यूजीसी अधिनियम



यूजीसी अधिनियम कानून की शक्ल में एक घातक हथियार है जिसे सरकार ने अपराध रोकने के लिए नहीं बल्कि अपराध करने के लिए बनाया है। इस हथियार से आरक्षित युवा बेरोकटोक अनारिक्षत छात्राओं को अनैतिक रूप से ब्लैकमेल कर सकता है और छात्रों के सीढ़ी का सांप बन सकता है। ऐसे अन्याय को अनारक्षित युवा चुपचाप सहन तो नहीं करेंगे - प्रतिशोध स्वाभाविक रूप से उभर आने की संभावना रहेगी। यदि राय लिया जाय तो आरक्षित वर्ग भी बेवजह पचड़े में पड़ना नहीं चाहेगा। माँ-बाप खुद मर सकते हैं किन्तु अपने बच्चों को मरते नहीं देख सकते। मोदी जी के प्रति तात्कालिक श्रद्धा एवं विश्वास के कारण लोगों ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम को स्वीकार कर लिया था किन्तु बच्चों की कीमत पर इस कानून को सामान्य वर्ग स्वीकार नहीं करेगा। देश के प्रत्येक क्षेत्र में कार्यरत सामान्य वर्ग के मां-बाप की निष्ठा हिल सकती है तो सोचो परिणाम क्या हो सकता है। यदि वैश्य न होगा तो देश का व्यापार उनसे न हो सकेगा, यदि ब्राह्मण न होगा तो भारतीय संस्कृति की रक्षा और कोई नहीं कर सकता और यदि क्षत्रिय ह्रदय न होगा तो आसमान से छलांग लगाने वाले न होंगे। मैं यह नहीं कहता कि चौथा वर्ग हमारे लिए कम महत्वपूर्ण है। चार पहिये का हमारा समाज एक पहिये पर जिन्दा नहीं रह सकता और न ही सरकार बची रह सकती है।

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