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NAG PANCHAMI - Gudiya Fest

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King Parikshit was killed by the serpent king Takshak. His son Janamejaya decided to avenge the death of his father, so he had a yajna performed in order to decimate the serpent race. Sage Astika arrived there on Shravan Shukla Panchami, the fifth day of the bright half of the lunar month Sawan (July/August), and stopped him from sacrificing snakes. That day has since been observed as Naga Panchami, a festival of worshipping the deity Nag. In some other states like Bihar, Rajasthan, Gujarat, Nag Panchami is celebrated on the fifth day of the waning moon in the same month. Many people observe fast and offer prayers to please the deity Snake. They worship the god serpent by offering milk, kheer, flowers, etc., in the belief that it would keep their families safe from snake bites. Serpents have a very important role in our mythology. The powerful king of snakes, Nag Vasuki, who resides on the neck of Mahadev, coiled around Mount Mandara as the rope of a churning rod and made it possible ...

मंदिर लूट लिया

मंदिर लूट लिया जिसने भी, चाहे भगवाधारी हो, चाहे कमल उपासक हो, या चाहे संत पुजारी हो, वंशज है तैमूर लंग का, बाबर का वह नाती है, गज़नी की सेना का सैनिक, काला वह कुलघाती है। चोर पकड़ने वाले लगते, चोरों के हितकारी हैं, धूल झोकने वाले भी, सत्ता के अधम पुजारी हैं। पाखंडी हैं, वेधर्मी हैं, शातिर सत्तावादी हैं, चोर, लुटेरे, झूठे, कातिल, सारे ये अपराधी हैं। धर्म ध्वजा के रक्षक जागो, जागो पूत सनातन के ! राष्ट्रवाद के पोषक जागो, जिनको प्रेम पुरातन से ! नवयुग का निर्माण करो, अब नए तंत्र का मन्त्र बनो, उलझे भारत को अब कोई, सुलझाने का ग्रन्थ लिखो।

विप्र देवता

जिन्हें नहीं विश्वास स्वयं पर, वे समूह में चलते हैं, रातों में एकांत मार्ग पर, कदम नहीं रख सकते है। जो चलता है सदा अकेले, करता शयन अकेले है, वही असंभव संभव करता, भू पर शाम सबेरे है।   विप्र देवता, भेंड़ नहीं हो, न भैंसों की हो तुम भीड़ ! तुम ज्ञानी हो वंश बाघ के, मात्र राष्ट्र की तुम हो रीढ़। आँख दिखाते हैं गीदड़, तो खड़ी लोमड़ी गुर्राती एक कहीं यदि हो जाते, तो दुनिया तुमसे थर्राती।   तुम तो भरत तिवारी हो, वर्दी वालो पर भारी हो, हर भाई की फ़िक्र तुम्हें है, तुम तो राम पुजारी हो। शास्त्र बनाया है तुमने, तो शस्त्र बनाये भी तुमने, अलग संगठित होने में, फिर देर लगाया क्यों तुमने? -Poet Ramesh Tiwari

हिन्दू

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हिन्दू इतना विखरा क्यों है, क्यों वेधर्मी हुआ समाज? क्यों फैले निर्लज्ज, लालची, चोर, पियक्कड़, धोखेवाज? एक दूसरे के दुश्मन क्यों, कोई नहीं किसी का आज? किसी बाहरी के सम्मुख, पड़ जाती धीमी क्यों आवाज? अत्याचार किया मुगलों ने, किया उन्होंने था व्यभिचार, बना दिए हिन्दू से मुस्लिम, दूषित कर आचार विचार। ऊंची नीची खाई खोदी, जाति जाति को डाला फाड़, गाड़ दिया सब धर्म संस्कृति, गड्ढे में फिर सत्तर हाथ, बिप्र द्रोह की कुटिल चाल से, रीढ़ सनातन की तोड़ी, ब्रिटिश राज ने धर्म मिशनरी, नगर नगर भर में खोली। कहने को तो सैंतालीस में, देश हो गया था आज़ाद, किन्तु नीति जिनके गुलाम थे, वही गुलामी लागू आज। फूट डालकर राज करो, की नीति अभी भी चलती है, छुआछूत की रोटी कच्ची, पलटाकर अब सिकती है। हिरन पकड़कर नोचा करते, जैसे कुत्ते, चील, सियार, धर्म सनातन नोच रहे सब, पक्ष, विपक्षी औ सरकार।   अगर सुरक्षित रहना है तो, धर्म मानना ही होगा, धर्म विमुख गैरों के जूते, सर पर रखना ही होगा। तुम एससी या एसटी कोई, ओबीसी या पंडित हो, बनिया, ठाकुर, लाला, गूजर, हिन्दू खंड विखंडित हो। उससे पहले सब के सब, सुन लो तुम मारे जाओगे, दाढ़ी की बे...

राम मंदिर चोरी

जिस मंदिर के लिए लाखों लोगों ने जान दे दी, धन संपत्ति निछावर कर दिया उसी मंदिर के सम्पत्ति की चोरी करने वालों ने सिद्ध कर दिया कि हमारे समाज का बहुत बड़ा हिस्सा दुनिया को तो डरता है किन्तु ईश्वर से नहीं। हिन्दू एक फुटकर समाज है जिसमें एक हिस्सा धर्मनिष्ठ है, राष्ट्र भक्त है - वह प्रभु श्रीराम की श्रद्धा में अपना सर्वस्व अर्पित कर सकता है। वहीँ मनमाने, अनुशासनहीन, स्वार्थ में अंधे लोगों की अपार भीड़ भी है जो न धर्म में आस्था रखता है और न ही राष्ट्र के प्रति निष्ठावान है। एक वे लोग हैं जो करोड़ों के सुन्दर आभूषणों को पहनाकर अपने राम के सौंदर्य का दर्शन करना चाहते हैं एक वे हैं जो राम को मूर्ती समझकर उन आभूषणों की चोरी से नहीं विचलित होते। संसार में सुरक्षित और सशक्त वह समाज होता जो अपने धर्म में गहरी आस्था रखता है। इसीलिए मनुस्मृति कहती है "धर्मो रक्षति रक्षितः"। अमेरिका जैसा सुपर पावर ईरान को हिला न सका क्योंकि ईरानियों को अपने धर्म से शक्ति प्राप्त हो रही थी। छोटा सा इजराइल अपने धर्म और राष्ट्र निष्ठा की ताकत पर चारों और दुश्मनों से घिरे होने के वावजूद शेर की तरह जीता है। अफगानि...

ब्राह्मण

 हिन्दू समाज राजनीति से भ्रमित होकर अपने एक सशक्त भाग ब्राह्मण से वेवजह नफ़रत करता है। कहने को तो कांग्रेस ने देश को अज़्ज़ाद कराया उसने हिन्दू को और भी परतंत्र कर दिया था। हिन्दू अपने धर्म से सम्बंधित कोई भी बात सार्वजनिक रूप से नहीं कर सकता था। गोस्वामी तुलसी दास द्वारा रचित राम चरित मानस ने घोर मुगलिया तूफ़ान में सनातन डीप को सुरक्षित रखा। हमारी संस्कृति को मिटा देने की अंग्रेजों की हर कोशिशें नाकाम हुई। वे ब्राह्मण थे जिन्होंने संघ जैसे संगठन को खड़ा किया। उसी संघ के ब्राह्मणों ने भारतीय जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी बनाई जिसने सन 2014 में सत्ता राष्ट्रवादी लोगों को देकर देश को देश को वास्तविक स्वतंत्रता प्रदान की। ब्राह्मण से हटकर हिन्दू सुरक्षित नहीं रह सकता और सनातन की अनुपस्थिति में किसी का जीवन जीने लायक नहीं बच सकता।   हिंदू समाज द्वारा ब्राह्मणों का तिरस्कार स्वयं के पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा है। थोड़ी देर के लिए पूर्वाग्रह से दूर हो जाओ और सोचो, आप इस निष्कर्ष पर अवश्य आएंगे कि हिन्दू समाज को यदि कोई संगठित कर सकता है तो वह ब्राह्मण वर्ग ही है। कथा, संगीत एवं साहित्य के ...

सूत न कपास जुलाहे घर लट्ठी-लट्ठा

एक देशी कहावत है : "सूत न कपास जुलाहे घर लट्ठी-लट्ठा"। कहने का अर्थ है "न नौकरी न चाकरी, परीक्षा देशव्यापी"। अरे भाई बच्चों को क्यों भरमाये घूम रहे हो?साफ-साफ बताओ न कि नौकरी नहीं है, अतः आप लोग कोई दूसरा प्रबंध सोचो। लेकिन सरकार इतना स्पष्ट तब बोल सकती है जब उसका इरादा राष्ट्र निर्माण का हो। आज की स्थिति के अनुसार पारम्परिक शिक्षा और उस पर आधारित रोजगार महत्वहीन हो चुके हैं। इसलिए सामाजिक समता के लिए केवल नौकरी और आरक्षण ही एक मात्र रास्ता नहीं है और न ही 'स्कील इंडिया' कह देने से काम चलता है। दुनिया भर के विश्वविद्यालय की जगह प्रशिक्षु कुटीर कारखाने खोले जा सकते हैं। साथ ही विपणन, बाजार निर्माण, उत्पादन तकनीकी से सम्बंधित अध्ययन एवं शोध संस्थान का विकास करके नई पीढ़ी को उद्योगी, स्वावलम्बी एवं समृद्ध बनाया जा सकता है। किन्तु सरकार बहादुर को तो "फुट डालो, खैरात बांटो और निष्कंटक राज करो" ही करना है क्योंकि यह सबसे सरल तरीका है। बताओ देश को स्वतंत्रता से क्या लाभ हुआ? जनता जानती है सरकार देश का सुधार कर रही है और सरकार बहादुर मन ही मन सोच रहे हैं : ...