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Showing posts from May 24, 2026

आंधी-तूफ़ान के पहले असहनीय उमस का मौसम

  भारतीय समाज बहुत तेजी से संक्रमित हो रहा है। गाली, अभद्रता युक्त मस्खरी सोसल मीडिया पर अत्यंत लोकप्रिय हो रही है। नयी पीढ़ी में अनुशासन तो भूल जाओ। बच्चों में न माँ-बाप का डर है न ही शिक्षकों का। इसका दोषी आज की शिक्षा पद्यति है क्योंकि पाठ्यक्रमों मे नैतिक शिक्षा केवल औपचारिकता है। इसमें समाज भी उतना ही दोषी है क्योंकि भौतिकता के इस युग में मानव को पैसों के आगे सदाचार एवं शिष्टाचार बकवास की चीज लगती है। पेशेवर-नैतिकता के अभाव में आकंठ भ्रष्टाचार है। एक समय था जब लोग पुस्तक को विद्या देवी का स्वरुप मानते थे। आज बच्चों में पुस्तक पढ़ने का धैर्य समाप्त हो चुका है। पढ़ना तो छोड़ो कोई पुस्तक देखना नहीं चाहता। परिणाम यह हुआ कि लोगों में मानव जीवन से सम्बंधित गंभीर जानकारी शून्य हो रही है। युवा किसी व्यसन, किसी आदत, किसी आचरण के परिणाम से अनभिज्ञ हो रहे हैं। सभ्य जीवन की परिभाषा मांस मदिरा बन गया है। राजनीति में मानव मूल्यों के लिए कोई स्थान शेष नहीं है। समाज इतना व्यभिचारी हो गया है कि वह पशु से भी गिरा गुजरा बन गया है। ब्राह्मण के प्रति उसकी शिक्षा पर आश्रित जनसमूह में घृणा की राजनीति भा...