राम मंदिर चोरी
जिस मंदिर के लिए लाखों लोगों ने जान दे दी, धन संपत्ति निछावर कर दिया उसी मंदिर के सम्पत्ति की चोरी करने वालों ने सिद्ध कर दिया कि हमारे समाज का बहुत बड़ा हिस्सा दुनिया को तो डरता है किन्तु ईश्वर से नहीं। हिन्दू एक फुटकर समाज है जिसमें एक हिस्सा धर्मनिष्ठ है, राष्ट्र भक्त है - वह प्रभु श्रीराम की श्रद्धा में अपना सर्वस्व अर्पित कर सकता है। वहीँ मनमाने, अनुशासनहीन, स्वार्थ में अंधे लोगों की अपार भीड़ भी है जो न धर्म में आस्था रखता है और न ही राष्ट्र के प्रति निष्ठावान है। एक वे लोग हैं जो करोड़ों के सुन्दर आभूषणों को पहनाकर अपने राम के सौंदर्य का दर्शन करना चाहते हैं एक वे हैं जो राम को मूर्ती समझकर उन आभूषणों की चोरी से नहीं विचलित होते। संसार में सुरक्षित और सशक्त वह समाज होता जो अपने धर्म में गहरी आस्था रखता है। इसीलिए मनुस्मृति कहती है "धर्मो रक्षति रक्षितः"। अमेरिका जैसा सुपर पावर ईरान को हिला न सका क्योंकि ईरानियों को अपने धर्म से शक्ति प्राप्त हो रही थी। छोटा सा इजराइल अपने धर्म और राष्ट्र निष्ठा की ताकत पर चारों और दुश्मनों से घिरे होने के वावजूद शेर की तरह जीता है। अफगानि...