Posts

Showing posts from May 31, 2026

फ्री का राशन एवं दक्षिणा

  प्रधानमंत्री मोदी जी अक्सर कहते हैं कि गुजरातियों की रगों में व्यापार बसता है। उनमें जरूरत भांपकर अवसरों को मुनाफे में बदलने की जन्मजात क्षमता होती है। शायद मोदी जी की इसी क्षमता ने उन्हें चुनावी प्रतियोगिता में अपराजेय बनाये रखा है। विदेशों में आपकी व्यापारिक क्षमता तो किसी ने देखा नहीं किन्तु देश में आपके व्यापार की कुशलता अत्यंत प्रशंसनीय है। आपने जनता का एक भी रुपया केवल वहीँ खर्च किया है जहां आपका कुछ न कुछ लाभ रहा है। नियम तो यह है कि जनता के टैक्स से जनता को सरकरी चिकित्सा मुफ्त में मिलनी चाहिए किन्तु यदि ऐसा किया गया तो सरकार बहादुर जानते हैं कि जनता इसे अधिकार समझेगी, अहसान नहीं। पैसा हाथ में रखने पर ही जनता समझती है कि सरकार ने उसे कुछ दिया। सरकार ने जैसे कुछ लोगों के हाथ में आयुष्मान कार्ड रखा जनता गद्गद - वह भूल गई कि प्राइवेट हॉस्पिटल उनका खून चूस रहे हैं और स्वास्थ बीमा का बाज़ार भी तैयार कर रहे हैं। जो भी हो, जनता अहसान भी मानने लगी और व्यापार भी होने लगा। वस्तुतः जनता उसे भगवान समझती है जो उनके हाथ में फ्री का राशन एवं कुछ दक्षिणा देता है, जबकि वह भगवान् जिसकी वास्...

महान सर जी

विधायिका प्रजातंत्र का पहला स्तम्भ है। दूसरा महत्वपूर्ण स्तम्भ कार्यपालिका है। तीसरे पर न्यायपालिका आती है और चौथा और अंतिम स्तम्भ प्रेस या मीडिया को माना गया। इनमें कार्यरत लगभग सभी का उद्देश्य आज राष्ट्र निर्माण नहीं बल्कि अधिकतम धन को सोखना है। धन सोखने के चक्कर में प्रजातंत्र का चौथा स्तम्भ तो कब का नहीं गिर गया है। तीसरे स्तम्भ की बात करें तो धन के भार ने उसे आधा झुका दिया है। शेष दो खम्भे इतने मोठे हैं कि उनमें सारी अर्थव्यवस्था समा सकती है। 'पैसा फेको और भजन कराओ' के धंधे से जब मिडिया की टीआरपी गिरी तो सर जी लोगों ने मौके का फायदा उठा लिया और उन्हें हैक करने लगे। अपने धंधे की जमीन खिसकते देख मिडिया सर जी पर उखड़ पडी। अब सरजी और मिडिया की तू-तू-मैं-मैं से एक दूसरे की पोल खुलने लगी। सर जी लोगों का उद्देश्य कोई देश को शिक्षित करने का नहीं है, नहीं तो वे सबको इंजिनियर, डाक्टर, कलेक्टर बनाने के बजाय मिस्तरी, कारीगर, उद्योगी या उत्पादक भी बना रहे होते। उनके पढ़ाने से नहीं बल्कि उनकी सेटिंग से उनके बच्चे प्रतियोगी परीक्षा पास होते है। बस यहीं छोटी पूंजी वाले गुरूजी लोगों का धंधा...