सम्बन्ध एक आपसी निर्भरता है

इस संसार में सम्बन्ध एक आपसी निर्भरता है और कुछ नहीं। कोई भी दो व्यक्ति एक ही सोच का हो ही नहीं सकता और सोच में अंतर लगाव को कम कर देता है। अतः किसी का साथ लम्बे समय तक आत्मीय नहीं रह सकता। आत्मीयता के दूसरे पक्ष को देखें तो जब तक स्वार्थ है तब तक ही आत्मीयता जीवित रहती है। उम्र बढ़ने के साथ ही व्यक्ति उसके लिए समय निकालता है जिसे वह चाहता है और जिसको नहीं चाहता उसके लिए समय न मिलने के बहाने बनाता है। वस्तुतः सब सबका होते हुए भी कोई किसी का नहीं है।
 
"लोग सम्बन्ध बनाने के लिए लालाइत रहते हैं, किन्तु कोई देख न ले इससे भयभीत भी रहते हैं।" -फ्रांज काफ्का
"लोग ओछा सम्बन्ध बना लेते है जिसे वे प्यार कहते हैं, जबकि अकेलेपन से धीरे-धीरे मरने लगते है।" -फ्योदोर दोस्तोवस्की

माँ-बाप अपने बच्चे की बड़ी सेवा करते हैं। इस सेवा का पारितोषिक बच्चा बाल स्नेह सुख के रूप में तुरंत भुगतान कर देता है। अब उससे और अधिक उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उम्मीद उस बालक से करनी चाहिए जो जेल में पैदा हुआ था। उसी से सम्बन्ध बनाओ क्योंकि वह जन्म से लेकर मृत्यु तक का सम्बन्धी है। उसे छोड़ने का असफल प्रयास तुम करते हो किन्तु वह तुम्हें नहीं छोड़ता। वह तुम पर दया करता है। तुम्हारी किसी भी पीड़ा का एकमात्र वही निदान है। जिसको तुम अनाथ समझ लेते हो उसका पालन-पोषण करने के लिए आपने देखा होगा कोई न कोई पालनहार आ ही जाता है। वह सबकी व्यवस्था करता है किन्तु जो उसे थोड़ा सा प्यार देता है उसे तो वह अपने हाथों में रख लेता है। संसार में व्याप्त सम्पूर्ण आकर्षण उसकी उपस्थिति है। किन्तु यह भी ध्यान रहे अलग-अलग जीवों को अलग-अलग चीजें आकर्षित करती हैं अर्थात सारे संसार में आकर्षण है। माधव ही संसार है - माधव ही जीवन है।
-Poet Ramesh Tiwari

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