शेरों का परिवार चाहिए



मैंने यूजीसी 2026 को पढ़ा तो लगा कि अच्छे से बने हुए कानून को किसी ने जानबूझ कर जगह-जगह खुरच दिया है। जो भी हो, यहां कानून की काली कोठरी है जिसका एससी/एसटी अधिनियम नाम का दरवाजा आटोमेटिक है क्योंकि इसमें कोई किसी को धकेल कर अंदर तो कर सकता है किन्तु अंदर का व्यक्ति फिर बाहर नहीं आ सकता है। बड़ी संख्या में मेडिकल कालेज के नाम पर यमभवन भी बनाये जा रहे हैं, गरीबों के इलाज हेतु डाक्टर के नाम पर -40 वाले यमदूत पढ़ाये जा रहे हैं। सरकार भी क्या करे जब जलकुम्भी की तरह गरीब फ़ैल रहे हैं। बसंत महीनों में पिल्ले खूब हो जाते हैं। बचपन में हम लोग दो पिल्लों की गर्दन पकड़कर उनके मुँह आपस में रगड़ देते थे। वे गुर्राने और फिर पटकी-पटका करने लगते थे। सरकार भी यूजीसी से पिल्ले लड़ाकर कर मौज ले रही है, बोल नहीं रही है, मन ही मन हंस रही है - उद्देश्य जो भी हो। मुझे लगता है बीजेपी का आज कोई विकल्प नहीं है, स्वतंत्र है, मदमस्त है, सहत्रबाहु है जिसमें परशुराम के पिता को मारकर कामधेनु के अपहरण की महत्वाकांक्षा उत्पन्न हो गई है। अब आप समझ ही गए होंगे कि बालक परशुराम के प्रकट होने का समय आ गया हैं। कोई एक चोंटियाधारी नेता पैदा हो जायेगा, चारों सवर्ण को संगठित करेगा, देश के एक हिस्से में उन्हें इकट्ठे कर लेगा, उनकी जाति पहचान मिटाकर एक में घोल देगा। इस तरह वह एक अजेय राष्ट्र का निर्माण करेगा। भारत में फिर समझ लो त्रिभुवन स्वामी राम का ही राज होगा!

राम चाहिए, कृष्ण चाहिए, शेरों का परिवार चाहिए।
भारी भीड़ हमें भेड़ों की नहीं चाहिए, नहीं चाहिए !!!

सभी राम प्रेमियों को प्यार और मंगल कामनाएं !


Comments

Popular posts from this blog

100th episode of PM Modi’s Man-ki-Baat

आचार्य प्रवर महामंडलेश्वर युगपुरुष श्री स्वामी परमानन्द गिरी जी महाराज द्वारा प्रवचन - प्रस्तुति रमेश चन्द्र तिवारी

A Discovery of Society