न्याय के डिब्बे में अन्याय
एक थाने में प्रभारी साहब अपनी कुर्सी पर विराजमान हैं। उनके साथ वहां बैठे कुछ अन्य लोग ठहाके लगा रहे हैं। इतने में वहां दो व्यक्ति प्रकट होते हैं : काले पोशाक में एक वकील और एक सामान्य सा आदमी। वकील एक लिखित आवेदन पत्र थानाध्यक्ष को देता है और अपने साथ वाले व्यक्ति को आगे करते हुए कहता है : "सर, इस आदमी को देखो, यह अत्यंत गरीब और असहाय दलित है। आज सबेरे अपनी पत्नी के साथ यह अपने खेत में फसल काट रहा था। पड़ोस के गाँव में एक दबंग रहता है जिसका नाम राम शंकर है। वह लाठी लेकर वहां आया, इस वेचारे को भद्दी भद्दी जातिगत गाली दी। इसकी पत्नी के कपडे खींच लिए और उसके साथ अभद्र व्योहार किया। किसी तरह दोनों जान बचाकर भागे किन्तु इसकी पत्नी रास्ते में वेहोश हो गई। वो तो कहिये इसके घर के दो तीन लोग वहां पहुंच गए, नहीं तो इसकी पत्नी मर ही गई होती। इसके बाद राम शंकर ट्रैक्टर ट्राली लेकर आया और इसकी कटी हुई फसल को लादकर ले गया। इनके छोटे-छोटे दो बच्चे हैं। रोज मजदूरी से परिवार पलता है।" थानाध्यक्ष बिना कुछ सोचे एफआईआर दर्ज करता हैं और केश की जांच के लिए फ़ाइल को ऊपर बढ़ा देता है। कुछ दिन...