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आरक्षित अनारक्षित में विषैला भेदभाव

बीजेपी सरकार ने यूजीसी अधिनियम के माध्यम से आरक्षित और अनारक्षित के बीच में विषैला भेदभाव पैदा कर दिया है जो मिटेगा नहीं। ऐसा अचानक क्यों किया है इसे स्पष्ट रूप से कोई नहीं जानता। कोई कहता है पीडीए कांसेप्ट को निष्प्रभावी करके पिछड़े और दलित को आकर्षित करना है, तो कोई कहता है कि मुख्यमंत्री योगी जी की तेजी से बढती लोकप्रियता को समाप्त करना है। जो भी हो, ऐसी राजनीति देश के लिए अत्यंत अशुभ है। ओबीसी और सामान्य में शून्य भेदभाव था, हिन्दू के नाम पर दोनों को इकठ्ठा करना सरल था और इसी आधार पर बीजेपी का संगठन खड़ा हुआ। मण्डल आयोग ने दोनों को बाँट दिया और तबसे जहां सवर्ण प्रत्यासी होते हैं वहां बड़ी संख्या में ओबीसी वोट कट जाते हैं। किन्तु अब जो हुआ है उसने तो दोनों वर्गों को एक दूसरे का दुश्मन बना दिया है। परिणाम यह होगा कि जहां ओबीसी प्रत्याशी होगा वहां सवर्ण नोटा ठोंकेगा और जहां सवर्ण प्रत्यासी होगा वहा ओबीसी अपने प्रत्यासी की ओर झुकेगा, वह भले किसी पार्टी का हो। बीजेपी के अमृत काल में काल पैदा हो गया है। आने वाले समय में सवर्ण अपनी अलग राजनीति के विकल्प को तलाशेगा, अपनी बस्तियां मुस्लिम से ...

साहिब से सब होत है

मोदी जी ने बता दिया मैं साहिब हूँ और आप बन्दे: यदि मैं राइ से पर्वत बना सकता हूँ तो एक झटके में पर्वत को राइ भी कर सकता हूँ। लेकिन उन्हें यह भी जानना चाहिए जब बन्दे इकट्ठे हो जाते हैं तो साहिब के साहिब हो जाते हैं। वैसे आपका झोला तैयार हो चुका है, माननीय, क्योंकि अपने गुरु की तरह आपको भी जिन्ना से प्यार हो चुका है। चाहे हिन्दू हिन्दू को बांटो या मुस्लिम राजनीति को पोशो बात एक है। संघ प्रमुख का कहना है "मन में यह भाव नहीं होना चाहिए कि एक को दबाकर दूसरे को खड़ा किया जाना चाहिए। आपस में प्रेम भाव होना चाहिए। समाज को बांटने या बंटने में चिंता होनी चाहिए।" सौ वर्षों से संघ हिन्दुओं को संगठित करने की कोशिश कर रहा है और आपने चुटकी बजाते उन्हें खण्ड-खण्ड कर दिया। सीधा मतलब है कि आपने उस सगठन को दरकिनार किया है जिसने आपको शेर बनाया। यह भी मत भूलो, वह आपको पुनः चूहा भी बना सकता है, उसने ऐसा किया भी है और करने की सोच भी रहा है। आपके मंत्री कहते हैं किसी के साथ नाइंसाफी नहीं होगी। आपने नाइंसाफी की हद कर दी है तब ये आवाज उठनी शुरू हुई है, कोई अपने पैर में ऐसे ही कुल्हाड़ी नहीं मारता। ...

एआई दिल्ली सम्मलेन

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  एआई दिल्ली सम्मलेन में अमेरिका, चीन और भारत के वैज्ञानिकों में प्रतियोगिता हुई। अमेरिका वाले ने एक रोबोट बनाया जो हू-बहू आदमी की तरह काम करता था। चीन वाले ने उसी रोबोट को लिया और उसे संशोधित करके उसमें मानवीय संवेदना जोड़ दिया। अब बारी थी भारत की, भारतीय वैज्ञानिक बड़ी अकड़ से उठता है और उसी रोबोट को अपने वर्क प्लेटफार्म पर रखता है। दर्शक आश्चर्य में हैं कि अब इसमें नया क्या जोड़ा जा सकता है। किन्तु शीघ्र ही 'मेड इन इंडिया' की मुहर लगाकर गलगोटिया उसे अपने स्टाल पर सजा कर रख देती है। ऐसा भद्द कराया नेहा सिंह ने! उधर भारत मंडपम में ऐसी अफरातफरी होती है कि सब कुछ अस्त-व्यस्त हो जाता है। स्टानफोर्ड प्रोफ़ेसर सूर्य गांगुली कहते हैं कि अमेरिका में उच्च स्तरीय कंप्यूटर वज्ञानिक अधिकतर भारतीय मूल के हैं। यहां गलगोटिया वाले हैं क्योंकि सारे देश अपनी प्रतिभा को देश की बहुमूल्य संपत्ति मानते हैं, उन पर बड़ी रकम खर्च करते हैं, वहीँ हमारी सरकार को बुद्धिजीवियों से स्वाभाविक चिढ़ है क्योंकि उनकी सपत्ति राष्ट्र नहीं वोट है। आज जो देश तकनीक में पीछे हैं वे फिसड्डी ही हैं। आरक्षण वह चूहा है जो भीतर ...

राष्ट्र स्वस्वामी महाराज का चूहा शेर बन गया

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सरिता समुन्द्र की ओर बहती है, बहते-बहते पहाड़ पर नहीं चढने लगती। चन्द्रमा शीतल होता है, अचानक आग नहीं फेकने लगता। शेर मांस खाता है दाल चावल कभी नहीं। राम ने, कृष्ण ने अवतार लिया धर्म-संत रक्षा हेतु न कि उनसे खेलने हेतु। सभी दैविक पुरुष या तंत्र न चहरे बदलते, न उद्देश्य - चहरे बदलने वाले राम शत्रु होते हैं। केशव की कूटनीति जटिल थी किन्तु राष्ट्रीयता के पीछे शकुनि का पोषण नहीं करती थी। रोहिंग्या रहेंगे, देशी भगेंगे। घर वाले लड़ेंगे, बाहरी पलेंगे। राष्ट्र स्वस्वामी महाराज का चूहा शेर बन गया है - महाराज जी का जीवन संकट में आ गया है। गड़बड़ वहीँ हो गया जब भगवान् मोहक का अवतार कुयुग में हो गया। भगवान् ने करिश्मा दिखया तो भक्तों ने आरती सजाया। भगवान् ने भरमाय तो उन्होंने दीपक फूंक-फूंक कर बुझाया। लोग चकित हैं कि भगवान् भाई असली हैं या नकली?

ब्राह्मणवाद मुर्दावाद

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    Student Federation of India  मध्य प्रदेश में वेचारा 75 वर्षीय एक पुजारी एक केवट की घृणा का भेट चढ़ गया । हर एक शिक्षा संसथान बंटवारा ब्रिगेड के अड्डे बन रहे हैं। यूजीसी 2026 यदि लागू हो जाय तो क्या होगा आप कल्पना नहीं कर सकते। देश भर के विद्यालयों में टुकड़े-टुकड़े गैंग नारे लगा रहे हैं : ब्राह्मणवाद मुर्दावाद, ब्राह्मणवाद हो वर्वाद, ठाकुरवाद मुर्दावाद, ठाकुरवाद हो वर्बाद, आरएसएस को चीर दो, हिन्दू राष्ट्र मुर्दावाद, मनुवाद से आज़ादी, ब्राह्मण बनिया ठाकुर चोर। ये लोग पढ़ें अथवा न पढ़ें नौकरी तो इन्हें मिलनी है। ये अलगाववाद करें या राष्ट्रद्रोह करें इन्हें सौ खून माफ़ है। लेकिन शिक्षा वंचित होकर हम सवर्ण किसी काम के नहीं होंगे। अब यदि हम लोग भी नारा लगाएं : आरक्षण से आज़ादी, यूजीसी है वर्बादी, खैरातवाद से आज़ादी, ढपलीगैंग मुर्दावाद, भीमवाद से आज़ादी तो इसका मतलब हुआ कि न हम इनके साथ रहना चाहते हैं और न ये हमारे साथ। वहीँ सरकार इस स्थिति को पैदा करके चुप है। इन्हें छोड़ दिया गया है कि जितना हो सके सवर्णों को उतनी गाली दो क्योंकि उनके मुँह साध दिए गए हैं और हाथ बाँध दिए गए हैं। यह अ...

पत्रकार लड़की रूचि तिवारी

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  जेएनयू वामपंथियों की मांद है। ये वे लोग हैं जिनका स्वतंत्रता के बाद से अब तक आरक्षण के विशेषाधिकार पर कब्जा रहा है। ये धनवान और सक्षम लोग हैं, मुस्लिम समाज से इनका गहरा संबंध है, इन्हें भारतीयता के प्रति स्वाभाविक घृणा है। अतः अब ये हमारे हिन्दू समाज के चतुर्थ वर्ग के प्रतिनिधि नहीं हैं। इन्हें विशेषाधिकार कानूनों से अलग करके सामान्य किया जाना चाहिए क्योंकि ये वही आतंक कर रहे हैं जो जम्मू कश्मीर में आतंकी धर्म पूछकर करते हैं। इन्होने पत्रकार लड़की रूचि तिवारी के साथ पुलिस बल की उपस्थिति में जाति पूछकर दुर्व्योहार से दुराचार की ओर ले जाने की कोशिश की। पुलिस भी असहाय दिखी। हे तथाकथित राष्ट्रवादी पार्टी ! जब यही करना था तो धारा 370 क्यों हटा दिया? कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति की तरह खोल दो आतंकियों के लिए बार्डर और सौंप दो यूनिवर्सिटीज को उन्हें ! बना दो पुरे देश को जाहिल-जकड, आतंकी, नक्सली ! आजकल सरकारी कार्यालयों में नीले अमीरों की संख्या अधिक हो गई है। दलित नाम पर साहब लोग सामान्य वर्ग के मातहत लोगों को भद्दी-भद्दी गाली देते है, उनका सरेआम अपमान करते हैं। इस पर भी हमारे कुछ ऐसे मित्...

ब्राह्मण जीवन

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शराब और चरस की लत इतनी हानिकारक नहीं होती जितनी मोबाईल की लत होती है क्योंकि यह दृष्टि हर लेती है, स्वास्थ्य छीन लेती है, तर्क शक्ति समाप्त कर देती है और अंत में अवसाद को जन्म देती है। गली-गली शराब बिक रही है, ड्रग तस्करी चरम पर है,बच्चे से बाप के हाथों में मोबाईल है। भावी मानव समाज का क्या होगा? योग से, तपस्या से, त्याग से और घोर अध्ययन से श्रेष्ठता प्राप्त होती है। वर्तमान पीढ़ी शारीरिक और मानसिक दोनों ही श्रम से बचना चाहती है। घर में भोजन बनाना बहुत कम लोगों को पसंद है। किताब का नाम भर ले लो लोगों के सर में असहनीय पीड़ा होने लगती है। इसी तरह मंदिर में प्रार्थना-आरती लगती है जैसे जेठ की दोपहरी में वे आग के पास खड़े हों। ब्राह्मण भाई मेरा इशारा आपकी ओर भी है। जहां चाहें वहां तथा जो चाहें वह भोजन कर लें इसके लिए आप नहीं बने हैं। मनमानी दिनचर्या आपका जीवन नहीं हैं। पुस्तकें आपका आभूषण हैं और आपकी जीवन यात्रा अध्ययन है। अतएव, अपना डीएनए शुद्ध रखना आपकी पहली आवश्यकता भी है। हनुमान जी, राम जी, सीता माता, कृष्ण कन्हैया, राधा मइया, भोले बाबा, गणपति बप्पा, मात भवानी इनमे किसी एक के चरणों में सम्...