


सरिता समुन्द्र की ओर बहती है, बहते-बहते पहाड़ पर नहीं चढने लगती। चन्द्रमा शीतल होता है, अचानक आग नहीं फेकने लगता। शेर मांस खाता है दाल चावल कभी नहीं। राम ने, कृष्ण ने अवतार लिया धर्म-संत रक्षा हेतु न कि उनसे खेलने हेतु। सभी दैविक पुरुष या तंत्र न चहरे बदलते, न उद्देश्य - चहरे बदलने वाले राम शत्रु होते हैं। केशव की कूटनीति जटिल थी किन्तु राष्ट्रीयता के पीछे शकुनि का पोषण नहीं करती थी। रोहिंग्या रहेंगे, देशी भगेंगे। घर वाले लड़ेंगे, बाहरी पलेंगे। राष्ट्र स्वस्वामी महाराज का चूहा शेर बन गया है - महाराज जी का जीवन संकट में आ गया है। गड़बड़ वहीँ हो गया जब भगवान् मोहक का अवतार कुयुग में हो गया। भगवान् ने करिश्मा दिखया तो भक्तों ने आरती सजाया। भगवान् ने भरमाय तो उन्होंने दीपक फूंक-फूंक कर बुझाया। लोग चकित हैं कि भगवान् भाई असली हैं या नकली?

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