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Valentine’s Day

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You can know about your religious festivals, national holidays, and international days, each explained in only one or a maximum of three paragraphs. Each chapter contains poems for best wishes and motivational quotes as well. Get your copy and I am sure you will be happy to find your desired book. Valentine’s Day is celebrated every 14th February. Candy, flowers, and gifts are exchanged between loved ones in the name of St Valentine in many countries. Love and affection are expressed to romantic partners and family members in many ways. It is believed that during the third century in Rome, Emperor Claudius II outlawed marriage for young men, contending that single men made better soldiers. Valentine, who was a Roman priest, defied the king and continued to perform marriages for young lovers secretly. When it was discovered, Claudius sentenced the priest to death. Because of this legend, Saint Valentine became known as the patron saint of love. Some people believe that the Christian chu...

शेरों का परिवार चाहिए

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मैंने यूजीसी 2026 को पढ़ा तो लगा कि अच्छे से बने हुए कानून को किसी ने जानबूझ कर जगह-जगह खुरच दिया है। जो भी हो, यहां कानून की काली कोठरी है जिसका एससी/एसटी अधिनियम नाम का दरवाजा आटोमेटिक है क्योंकि इसमें कोई किसी को धकेल कर अंदर तो कर सकता है किन्तु अंदर का व्यक्ति फिर बाहर नहीं आ सकता है। बड़ी संख्या में मेडिकल कालेज के नाम पर यमभवन भी बनाये जा रहे हैं, गरीबों के इलाज हेतु डाक्टर के नाम पर -40 वाले यमदूत पढ़ाये जा रहे हैं। सरकार भी क्या करे जब जलकुम्भी की तरह गरीब फ़ैल रहे हैं। बसंत महीनों में पिल्ले खूब हो जाते हैं। बचपन में हम लोग दो पिल्लों की गर्दन पकड़कर उनके मुँह आपस में रगड़ देते थे। वे गुर्राने और फिर पटकी-पटका करने लगते थे। सरकार भी यूजीसी से पिल्ले लड़ाकर कर मौज ले रही है, बोल नहीं रही है, मन ही मन हंस रही है - उद्देश्य जो भी हो। मुझे लगता है बीजेपी का आज कोई विकल्प नहीं है, स्वतंत्र है, मदमस्त है, सहत्रबाहु है जिसमें परशुराम के पिता को मारकर कामधेनु के अपहरण की महत्वाकांक्षा उत्पन्न हो गई है। अब आप समझ ही गए होंगे कि बालक परशुराम के प्रकट होने का समय आ गया हैं। कोई एक चोंटियाधारी...

Help your Head Servant

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  परिवर्तन बड़ा क्रूर होता है और जब इसकी गति बहुत तेज हो जाती है तब विनाश आता है। इतनी बढ़िया सरकार चल रही थी। पिछले बारह वर्षों में हिन्दू समाज काफी संगठित हुआ था। देश का आर्थिक विकास हो रहा था। उद्योग गाँव-गाँव फ़ैल रहे थे। भारत समृद्ध और सशक्त हो रहा था। मैं तो सपने देखने लगा था कि भारत चीन जैसा हो जायेगा जहा हर किसी के पास उद्यम है, सामान शिक्षा है और सामान नागरिक अधिकार हैं। अचानक राजनीति दैत्य ने मुंह खोला और खुशियां निगल गया। आज ब्राह्मण को उसकी राष्ट्रनिष्ठा के लिए पुरस्कृत किया गया है। शेष सभी जाति वर्ग उसको पत्थर मार सकते हैं और यह अपराध नहीं माना जाएगा। आज ब्राह्मण मंदिरों में सफाई कर्मी भर है - सारा दान तो सरकारी पंडितों को चढ़ जाता है। शिक्षा उसका आभूषण था उस पर डकैती की योजना बनी तैयार है। कथा करने में लोगों को आपत्ति है। सबकी ईर्ष्या उसी की ओर है। ब्राह्मणवाद से आजादी कहने वाले पूजनीय हैं। ब्राह्मणवाद से आजादी का अर्थ है भारतीय भाषा, संस्कृति, वन्दे मातरम, राष्ट्रीयता आदि सभी से आज़ादी अर्थात आज़ाद भारत से आज़ादी। स्वतंत्रता को अभिशाप मानने वालों की पूजा कांग्रेस ने किया बी...

बाहर नहीं युद्ध घर में कराया

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  एक शेर जंगल से इस तरह भाग रहा था जैसे मौत उसके पीछे पडी हो। माइक लेकर लोमड़ी दौड़ी और पूछा,"शेर भाई क्या हो गया? शेर ने हांफते-हांफते कहा, "मेरे पीछे एक भयानक महिला पड़ गई है। मौत में इज्जत मर्यादा तो फिर भी बची रहती है।" तभी एक तेंदुआ भागते दिखा। लोमड़ी उसके पास भी पहुंची और वही सवाल किया। तेंदुवा बोला, " एक पडोसी तेंदुवा जब मुझसे जीत नहीं सका तो मदद के लिए एक एससी भाई के पास चला गया।" इतना कहते हुए वह रोने लगा। इतने में सभी शेर, बाघ, तेंदुआ, चीते इकट्ठे होकर जो चिल्लाने लगे। लोमड़ी दौड़ी और पूछा अब क्या हो गया? एक शेर आगे आता है और माइक पकड़ता है : "जंगल के राजा ने जंगल के बाकी सभी नागरिकों को बन्दूक पकड़ा दिया है और उनसे कहा है जहां भी शेर, चीते या उनके बच्चे दिखें उन्हें खोज-खोज कर मारो।" हमारे चारों और इतने भाले, इतने कांटे बिछा दिए हैं सरकार ने कि जीना तोबा हो गया है। आरक्षित समाज के एक प्रतिशत लोगों को शायद ही आरक्षण का लाभ इन 77 वर्षों में मिल सका होगा किन्तु इसका नशा व्यापक हैं? मुगलों, अंग्रेजों ने तो प्यार किया था - सारा अत्याचार केवल सवर्णों ने ...

व्यक्तिगत विवाद

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  एक समय था जब लोग बड़े सम्मान से कहते थे "ठाकुर साहब" "पण्डित जी"। आज दोनों उपाधियाँ जैसे गाली बन गई हों। अंग्रेज बूट की ठोकर लगा कर कहते थे "इंडियन डॉग", मुग़ल तिरस्कार से कहते थे "काफिर"। किन्तु ये तो मालिक थे इनके द्वारा किये गए अपमान को भूल जाना चाहिए। प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने के लिए प्रचार करना पड़ता है "मैं पिछड़ा हूँ, मैं दलित हूँ"। जब आप अपने को पिछड़ा या दलित कहने में गर्व करते हो तो समरसता के लिए कम से कम हमें भी साहब या जी को हटाकर ही कहने दो मैं ठाकुर हूँ या पंडित हूँ। सामने वाला कहता है, "कौन सी जाति की हो ? गर्मी दूर कर दूंगा !" इसमें घोर अहंकार है ! फिर भी इस अहंकार को बुरा नहीं माना जाएगा ! अहंकार तो तब हुआ जब आस्था सिंह ने जवाब में अपना जाति बता दिया। 6 जनवरी की घटना 6 फरवरी के बाद वाइरल की जा रही है। दो सामान जातियों के लोगों ने गुस्से में एक दूसरे को गर्मी दिखाई और बिना किसी को नुक्सान किये शांत हो गए। इसका उद्देश्य निश्चित राजनीतिक है जिसके माध्यम से यह प्रचार करना है कि ठाकुर में अहंकार है । जबकि राजनीत...

एआई

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  जिस तरह कृषि उपकरण ने देशी पशुओं को आवारा कर दिया है, सामान्य जनमानस को उसी तरह एआई आवारा करने वाला है। सकल घरेलू उत्पाद का 50 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा सेवा क्षेत्र है, एआई मुख्य रूप से उसे ही टारगेट करने वाला है। पारम्परिक नौकरियाँ तो समाप्त ही होंगी, आईटी सेक्टर की नौकरियों को भी यह खा जाएगा। खैर ये तो दूर की बात हुई, नौकरियों के नाम पर सरकार की भी नीयत अच्छी नहीं रही है। एक आधार कार्ड में संशोधन आज के दिन तारे तोड़ने जैसा कार्य है और एक नया आधार कार्ड बनवाना तो इस पृथ्वी का सबसे कठिन कार्य हो गया है। यदि आधार एक आवश्यक कार्ड है तो सरकार आधार विभाग की सरकारी शाखाएं देश भर में क्यों नहीं खोलती जिसमें लाखों युवकों को रोजगार तो मिलेगा ही साथ ही जनता को भी सुविधा होगी। आज सरकार को जानने की जरूरत है कि राज तंत्र कोई बहुत मजबूत चीज नहीं है। यदि बड़ी संख्या में युवक वेरोजगार हो गए तो बांटो और राज करो से काम नहीं चलेगा - सारा तंत्र ध्वस्त हो जाएगा। पकिस्तान का राजतंत्र विगड़ चुका है। श्रीलंका और नेपाल में तो कोई तंत्र ही नहीं है। भारत सरकार को सावधान होना चाहिए। मॉस में युवक वेरोजगार हों...

सवर्ण

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यूजीसी कानून का विरोध करने वाला सवर्ण आखिर जाएगा कहाँ जब देश की हर पार्टी इस कानून की समर्थक है? इस प्रश्न का उत्तर है किसी के पास ? मेरे पास है तो सुनों। पेड़ों में जब बसन्त आना होता है तो पतझड़ आता है। बंटवारे के समय पकिस्तान से पलायन किये हुए सिंधी आज सभी अरबपति हैं और हिन्दुस्तानी मूल के लोगों को नौकर रखे हुए हैं। बिहार और तमिनाडु से बहुत बड़ी संख्या में सामान्य वर्ग पलायन कर चुका है। सामान्य वर्ग पर जब अत्याचार बढ़ेगा तो प्राकृतिक रूप से जहां वे अधिक होंगे सुरक्षा के कारण वहीँ इकट्ठे होने लगेंगे और जब बड़ी संख्या में एकत्रित हो जाएंगे तो उन्हें स्वयं का तंत्र विकिसित करना सरल हो जाएगा। सवर्ण के समाज में जाति हटा दी जाएगी - वहां न कोई ब्राह्मण होगा न वैश्य न क्षत्री सभी सनातनी होंगे। भूसा नहीं सिर्फ गेहूं होगा। भेड़ों के झुण्ड नहीं शेरों के परिवार होंगे। सबको अपने राष्ट्र से प्यार होगा। सम्मुख अत्याचारी, ईर्ष्यालु समाज के सापेक्ष आपस में प्रेम होगा, संघर्ष करने की प्रेरणा होगी। वहां उसके अपने शिक्षा संस्थान होंगे, अपनी सरकार होगी। उनकी आबादी बड़ी तेजी से व्यापार करेगी और पैसा होने से उत्त...