सवर्ण पलायन
20वीं सदी की शुरुआत में तमिलनाडु में सवर्णों के विरुद्ध मिशनरी समर्थक पेरियार ई.वी. रामासामी के नेतृत्व में 'आत्म-सम्मान आंदोलन' शुरू हुआ और उसने सवर्णों को पलायन करने के लिए विवश कर दिया। आज वहां सवर्ण नाम की चीज नहीं बची है। कश्मीर से हिन्दू सवर्णों का पलायन 1990 में हुआ जब केंद्र में विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व वाली जनता दल की सरकार थी, जिसे भारतीय जनता पार्टी का समर्थन प्राप्त था। इस सरकार ने मुफ्ती मोहम्मद सईद को देश का गृह मंत्री बना रखा था और राज्यपाल शासन लागू हो चुका था। इसी वर्ष 7 अगस्त को मंडल आयोग लागू हुआ था और सवर्ण बच्चों ने सामूहिक आत्मदाह किया था। मंडल आयोग को जनवरी 1979 में मुरारजी देसाई की बीजेपी समर्थित जनतापार्टी की सरकार ने गठित किया था। बिहार में आरक्षण समर्थित घृणा की राजनीति लालू प्रसाद ने शुरू की। परिणामस्वरूप बहुत बड़ी संख्या में सवर्णों का पलायन बिहार से हुआ। वे यूपी, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों में भागकर सेटिल हुए। कुल मिलाकर सवर्ण पलायन में जातिवादी राजनीति की भूमिका रही है। आज एक बार फिर बीजेपी जातीय घृणा उगलने लगी है क्योंकि बागडोर जिसक...