अयोग्य शिक्षक ही देश को पूरी तरह समाप्त कर सकता है
किसी देश को युद्ध से पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता है। यदि उसे समूल नष्ट कर देना है तो एक मात्र और सबसे सरल तरीका है कि उसकी शिक्षा भ्रष्ट कर दो। शिक्षा का स्तर गिरने से बड़ी संख्या में लोगों को डाक्टर ही मार देंगे, इंजिनियर पुल-बिल्डिंग बनाएंगे कुछ उसमें दबकर मर जाएंगे। अर्थशास्त्री देश को भूखों मार देंगे। नौकरशाह गृहयुद्ध पैदा कर देंगे और एक साथ ये सारी तबाही लाने में अयोग्य शिक्षकों का समूह अकेले ही काफी होगा। एक गुजराती ने हिन्दू राष्ट्र बनने नहीं दिया था। आज दो गुजराती हैं, पूरी वर्वादी के सरल तरीके को वे ही खोज सके हैं। खैर, भोजन, कपड़ा और मकान के वगैर जीवन नहीं चल सकता। उसी तरह संघर्षों से बचकर जीवित नहीं रहा जा सकता। देश या हिन्दू समाज द्रोहियों से संघर्ष स्वतंत्रता संग्राम की तरह अनिवार्य हो गया है। साथ में अब हमारा यह भी कर्तव्य है कि अपने छोटे भाइयों को द्रोहियों के झांसे से बचाएं। उन्हें समझाएं कि देश से अधिक सत्ता के लोभी हमारे खिलाफ मुस्लिमों को भी ललकार सकते हैं। उन्हें समझाएं कि वे हमसे ईर्ष्या न करें क्योंकि हमसे संचालित मंदिरों की आय में उनका भी हिस्सा है, हमारे व्यापार में उनकी भी जीविका है, हमारे यद्ध कौशल में उनकी भी सुरक्षा है, हम हैं जो उन्हें भी अच्छी शिक्षा देते हैं तथा केवल हम देश विदेश में उन पर हुए अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाते हैं और संघर्ष के लिए तत्पर होते हैं। हम उन्हें समझाएं कि हमारे आपस की लड़ाई घुसपैठियों का रास्ता खोलती है।
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