यूजीसी
मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था सुधारी है, उद्योगों का विकास किया है, हिन्दू मंदिरों का पुनर्निर्माण और यात्रा को आरामदायक बनाया है। राम मंदिर निर्माण, धरा 370 को हटाने जैसे असंभव को संभव किया है। स्वच्छ भारत अभियान में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। लेकिन मोदी सरकार ने हिन्दू समाज को तीन बराबर टुकड़ों में चीर डाला है। पहला भाग - महिला सशक्तिकरण के नाम पर पति-पत्नी को बांटने के अतिरिक्त सम्भ्रान्त परिवारों की लड़कियों को सड़क पर बेलगाम नंगा कर दिया है। उनका यह क़ानून मुस्लिमों पर नहीं चल सका। दूसरा भाग - एससी/एसटी एक्ट को एकतरफा बनाकर तथा आरक्षण कानून में उचित सुधार से मुंह मोड़कर सामान्य और शेडूल के बीच कभी न भरने वाली गहरी खाई खोद दी है। तीसरा भाग - अब यूजीसी एक्ट से बच्चों को बच्चों से अलग कर दिया है। ध्यान देने की बात यह है कि वोट तुष्टिकरण में सामान्य वर्ग बल्कि सम्पूर्ण हिन्दूसमाज मिटेगा या बचेगा इसका ध्यान बिलकुल नहीं दिया गया है। हर कानून में पहले से ही मान लिया गया है कि सामान्य वर्ग अपराधी स्वभाव का है, उसे अल्पसंख्यक से जोड़ दिया गया है। इन कानूनों से हिन्दू समाज में एकता कभी नहीं हो सकती और इसके आभाव में यह देश शीघ्र ही गुलाम बन जाएगा। गुलामी में अधिकारों के ठेकेदार पुनः अपनी औकात प्राप्त कर लेंगे।

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