सवर्ण

यूजीसी कानून का विरोध करने वाला सवर्ण आखिर जाएगा कहाँ जब देश की हर पार्टी इस कानून की समर्थक है? इस प्रश्न का उत्तर है किसी के पास ? मेरे पास है तो सुनों। पेड़ों में जब बसन्त आना होता है तो पतझड़ आता है। बंटवारे के समय पकिस्तान से पलायन किये हुए सिंधी आज सभी अरबपति हैं और हिन्दुस्तानी मूल के लोगों को नौकर रखे हुए हैं। बिहार और तमिनाडु से बहुत बड़ी संख्या में सामान्य वर्ग पलायन कर चुका है। सामान्य वर्ग पर जब अत्याचार बढ़ेगा तो प्राकृतिक रूप से जहां वे अधिक होंगे सुरक्षा के कारण वहीँ इकट्ठे होने लगेंगे और जब बड़ी संख्या में एकत्रित हो जाएंगे तो उन्हें स्वयं का तंत्र विकिसित करना सरल हो जाएगा। सवर्ण के समाज में जाति हटा दी जाएगी - वहां न कोई ब्राह्मण होगा न वैश्य न क्षत्री सभी सनातनी होंगे। भूसा नहीं सिर्फ गेहूं होगा। भेड़ों के झुण्ड नहीं शेरों के परिवार होंगे। सबको अपने राष्ट्र से प्यार होगा। सम्मुख अत्याचारी, ईर्ष्यालु समाज के सापेक्ष आपस में प्रेम होगा, संघर्ष करने की प्रेरणा होगी। वहां उसके अपने शिक्षा संस्थान होंगे, अपनी सरकार होगी। उनकी आबादी बड़ी तेजी से व्यापार करेगी और पैसा होने से उत्तम हथियार बनाएगी। एक समय दुनिया में यहूदियों का यही हाल था। वे ईसाई और मुसलामानों से अधिक बुद्धिमान और कुशल थे जिसकी वजह से ईर्ष्या के शिकार हुआ करते थे। हिटलर ने पचास लाख यहूदियों का नरसंहार कर दिया था। वे इतने कट्टर थे कि वे किसी कीमत पर अपनी नस्ल को दूषित होने से बचाये रखे। जर्मनीं में एक आइंस्टीन पैदा होता है। वह अमेरिका में शरण लेता है और जर्मनी, जापान के विनाश का कारण बन जाता है। आज अमेरिका यहूदियों के पैसे से चलता है। एक रेगिस्तानी टुकड़ा पाने के बाद उन्होंने साबित कर दिया है कि थोड़े हैं फिरभी कौन हैं।

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