Posts

Love and Longing for Lord

Image
The love and desire that a young man has for his beloved, The true and strong love that a miser has for money: O my Lord!  Fill my heart with the same love and longing for you! There is no one so poor and fragile as I am and There is no body as selfless, kind and generous as you are. It is just your way to help the poor and the powerless. O Raghuvansh Mani, Alleviate the discomfort, pain and misery that I suffer!                                                                      - Ramesh Tiwari

पसीने की बूँद

आज तो ऐसी उमस है कि पंखा की तो बात न करिए कूलर भी फेल | ऐसे में मैने एक महिला को आज एक चकरोड के किनारे घास खोदते देखा | जब ढेर लग गया तब उसने उसे झाड़-झाड़ कर बोरे में रखना शुरू किया | मैं वहाँ खड़ा नहीं हो पा रहा था लेकिन उसके शरीर पर पसीने की एक बूँद भी न थी | मैने पूछा, "इसे अपने जानवर को कैसे खिलाओगी ?" "मैं इसे घर ले जाकर डंडे से पीटूँगी," उसने कहा | "फिर जब यह पूरी तरह सॉफ हो जाएगी तब इसे ऐसे ही भैंस को खिला दूँगी | थोड़ा सा भूसा और आंटा भी उसे खाने को दूँगी |" "सुबह तुम्हारी भैंस कितना दूध देगी ?" मैने उससे फिर पूछा | "बाबूजी, दो ढाई सौ सुबह मिल जाते हैं और सौ रुपये शाम को |" उसकी मेहनत और उसकी कमाई ने मुझे सोचने के लिए मजबूर कर दिया | फिर मुझे याद आया कि किसी आफ़िस में सवा लाख महीने पाने वाला अधिकारी किसी नागरिक को कैसे तीन दिन दौड़ता है सिर्फ़ तीन लाइन कुछ लिख देने के लिए क्योंकि पहले दिन वह किसी से बातचीत करने में व्यस्त था और दूसरे दिन वह किसी और का कुछ काम कर रहा था | वाह रे हिन्दुस्तान ! इसीलिए तो सबको सरकारी नौकरी चाहिए |...

गृहशिक्षा

जब हमारा बच्चा कहता है "वो माई गाड!" तब हमें बहुत अच्छा लगता है, जब 'उनहत्तर' कहने पर वह हमारा मुँह ताकने लगता है और 'सिक्स्टी नाइन' कहने पर गिनती समझता है तब हमें और मज़ा आता है | सेंट एग्नीस विद्याललय में पढ़कर हमारे बच्चे अपनी सभ्यता लगभग भूल रहे हैं | उन्हें न अपने कुल देवता का पता है न गोत्र न वंशावली का | उन्हें न धर्म से मतलब, न ईश्वर से मतलब, न सामाजिक व पारिवारिक दायित्व से मतलब | अनुशासन को वे पारम्परिक रूढ़िवादिता मानते हैं और वेशर्मी की हद तक पहुचते हैं | अभी तक तो चलेगा लेकिन वही बच्चे जिस दिन हमें बृद्धा आश्रम में डालकर पलट कर नहीं देखेंगे उस दिन याद आएगा कि सेंट पाल विद्यालय ने क्या किया | अरे, कुत्ता, बिल्ली, चिड़िया अपने बच्चों को अपनी परम्परा की शिक्षा देते हैं, शिकार, सुरक्षा आदि करने में निपुण बनाकर ही स्वतंत्र करते हैं | हमारे आप के पास तमाम निरर्थक चीज़ों के लिए तो समय है लेकिन बच्चों के लिए नहीं है कि हम सायं अपनी संस्कृति से जुड़ी कुछ कहानियाँ उन्हें सुनावें, नैतिक शिक्षा दें, व परिवार, समाज, राष्ट्र के प्रति उनके दायित्व का उन्हें ज्...

धार्मिक भीड़

जब कोई समुदाय अकेले ही एक विशाल क्षेत्र में फैल कर भीड़ बन जाता है उसका सामाजिक और मानसिक विकास ठहर जाता है | एक समय सम्पूर्ण हिन्दुस्तान शुद्ध हिन्दू देश था | यहाँ के राजा जनता को निष्ठावान बनाने के उद्देश्य से उन्हें धार्मिक और नैतिक शिक्षा तो देते थे किन्तु उनमें राजनीतिक विकास नहीं होने दिया; परिणाम स्वरूप, सारा हिन्दू समाज भीड़ बन गया और देश मुगलों के हाथ गुलाम हो गया | आज हिन्दुस्तान में ही नहीं सारे संसार में मुस्लिम समुदाय अपनी धार्मिक कट्टरता से प्रभावित होकर जहाँ कहीं भी है अपने विस्तार के लिए प्रयत्नशील है जिसकी वजह से वह हर जगह एक भीड़ बन गया है | कश्मीर एक शुद्ध मुस्लिम क्षेत्र बन गया देखो वहाँ क्या होने लग गया | भीड़ कभी शासन नहीं करती बल्कि कुछ चतुर लोगों के काम आती है | ब्रिटिश ने अपनी संख्या से नहीं बल्कि अपनी चतुराई से सारे विश्व पर राज किया | जंगल में कुछ जानवरों के विशाल समूह होते हैं किन्तु वे कुछ चतुर जानवरों के भोजन होते हैं | इजरायल में यहूदियों की संख्या अधिक नहीं है फिर भी वे आस पास की भीड़ पर सदैव भारी पड़ते हैं | अमेरिका, फ्रांस, व ब्रिटन ऐसे देश हैं जो उच...

धारा 370

धारा 370 कश्मीरियो के लिए वरदान नहीं बल्कि अभिशाप है क्योंकि वहाँ देश के दूसरे स्थान का कोई भी व्यक्ति ज़मीन खरीद कर स्थाई निवासी नहीं बन सकता | परिणाम स्वरूप, कश्मीर वह तालाब बन गया है जिसमें न तो कहीं से पानी आ सकता है और न ही वहाँ का पानी बाहर जाना चाहता है | स्थिर पानी के इस तालाब पर अब सैवाल उग चुका है, पानी सड़ गया है और तालाब के अस्तित्व पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है | यदि पर्यटक वहाँ जाना बन्द कर दें या भारत सरकार उन्हें मदद देना बन्द कर दे तो स्थिति यह है कि वहाँ के लोग भूखो मर सकते हैं | राजनीति के प्रभाव में वहाँ के लोग कितनी ग़लत फ़हमी में जी रहे हैं | वहाँ के उन्मादी बच्चों को देख कर ऐसा लगता है कि वे सभी अन्तर राष्ट्रीय राजनीति के शिकार हो चुके हैं और एक दिन सीरिया या इराक़ जैसी उनकी हालत होनी निश्चित है | वह स्थान एक दिन युद्ध क्षेत्र बन सकता है और नागरिकों की वह स्थिति हो सकती है जिसे उन्होने कभी सोचा न होगा | यदि धारा 370 हट जाय तो बाकी भारतीय वहाँ जाना रहना प्रारम्भ कर देंगे और व्यापार के सारे रास्ते खुल जाएँगे | तब फौज की भी वहाँ कोई ज़रूरत न होगी |

दलित साहित्य

मैं न तो आरक्षण का विरोधी हूँ और न बाबा साहब के विचारों का – मैं दलित साहित्य में लगातार भरती जा रही घृणा का विरोधी हूँ जिसकी वजह न तो बाबा साहब हैं और न ही उनके द्वारा बनाई गयी आरक्षण नीति | दलित साहित्य में घृणा और उसकी प्रतिक्रिया में सामान्य वर्ग की उनके प्रति घृणा का कारण यदि कोई है तो वह कांग्रेस की पार्टी-नीति है जिसने अब तक पुनरावृति के माध्यम केवल 4 प्रतिशत लोगों तक ही आरक्षण का लाभ पहुचने दिया है | यही 4 प्रतिशत लोग अपने को आराम की स्थिति में रखने के उद्देश्य से अपने भाइयो में सामान्य वर्ग के प्रति घृणा का भाव भरने लगे ताकि वे अपने अधिकार को सोच न सके और यह आवाज़ न उठाएँ की उन्हें शिक्षित किया जाय और जिनको एक बार आरक्षण मिल चुका है उन्हें पुनः उससे वंचित करके दूसरों को मौका दिया जाय | यही चार प्रतिशत आरक्षित धीरे-धीरे कांग्रेस के प्रचारक बन गये और पूरा हिन्दू समाज दो भागों में बँट गया | बाद में इसका लाभ उठा कर एक क्षेत्रीय दलित पार्टी भी अस्तित्व में आ गई | इसने भी बाबा साहब की पूरे दलित समाज को उपर उठाने के उद्देश्य को स्पष्ट नहीं किया बल्कि और भयानक घृणा की राजनीति करने लग...

Breastfeed

Image
Mother Yashoda breastfed Krishna for 5 years and gave the baby butter of Surabhi Cow to eat, and as a result, his body grew to be as solid as a rock and his love for his mother deeper. Today mothers bottle-feed their babies. These children as they grow up enjoy a bottle of cold drink then they take to hit the bottle and end up being on a drip from a glucose bottle.