ब्राह्मण जीवन
शराब और चरस की लत इतनी हानिकारक नहीं होती जितनी मोबाईल की लत होती है क्योंकि यह दृष्टि हर लेती है, स्वास्थ्य छीन लेती है, तर्क शक्ति समाप्त कर देती है और अंत में अवसाद को जन्म देती है। गली-गली शराब बिक रही है, ड्रग तस्करी चरम पर है,बच्चे से बाप के हाथों में मोबाईल है। भावी मानव समाज का क्या होगा? योग से, तपस्या से, त्याग से और घोर अध्ययन से श्रेष्ठता प्राप्त होती है। वर्तमान पीढ़ी शारीरिक और मानसिक दोनों ही श्रम से बचना चाहती है। घर में भोजन बनाना बहुत कम लोगों को पसंद है। किताब का नाम भर ले लो लोगों के सर में असहनीय पीड़ा होने लगती है। इसी तरह मंदिर में प्रार्थना-आरती लगती है जैसे जेठ की दोपहरी में वे आग के पास खड़े हों। ब्राह्मण भाई मेरा इशारा आपकी ओर भी है। जहां चाहें वहां तथा जो चाहें वह भोजन कर लें इसके लिए आप नहीं बने हैं। मनमानी दिनचर्या आपका जीवन नहीं हैं। पुस्तकें आपका आभूषण हैं और आपकी जीवन यात्रा अध्ययन है। अतएव, अपना डीएनए शुद्ध रखना आपकी पहली आवश्यकता भी है। हनुमान जी, राम जी, सीता माता, कृष्ण कन्हैया, राधा मइया, भोले बाबा, गणपति बप्पा, मात भवानी इनमे किसी एक के चरणों में सम्पूर्ण समर्पण आपका उद्देश्य है। इसके विमुख आपके लिए यदि कोई संसार है तो उसमें अपमान, तिरस्कार और बिपन्नता है, ध्यान दो।
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