सत्ता सुख के लिए राजनीति भवानी को बलि



मैं स्पष्ट कर रहा हूँ कि मैं साहित्यकार हूँ किसी पार्टी का नहीं हूँ - मैं राष्ट्र का हूँ, सनातन का हूँ। जब कोई पार्टी राष्ट्र और सनातन के उत्थान की नीति पर काम करती है, मैं उसका फैन बन जाता हूँ। किन्तु विरोधी नीति पर मैं चुप भी नहीं रह सकता हूँ। आपको सत्ता सुख मिल सके इसलिए राजनीति भवानी को बलि चाहिए। एकतरफा महिला क़ानून की वजह से बहुत सी महिलाएं इसके दुरपयोग का व्यापार करती हैं। जो पुरुष इनकी चपेट में आ गया है उसकी आत्मा से पूछो। इस कानून का शिकार सम्पूर्ण पुरुष वर्ग है। एकतरफा एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम अप्रत्यक्ष बदला लेने का घातक हथियार बना हुआ है। जिसे इसकी हवा लग गयी हो उसकी वर्वाद जिंदगी को देखो। इसका शिकार सामान्य और ओबीसी है। अब एक तीसरा कानून आने वाला है जिसका नाम यूजीसी 2026 है। यह भी एकतरफा सामान्य वर्ग के व्यवसाय और उनके बच्चों के भविष्य को विषाक्त तीर की तरह टारगेट करता है। कांग्रेस या क्षेत्रीय पार्टिया मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर सनातनियों को मुंह पर गाली देते हैं। किन्तु वर्तमान बीजेपी उन्हें वह टेबलेट खिलाती है जो जीभ पर अत्यंत स्वादिष्ट होती है किन्तु आंत में जहर बन जाती है। हिन्दू समाज में घृणा के छिड़काव से तमिलनाडु, केरल से लगभग पूरी तरह और बिहार से आंशिक रूप से सवर्ण पलायन कर गया है। यदि यूजीसी लागू हो गया तो गृह युद्ध जैसा माहौल बनेगा और बड़ी संख्या में हिन्दू सामान्य वर्ग पलायन करके किसी प्रान्त में सेटिल होगा। दूसरी तरफ यदि बीजेपी हिन्दू समाज में विघटन करके बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी का चुनाव जितना चाहती हो तो छब्बे बनने के चक्कर में चौबे भाई कम से कम दुबे बने रहने की चिंता करें क्योंकि जनता एक बार भड़क गयी तो जल्दी फिर से विश्वास नहीं करती साथ ही एक नया धड़ा भी चुनौती के लिए तैयार हो सकता है।

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