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निरपराधी के अपराध

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  लघु कथा ,   यूजीसी - 2026   "देख बेटा, तेरी मां बीमार रहती है और मेरी नौकरी व्यापारी के दूकान की है," सत्यजीत ने अपने पुत्र मार्तण्ड से कहा। "मुश्किल से घर चलता है। तुझे मालूम है कि तुम्हें और तुम्हारी बहन को पढ़ाने में गाँव में थोड़ी सी खेती थी वह भी लगभग बिक चुकी है। मुझे बेहद ख़ुशी है कि तुमने एम्टेक का दूसरा सिमेस्टर भी अच्छे अंकों पास कर लिया है और जान्हवी नीट निकालने में सफल हो गयी है। बेटा, मन लगाकर पढ़ते रहना और गलत संगत से दूर रहना।" मार्तण्ड का इंजीनियर बनना और उसकी बहन जान्हवी का डाक्टर बनना स्वप्न था। वे परिस्थितियों के दबाव में तो थे किन्तु उनके इरादे पक्के थे। वे मेहनत को बोझ नहीं बल्कि ईश्वर का बरदान समझते थे। अब तक सब कुछ ठीक था। नववर्ष ढेर सारी खुशियां लेकर आया, मकर संक्रांति का त्यौहार का उल्लास शांत हुआ कि कैरियर विद्यार्थियों पर यूजीसी-2026 की आफत आ गिरी। मार्तण्ड के कालेज में सभी विद्यार्थी बड़े मेल-जोल से रहकर पढ़ रहे थे किन्तु अचानक कुछ एक लड़कों में खुराफात ने जन्म ले लिया। वे जानबूझकर मार्तण्ड के पास बैठते और बातें करते : "मनुवादी गुंडों को ...

जबरा मारय, रोवय न देय

एक देशी कहावत है "जबरा मारय, रोवय न देय" अर्थात बाहुबली मारता है साथ ही रोने भी नहीं देता। आजकल यूजीसी शब्द सार्वजनिक जगहों पर प्रतिबंधित है क्योंकि वह नेता लोगों के लिए गाली बन गया है। वकील हो चाहे पत्रकार, तुम्हारी ये मजाल कि माननीय डिप्टी सीएम महोदय को परेड मैदान प्रयागराज में आयोजित प्रबुद्ध महाकुंभ में यूजीसी कहोगे और बिना थप्पड़ की चटनी चाटे वहां चले जाओगे ? अच्छे दिन तब आते हैं जब अंग्रेजों की तरह जनता को जातियों में फंसाकर टैक्स के लिए उसके गले पर पैर रख दिया जाता है। पंडितवा मारा गया - बड़ा मजा आया ! ठकुरा को गाली दिया गया - बड़ा मजा आया ! ये कमीने, कुएं में पानी नहीं भरने देते थे, स्कूल जाने नहीं देते थे। अब मौका मिला है हम स्कूल, कालेज में कानूनी तौर पर इनकी मां-बहन करेंगे, इन्हें पढ़ने नहीं देगें - भले हमारे लिए भी काला अक्षर भैंस बराबर क्यों न हो जाए। एक उज्जल अंग्रेज आया था, वह पकिस्तान बना गया। राष्ट्रवादी सांवला अंग्रेज कम से कम एक "ब्रह्मलोक" तो बना ही देगा। ये सबरन बेचारे कहाँ जाएंगे ? इन्हें अमेरिका भी रखना नहीं चाह रहा है क्योंकि वह मोटासा हो गया है ...

न्याय के डिब्बे में अन्याय

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  एक थाने में प्रभारी साहब अपनी कुर्सी पर विराजमान हैं। उनके साथ वहां बैठे कुछ अन्य लोग ठहाके लगा रहे हैं। इतने में वहां दो व्यक्ति प्रकट होते हैं : काले पोशाक में एक वकील और एक सामान्य सा आदमी।   वकील एक लिखित आवेदन पत्र थानाध्यक्ष को देता है और अपने साथ वाले व्यक्ति को आगे करते हुए कहता है : "सर, इस आदमी को देखो, यह अत्यंत गरीब और असहाय दलित है। आज सबेरे अपनी पत्नी के साथ यह अपने खेत में फसल काट रहा था। पड़ोस के गाँव में एक दबंग रहता है जिसका नाम राम शंकर है। वह लाठी लेकर वहां आया, इस वेचारे को भद्दी भद्दी जातिगत गाली दी। इसकी पत्नी के कपडे खींच लिए और उसके साथ अभद्र व्योहार किया। किसी तरह दोनों जान बचाकर भागे किन्तु इसकी पत्नी रास्ते में वेहोश हो गई। वो तो कहिये इसके घर के दो तीन लोग वहां पहुंच गए, नहीं तो इसकी पत्नी मर ही गई होती। इसके बाद राम शंकर ट्रैक्टर ट्राली लेकर आया और इसकी कटी हुई फसल को लादकर ले गया। इनके छोटे-छोटे दो बच्चे हैं। रोज मजदूरी से परिवार पलता है।" थानाध्यक्ष बिना कुछ सोचे एफआईआर दर्ज करता हैं और केश की जांच के लिए फ़ाइल को ऊपर बढ़ा देता है।   कुछ दिन...

फैलती हुई विदेशी संस्कृति

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  जब बीजेपी को सत्ता में लाया गया था तब उससे उम्मीद की गई थी कि वह हिन्दू समाज को संगठित करेगी और किसी भी बाहरी , अतिवादी संस्कृति को फूलने-फ़ैलने से रोकेगी। किन्तु पिछले बारह वर्षों के दौरान चीजें इस उम्मीद के विपरीत हुईं। बाबा साहब अम्वेडकर के समय से दलितों में मनुवादियों से इतनी नफ़रत बढ़ी कि वे बड़ी संख्या में पकिस्तान और बंगलादेश चले गए। वहां उनके साथ जो अत्याचार हुआ उसकी कल्पना नहीं की जा सकती। हिन्दुस्तान में इन लोगों को उसका विरोध करना चाहिए था किन्तु हुआ क्या ? यहां के दलितों में बंगलादेशियों या पाकिस्तानियों से प्यार बढ़ गया और उनके लिए आंदोलन होने लगे। इनकी चले तो सवर्णों को भारत से बाहर कर दें और खुद अतिवादियों के हाथों शहीद हो जाएँ। सवर्ण अपनी सुरक्षा के साथ इनकी भी सुरक्षा की बात करता है फिर भी इन्हें सवर्णों से ही परेशानी है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिम इन्हें काट कर फेंक देते हैं फिर भी ये उन्हें प्यार करते हैं। सच में ये प्यार नहीं करते बल्कि जिससे भयभीत होते हैं उन्हें बाप्पा कहते हैं और जिनसे इन्हें भय नहीं होता उन्हें ये लोग गाली देते हैं। जब ये लोग सवर्णों को गाली दे र...

ईश्वर की उपस्थिति

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  इस दुनिया में यदि कोई चीज सबसे बड़ी और स्पष्ट दिखती है तो वह ईश्वर की उपस्थिति है। साफ़-साफ़ दिखता है कि संसार में एक बहुत बड़ा सिस्टम है जो आदिकाल से निरंतर काम कर रहा है और जो सबके अस्तित्व और जीवन का कारण है। सभी जानते हैं कि किसी ने कुछ नहीं बनाया फिर भी सब कुछ है। अंधों के पापा कहते हैं : 'भगवान है कहाँ?' अबे दिन-अंधेर ! यदि मैं कहूँ कि तुझमें जान नहीं है। तब तो नाराज हो जायेगा और कहेगा : "क्या मैं मर गया हूँ?" अब बता तेरे में जान कहाँ है ? तेरे कंप्यूटर में इंटरनेट चलता है - अब बता इंटरनेट लम्बा-पतला, काला-गोरा कैसा है ? खम्भे के तार में बिजली दौड़ रही है - बता उसमें बिजली पतली है कि मोटी है, बिल्ली जैसी है कि लोखड़ी जैसी ? अबे धकेलू, हर मंदिर में भगवान् है, तू खोपड़ी से भटांधर है इसलिए नहीं दिखता। यदि गंगा का पानी गंदा न किया गया होता तो वह स्वास्थ्य वर्धक है कि नहीं ? यदि कह दिया गया कि उसमें स्नान करने से पाप धुल जाते हैं तो कौन सा ब्राह्मणवाद हो गया ? देशाटन से मनोरोग दूर होते हैं कि नहीं ? यदि तीर्थयात्रा से पाप कटेंगे कह दिया गया तो कौन सा पाखंड हो गया ? पारिवा...

सामाजिक एकता के भाषण

  जब समाज तोड़ने के कानून बन रहे होते हैं तब उसके पहले सामाजिक एकता के भाषण होने लगते हैं। उदहारण के तौर पर "एक रहोगे तो सेफ रहोगे" या "बंटोगे तो कटोगे" भाषण के बाद यूजीसी आता है और जाति-जाति में दुश्मनी घोल कर रख देता है। भाषण आता है "सबका साथ, सबका विकास" किन्तु सवर्णों के खून पसीने की कमाई को उड़ाता है नेता और खाते हैं देश के बोझ खैराती। भाषण होता है सबके साथ सामान न्याय की और एससी/एसटी एक्ट से अन्याय का बांध खोल दिया जाता है। कार सेवकों पर गोली चलवाने वाले मुख्य मंन्त्री के बारे में तीखी बयानबाजी की जाती है किन्तु उनका सम्मान पदम् विभूषण से होता है। सारे विरोध के वावजूद अंकिता भंडारी हत्याकांड के आरोपी दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राजपाल नियुक्त कर दिया जाता है। भाषण होते हैं हिंदूवाद के और नीतियां बनती हैं अल्पसंख्यक कल्याण की। साथ ही जो वर्ग हिंदुत्व का आधार है उसे खलनायक बना दिया जाता है। औरंगजेब ने हिंदुत्व को समाप्त करने के लिए हार्डवेयर पर हमला किया था यहाँ तो हिन्दू सॉफ्टवेयर ही डिलीट करने की कोशिश चल रही है। मोहम्मद गजनवी ने मंदिरों को लुटेरो...

एक पति/पत्नी व्रती

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करवा चौथ पति-पत्नी के मध्य निष्ठा और प्रेम स्थापित करने का व्रत है। एक पति/पत्नी व्रती का परिवार प्रारम्भ से अंत तक सुखी और स्वस्थ रहता है। कुछ महिलाओं का कहना है कि हमें 40 वर्ष की उम्र में दूसरी शादी कर लेनी है तो करवा चौथ व्रत का क्या मतलब, पति की लम्बी उम्र हो या कल मर जाय इससे हमें क्या लेना-देना है। रामायण में सूर्पणखा इन्हीं महिलाओं की प्रतीक है। उसकी नाक कट गई ! ऐसी महिलाओं के दांत कम उम्र में गिर जाते हैं, बाल पक जाता है और शकल चुड़ैल सी हो जाती है। इसके अतिरिक्त, वे वृद्धावस्था में जो घोर नर्क भोगती हैं वह अवर्णीय है। कुछ अन्य महिलायें करवा चौथ को पुरुषों की गुलामी का प्रतीक मानती हैं। कुछ कहती हैं कि यह ब्राह्मणों के द्वारा बनाया हुआ ढकोसला है, पाखंड है - इसके पीछे कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। त्योहारों में इन्हें वैज्ञानिक प्रमाण चाहिए, सर के दर्द के लिए पैरों की मालिश चाहिए। पूर्वजों की बनाई हुई मान्यताओं और परम्पराओं को तुम जैसे घनचक्कर समझ सकते तो यह धरती स्वर्ग होती। हमारे सारे त्योहारों का आधार मनोविज्ञान है न कि भौतिक विज्ञान। पश्चिमी सभ्यता ने विज्ञान के चक्कर में कभ...