हिन्दू एकता का आधार ब्राह्मण
जैसे आँख दुनिया को देखती है किन्तु स्वयं को नहीं देख सकती, उसी तरह ब्राह्मण स्वयं कभी एक नहीं हो सका किन्तु यदि सम्पूर्ण हिन्दू समाज को एकता के सूत्र में किसी ने पिरोये रखा है तो वह ब्राह्मण है। घने जंगलों में आदिवासियों का जीवन प्राचीन हिन्दू संस्कृति पर आधारित है। आदिवासी समुदाय भी सूर्य, चंद्र, नदियों, पर्वतों और पेड़ों की पूजा करते हैं। कई स्थानों पर वे लोग भगवान शिव, राम जी या हनुमान जी जैसे देवी-देवताओं की भी पूजा करते हैं। इन्हें सनातन संस्कृति यदि ब्राह्मण ने नहीं दिया है तो फिर किसने दिया है? आदिगुरु शकराचार्य ने ही सनातन की पुनर्स्थापना की थी। आचार्य चाणक्य ने सिकंदर के विरुद्ध अखण्ड भारत की स्थापना की। उन्होंने नन्द साम्राज्य सहित सभी छोटे-छोटे राज्यों को समाप्त करके विशाल मौर्य साम्राज्य का निर्माण किया। देश भर की अनुसूचित जातियां सनातन मान्यताओं में गहरी आस्था रखतीं हैं। ओबीसी और सवर्ण की तो बात ही छोडो। मुग़ल शासन काल में महाराज तुलसीदास ने राम चरित मानस की रचना करके सनातन को संरक्षित रखा। आदिकाल से अब तक सारे समाज को भागवत कथा, रीति रिवाज, उत्सव, महोत्सव, तीर्थ, व्रत आदि ...