एआई दिल्ली सम्मलेन

 


एआई दिल्ली सम्मलेन में अमेरिका, चीन और भारत के वैज्ञानिकों में प्रतियोगिता हुई। अमेरिका वाले ने एक रोबोट बनाया जो हू-बहू आदमी की तरह काम करता था। चीन वाले ने उसी रोबोट को लिया और उसे संशोधित करके उसमें मानवीय संवेदना जोड़ दिया। अब बारी थी भारत की, भारतीय वैज्ञानिक बड़ी अकड़ से उठता है और उसी रोबोट को अपने वर्क प्लेटफार्म पर रखता है। दर्शक आश्चर्य में हैं कि अब इसमें नया क्या जोड़ा जा सकता है। किन्तु शीघ्र ही 'मेड इन इंडिया' की मुहर लगाकर गलगोटिया उसे अपने स्टाल पर सजा कर रख देती है। ऐसा भद्द कराया नेहा सिंह ने! उधर भारत मंडपम में ऐसी अफरातफरी होती है कि सब कुछ अस्त-व्यस्त हो जाता है। स्टानफोर्ड प्रोफ़ेसर सूर्य गांगुली कहते हैं कि अमेरिका में उच्च स्तरीय कंप्यूटर वज्ञानिक अधिकतर भारतीय मूल के हैं। यहां गलगोटिया वाले हैं क्योंकि सारे देश अपनी प्रतिभा को देश की बहुमूल्य संपत्ति मानते हैं, उन पर बड़ी रकम खर्च करते हैं, वहीँ हमारी सरकार को बुद्धिजीवियों से स्वाभाविक चिढ़ है क्योंकि उनकी सपत्ति राष्ट्र नहीं वोट है। आज जो देश तकनीक में पीछे हैं वे फिसड्डी ही हैं। आरक्षण वह चूहा है जो भीतर ही भीतर हरी-हरी फसल को काट कर खोखला किये दे रहा है।

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