एआई

 


जिस तरह कृषि उपकरण ने देशी पशुओं को आवारा कर दिया है, सामान्य जनमानस को उसी तरह एआई आवारा करने वाला है। सकल घरेलू उत्पाद का 50 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा सेवा क्षेत्र है, एआई मुख्य रूप से उसे ही टारगेट करने वाला है। पारम्परिक नौकरियाँ तो समाप्त ही होंगी, आईटी सेक्टर की नौकरियों को भी यह खा जाएगा। खैर ये तो दूर की बात हुई, नौकरियों के नाम पर सरकार की भी नीयत अच्छी नहीं रही है। एक आधार कार्ड में संशोधन आज के दिन तारे तोड़ने जैसा कार्य है और एक नया आधार कार्ड बनवाना तो इस पृथ्वी का सबसे कठिन कार्य हो गया है। यदि आधार एक आवश्यक कार्ड है तो सरकार आधार विभाग की सरकारी शाखाएं देश भर में क्यों नहीं खोलती जिसमें लाखों युवकों को रोजगार तो मिलेगा ही साथ ही जनता को भी सुविधा होगी। आज सरकार को जानने की जरूरत है कि राज तंत्र कोई बहुत मजबूत चीज नहीं है। यदि बड़ी संख्या में युवक वेरोजगार हो गए तो बांटो और राज करो से काम नहीं चलेगा - सारा तंत्र ध्वस्त हो जाएगा। पकिस्तान का राजतंत्र विगड़ चुका है। श्रीलंका और नेपाल में तो कोई तंत्र ही नहीं है। भारत सरकार को सावधान होना चाहिए। मॉस में युवक वेरोजगार हों उसके पहले नौकरियों के अवसर बढ़ाने और घरेलू उद्द्योगों को विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।

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