कुत्ता तो कुत्ता होता है
कुत्ते को उसका मालिक कितने ही डंडे मारे किन्तु घूमकर वह दरवाजे पर आता ही है। वैसे भी कोई विकल्प नहीं है, वेचारा जाए कहाँ ? हर दरवाजे पर दो-चार कुत्ते बैठे हैं। कुत्ता तो कुत्ता होता है कोई शेर तो होता नहीं है कि अपने परिवार के साथ अलग साम्राज्य बना ले। बड़ी संख्या में सियार भी तो हैं अन्दर कन्दर के इकट्ठे हो गए : हुक्काआआ....हुवाँआँआँ....! उनकी आवाज सुनकर कुछ और कुत्ते भागे और अपने मालिक के दरवाजे खड़े होकर सियारों को जवाब देने के लिए मुंह ऊपर किया और म्यूजिक कंपनी की तरह एक के बाद एक: होंओंओं...... कुत्तों का मालिक भेड़िया अब कुत्तों को नहीं सियारों को पालना चाहता है। उधर सियारों का तथाकथित नेता लकड़बग्घा उनके प्यार में इतना दीवाना है कि वह उनका मुंह चाटता है। सभी कहते हैं कि गली-गली में कुत्ते जीना तोबा किये हुए हैं किन्तु कोई यह नहीं कहता कि कुत्ते न होते तो सियार भी न होते क्योंकि लकड़बग्घे सियारों से याराना तो किये हुए हैं किन्तु अंदर ही अंदर इस ताक में हैं कि कुत्ते हटें नहीं कि वे सियारों की गर्दन धर-दबोचे। जो भी हो, गली के कुत्तों की कौन कदर करता है ! हाँ, यदि वे जंगली हो जाएँ...