ब्राह्मणवाद मुर्दावाद


    Student Federation of India 

मध्य प्रदेश में वेचारा 75 वर्षीय एक पुजारी एक केवट की घृणा का भेट चढ़ गया । हर एक शिक्षा संसथान बंटवारा ब्रिगेड के अड्डे बन रहे हैं। यूजीसी 2026 यदि लागू हो जाय तो क्या होगा आप कल्पना नहीं कर सकते। देश भर के विद्यालयों में टुकड़े-टुकड़े गैंग नारे लगा रहे हैं : ब्राह्मणवाद मुर्दावाद, ब्राह्मणवाद हो वर्वाद, ठाकुरवाद मुर्दावाद, ठाकुरवाद हो वर्बाद, आरएसएस को चीर दो, हिन्दू राष्ट्र मुर्दावाद, मनुवाद से आज़ादी, ब्राह्मण बनिया ठाकुर चोर। ये लोग पढ़ें अथवा न पढ़ें नौकरी तो इन्हें मिलनी है। ये अलगाववाद करें या राष्ट्रद्रोह करें इन्हें सौ खून माफ़ है। लेकिन शिक्षा वंचित होकर हम सवर्ण किसी काम के नहीं होंगे। अब यदि हम लोग भी नारा लगाएं : आरक्षण से आज़ादी, यूजीसी है वर्बादी, खैरातवाद से आज़ादी, ढपलीगैंग मुर्दावाद, भीमवाद से आज़ादी तो इसका मतलब हुआ कि न हम इनके साथ रहना चाहते हैं और न ये हमारे साथ। वहीँ सरकार इस स्थिति को पैदा करके चुप है। इन्हें छोड़ दिया गया है कि जितना हो सके सवर्णों को उतनी गाली दो क्योंकि उनके मुँह साध दिए गए हैं और हाथ बाँध दिए गए हैं। यह अब नहीं चलेगा, इस पर राजनीति वर्दास्त नहीं है। हमारा वैश्य व्यापार करे, हम उद्योग करें और हमारे जीएसटी से ये कुर्सी तोड़ें और हमें ही गाली दें यह नहीं चलेगा। हमारा भारतवर्ष अलग कर दो और इनके हिन्दुस्तान में इन्हें सौ प्रतिशत आरक्षण दे दो। पूर्व में भी हमारी बस्तियां इनके साथ नहीं हुआ करती थीं। गरीब उत्थान राष्ट्र निर्माण है किन्तु जाति उत्थान राष्ट्र विघटन।


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