Posts

Showing posts from June 7, 2026

ब्राह्मण

 हिन्दू समाज राजनीति से भ्रमित होकर अपने एक सशक्त भाग ब्राह्मण से वेवजह नफ़रत करता है। कहने को तो कांग्रेस ने देश को अज़्ज़ाद कराया उसने हिन्दू को और भी परतंत्र कर दिया था। हिन्दू अपने धर्म से सम्बंधित कोई भी बात सार्वजनिक रूप से नहीं कर सकता था। गोस्वामी तुलसी दास द्वारा रचित राम चरित मानस ने घोर मुगलिया तूफ़ान में सनातन डीप को सुरक्षित रखा। हमारी संस्कृति को मिटा देने की अंग्रेजों की हर कोशिशें नाकाम हुई। वे ब्राह्मण थे जिन्होंने संघ जैसे संगठन को खड़ा किया। उसी संघ के ब्राह्मणों ने भारतीय जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी बनाई जिसने सन 2014 में सत्ता राष्ट्रवादी लोगों को देकर देश को देश को वास्तविक स्वतंत्रता प्रदान की। ब्राह्मण से हटकर हिन्दू सुरक्षित नहीं रह सकता और सनातन की अनुपस्थिति में किसी का जीवन जीने लायक नहीं बच सकता।   हिंदू समाज द्वारा ब्राह्मणों का तिरस्कार स्वयं के पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा है। थोड़ी देर के लिए पूर्वाग्रह से दूर हो जाओ और सोचो, आप इस निष्कर्ष पर अवश्य आएंगे कि हिन्दू समाज को यदि कोई संगठित कर सकता है तो वह ब्राह्मण वर्ग ही है। कथा, संगीत एवं साहित्य के ...

सूत न कपास जुलाहे घर लट्ठी-लट्ठा

एक देशी कहावत है : "सूत न कपास जुलाहे घर लट्ठी-लट्ठा"। कहने का अर्थ है "न नौकरी न चाकरी, परीक्षा देशव्यापी"। अरे भाई बच्चों को क्यों भरमाये घूम रहे हो?साफ-साफ बताओ न कि नौकरी नहीं है, अतः आप लोग कोई दूसरा प्रबंध सोचो। लेकिन सरकार इतना स्पष्ट तब बोल सकती है जब उसका इरादा राष्ट्र निर्माण का हो। आज की स्थिति के अनुसार पारम्परिक शिक्षा और उस पर आधारित रोजगार महत्वहीन हो चुके हैं। इसलिए सामाजिक समता के लिए केवल नौकरी और आरक्षण ही एक मात्र रास्ता नहीं है और न ही 'स्कील इंडिया' कह देने से काम चलता है। दुनिया भर के विश्वविद्यालय की जगह प्रशिक्षु कुटीर कारखाने खोले जा सकते हैं। साथ ही विपणन, बाजार निर्माण, उत्पादन तकनीकी से सम्बंधित अध्ययन एवं शोध संस्थान का विकास करके नई पीढ़ी को उद्योगी, स्वावलम्बी एवं समृद्ध बनाया जा सकता है। किन्तु सरकार बहादुर को तो "फुट डालो, खैरात बांटो और निष्कंटक राज करो" ही करना है क्योंकि यह सबसे सरल तरीका है। बताओ देश को स्वतंत्रता से क्या लाभ हुआ? जनता जानती है सरकार देश का सुधार कर रही है और सरकार बहादुर मन ही मन सोच रहे हैं : ...