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Dhanteras or Dhanatryodashi

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  Deepawali The first day is known as Dhanteras, which falls on the 13th lunar day of the dark fortnight in the month of Kartik. When the sea of milk was being churned by gods and devils, Mata Lakshmi (goddess of wealth) and her sibling god Dhanvantari (the divine physician with the pot containing elixir of immortality) emerged to provide the world with wealth and health. We celebrate Dhanatryodashi by worshiping Lakshami, Ganesh and Dhanavantri. On this day houses are whitewashed and cleaned in preparation for Diwali. In the evening the doorway is decorated with lights and rangoli. Footprints are drawn with rice flour all over the house, indicating the arrival of Goddess Lakshami and god Dhanvantri. The deities are worshiped with the set of offerings as prescribed by religious books and ghee lamps are lit around their thrones. A few of them are kept burning all through the night in honour of the god and goddess. As an offering to Yama, the god of death, diyas (lamps) are...

सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी-2026 पर सुनवाई

सु प्रीम कोर्ट में यूजीसी-2026 के नए इक्विटी नियमों पर सुनवाई की है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि नियमों का उद्देश्य हर एक छात्र के हितों की रक्षा होनी चाहिए सामाजिक विभाजन का नहीं। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि यूजीसी नियमों की समीक्षा के लिए एक विशेष समिति बनाने पर सरकार विचार कर रही है ताकि किसी भी वर्ग में असंतोष न रहे। यूजीसी-2026 ने उस बीजेपी का मुखौटा उतार दिया जिसकी वजह से हम इस पार्टी पर कुर्बान थे। 1990 में इन्होने कश्मीरी पंडितों के पलायन वाली सरकार का समर्थन किया हमने माफ़ कर दिया। उसी वर्ष इन्होने मंडल आयोग का समर्थन किया हमने इन्हें माफ़ कर दिया। 2018 में इन्होने एससी-एसटी एक्ट को एक तरफा कर दिया हमने माफ़ कर दिया। अब इन्होने सोच लिया कि सवर्णों के साथ चाहे जो करो, ये तो हमारी रखैल हैं और कराह में यूजीसी नामक तेल डालकर इनको तलना शुरू किया ताकि इनकी तड़प देख कर मजा मिले। यहाँ समझदार सवर्णों को होश आया कि बीजेपी हमारी मौसी नहीं है। वे पलट पड़े तब भी सरकार बहादुर उसे नखरा समझकर मजा लेते रहे। अंततः यूपी चुनाव के पहले उन्हें पता लगा है कि सवर्ण सच में उन्हें पटकनी देने व...

निरपराधी के अपराध

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  लघु कथा ,   यूजीसी - 2026   "देख बेटा, तेरी मां बीमार रहती है और मेरी नौकरी व्यापारी के दूकान की है," सत्यजीत ने अपने पुत्र मार्तण्ड से कहा। "मुश्किल से घर चलता है। तुझे मालूम है कि तुम्हें और तुम्हारी बहन को पढ़ाने में गाँव में थोड़ी सी खेती थी वह भी लगभग बिक चुकी है। मुझे बेहद ख़ुशी है कि तुमने एम्टेक का दूसरा सिमेस्टर भी अच्छे अंकों पास कर लिया है और जान्हवी नीट निकालने में सफल हो गयी है। बेटा, मन लगाकर पढ़ते रहना और गलत संगत से दूर रहना।" मार्तण्ड का इंजीनियर बनना और उसकी बहन जान्हवी का डाक्टर बनना स्वप्न था। वे परिस्थितियों के दबाव में तो थे किन्तु उनके इरादे पक्के थे। वे मेहनत को बोझ नहीं बल्कि ईश्वर का बरदान समझते थे। अब तक सब कुछ ठीक था। नववर्ष ढेर सारी खुशियां लेकर आया, मकर संक्रांति का त्यौहार का उल्लास शांत हुआ कि कैरियर विद्यार्थियों पर यूजीसी-2026 की आफत आ गिरी। मार्तण्ड के कालेज में सभी विद्यार्थी बड़े मेल-जोल से रहकर पढ़ रहे थे किन्तु अचानक कुछ एक लड़कों में खुराफात ने जन्म ले लिया। वे जानबूझकर मार्तण्ड के पास बैठते और बातें करते : "मनुवादी गुंडों को ...

जबरा मारय, रोवय न देय

एक देशी कहावत है "जबरा मारय, रोवय न देय" अर्थात बाहुबली मारता है साथ ही रोने भी नहीं देता। आजकल यूजीसी शब्द सार्वजनिक जगहों पर प्रतिबंधित है क्योंकि वह नेता लोगों के लिए गाली बन गया है। वकील हो चाहे पत्रकार, तुम्हारी ये मजाल कि माननीय डिप्टी सीएम महोदय को परेड मैदान प्रयागराज में आयोजित प्रबुद्ध महाकुंभ में यूजीसी कहोगे और बिना थप्पड़ की चटनी चाटे वहां चले जाओगे ? अच्छे दिन तब आते हैं जब अंग्रेजों की तरह जनता को जातियों में फंसाकर टैक्स के लिए उसके गले पर पैर रख दिया जाता है। पंडितवा मारा गया - बड़ा मजा आया ! ठकुरा को गाली दिया गया - बड़ा मजा आया ! ये कमीने, कुएं में पानी नहीं भरने देते थे, स्कूल जाने नहीं देते थे। अब मौका मिला है हम स्कूल, कालेज में कानूनी तौर पर इनकी मां-बहन करेंगे, इन्हें पढ़ने नहीं देगें - भले हमारे लिए भी काला अक्षर भैंस बराबर क्यों न हो जाए। एक उज्जल अंग्रेज आया था, वह पकिस्तान बना गया। राष्ट्रवादी सांवला अंग्रेज कम से कम एक "ब्रह्मलोक" तो बना ही देगा। ये सबरन बेचारे कहाँ जाएंगे ? इन्हें अमेरिका भी रखना नहीं चाह रहा है क्योंकि वह मोटासा हो गया है ...

न्याय के डिब्बे में अन्याय

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  एक थाने में प्रभारी साहब अपनी कुर्सी पर विराजमान हैं। उनके साथ वहां बैठे कुछ अन्य लोग ठहाके लगा रहे हैं। इतने में वहां दो व्यक्ति प्रकट होते हैं : काले पोशाक में एक वकील और एक सामान्य सा आदमी।   वकील एक लिखित आवेदन पत्र थानाध्यक्ष को देता है और अपने साथ वाले व्यक्ति को आगे करते हुए कहता है : "सर, इस आदमी को देखो, यह अत्यंत गरीब और असहाय दलित है। आज सबेरे अपनी पत्नी के साथ यह अपने खेत में फसल काट रहा था। पड़ोस के गाँव में एक दबंग रहता है जिसका नाम राम शंकर है। वह लाठी लेकर वहां आया, इस वेचारे को भद्दी भद्दी जातिगत गाली दी। इसकी पत्नी के कपडे खींच लिए और उसके साथ अभद्र व्योहार किया। किसी तरह दोनों जान बचाकर भागे किन्तु इसकी पत्नी रास्ते में वेहोश हो गई। वो तो कहिये इसके घर के दो तीन लोग वहां पहुंच गए, नहीं तो इसकी पत्नी मर ही गई होती। इसके बाद राम शंकर ट्रैक्टर ट्राली लेकर आया और इसकी कटी हुई फसल को लादकर ले गया। इनके छोटे-छोटे दो बच्चे हैं। रोज मजदूरी से परिवार पलता है।" थानाध्यक्ष बिना कुछ सोचे एफआईआर दर्ज करता हैं और केश की जांच के लिए फ़ाइल को ऊपर बढ़ा देता है।   कुछ दिन...

फैलती हुई विदेशी संस्कृति

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  जब बीजेपी को सत्ता में लाया गया था तब उससे उम्मीद की गई थी कि वह हिन्दू समाज को संगठित करेगी और किसी भी बाहरी , अतिवादी संस्कृति को फूलने-फ़ैलने से रोकेगी। किन्तु पिछले बारह वर्षों के दौरान चीजें इस उम्मीद के विपरीत हुईं। बाबा साहब अम्वेडकर के समय से दलितों में मनुवादियों से इतनी नफ़रत बढ़ी कि वे बड़ी संख्या में पकिस्तान और बंगलादेश चले गए। वहां उनके साथ जो अत्याचार हुआ उसकी कल्पना नहीं की जा सकती। हिन्दुस्तान में इन लोगों को उसका विरोध करना चाहिए था किन्तु हुआ क्या ? यहां के दलितों में बंगलादेशियों या पाकिस्तानियों से प्यार बढ़ गया और उनके लिए आंदोलन होने लगे। इनकी चले तो सवर्णों को भारत से बाहर कर दें और खुद अतिवादियों के हाथों शहीद हो जाएँ। सवर्ण अपनी सुरक्षा के साथ इनकी भी सुरक्षा की बात करता है फिर भी इन्हें सवर्णों से ही परेशानी है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिम इन्हें काट कर फेंक देते हैं फिर भी ये उन्हें प्यार करते हैं। सच में ये प्यार नहीं करते बल्कि जिससे भयभीत होते हैं उन्हें बाप्पा कहते हैं और जिनसे इन्हें भय नहीं होता उन्हें ये लोग गाली देते हैं। जब ये लोग सवर्णों को गाली दे र...

ईश्वर की उपस्थिति

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  इस दुनिया में यदि कोई चीज सबसे बड़ी और स्पष्ट दिखती है तो वह ईश्वर की उपस्थिति है। साफ़-साफ़ दिखता है कि संसार में एक बहुत बड़ा सिस्टम है जो आदिकाल से निरंतर काम कर रहा है और जो सबके अस्तित्व और जीवन का कारण है। सभी जानते हैं कि किसी ने कुछ नहीं बनाया फिर भी सब कुछ है। अंधों के पापा कहते हैं : 'भगवान है कहाँ?' अबे दिन-अंधेर ! यदि मैं कहूँ कि तुझमें जान नहीं है। तब तो नाराज हो जायेगा और कहेगा : "क्या मैं मर गया हूँ?" अब बता तेरे में जान कहाँ है ? तेरे कंप्यूटर में इंटरनेट चलता है - अब बता इंटरनेट लम्बा-पतला, काला-गोरा कैसा है ? खम्भे के तार में बिजली दौड़ रही है - बता उसमें बिजली पतली है कि मोटी है, बिल्ली जैसी है कि लोखड़ी जैसी ? अबे धकेलू, हर मंदिर में भगवान् है, तू खोपड़ी से भटांधर है इसलिए नहीं दिखता। यदि गंगा का पानी गंदा न किया गया होता तो वह स्वास्थ्य वर्धक है कि नहीं ? यदि कह दिया गया कि उसमें स्नान करने से पाप धुल जाते हैं तो कौन सा ब्राह्मणवाद हो गया ? देशाटन से मनोरोग दूर होते हैं कि नहीं ? यदि तीर्थयात्रा से पाप कटेंगे कह दिया गया तो कौन सा पाखंड हो गया ? पारिवा...