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प्रदूषण

गंगा और गऊ हमारे लिए परमात्मा के वरदान हैं | गंगा में स्नान करने व उसका जल पीने से कभी कोई रोग नहीं हो सकता और इसी के साथ यदि कोई गाय का दूध पीता है तो उससे अधिक कोई बलवान और बुद्धिमान नहीं हो सकता | हमारी माँ हमें अस्तित्व प्रदान करके अपने दूध से पोषित करती है और वही पोषण बाद में हमें गंगा और गऊ से प्राप्त होता है इसीलिए हमारे पूर्वजों ने हमें सिखाया गंगा और गौ भी हमारी माताएं हैं | कितने दुख की बात है कि आज हमने गंगा मैया को दूषित कर डाला है | कितने स्वार्थी हैं हम कि गऊ माता का दूध तो ले लेते हैं किंतु उसे पालने की ज़िम्मेदारी से बचते हुए उन्हें छुट्टा छोड़ देते हैं | कितने निष्कृष्ट हो गये हैं हम कि अपने बृद्ध मां बाप को बृद्धा आश्रम भेज देते हैं | भगवान ने दोनों देवता और राक्षस बनाया - राक्षस वे हैं जो अपनी माँ को खा जाते हैं , उसे दूषित करते हैं और देवता वे हैं जो उसका संरक्षण करते हुए उसकी सेवा करते हैं | आज सुबह ५.०० बजे जब मैं सड़क पर पहुचा तब हमारे मोहल्ले के ८-१० वरिष्ठ पुरुषों का समूह मिला | हम लोग प्रातभ्रमण के लिए एक साथ हुए | उनमें से एक ने कहा , " आज कोहरा ब...

युगपुरुष स्वामी परमानन्द जी महाराज के बहराइच में दो दिवसीय कार्यक्रमों पर एक रिपोर्ट

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गुरुवार, 2 नवंबर 2017 को दोपहर 3.00 बजे परम पूज्य सद्गुरुदेव स्वामी परमानंद जी महाराज का बहराइच पदार्पण हुआ | वे श्री शीतल प्रसाद अग्रवाल जी के घर पर यात्रा के पश्चात विश्राम कर रहे थे | मैं उनसे वहाँ मिला और आग्रह किया कि गुरुदेव बहराइच के लोगों के लिए आपका क्या संदेश है ? उत्तर में उन्होने कहा, "यह देश सबका है | इस देश की प्रतिष्ठा और इसका विकास सबको मिलना चाहिए वह भले ही किसी जाति, वर्ग या संप्रदाय का क्यों न हो |" मैने उनसे फिर प्रश्न किया, “गुरुदेव इस बार आप केवल 24 घण्टों के लिए बहराइच आए हुए हैं ? उन्होने कहा, "इस बार मैं 'स्वामी परमानन्द शिक्षा निकेतन खमरिया शुक्ल' के वार्षिकोत्सव व वहाँ कंप्यूटर शिक्षा के शुभारम्भ हेतु आया हूँ | आज जिस युग का आरम्भ हो चुका है उसमें प्रत्येक व्यक्ति को डिजिटल ज्ञान आवश्यक हो गया है | प्रधान मंत्री मोदी जी ई-भुगतान के साथ-साथ लगभग सारे सार्वजनिक कार्य व सुविधाओं को डिजिटलाइज़ करने पर ज़ोर दे रहे है और ऐसा आवश्यक भी है क्योंकि देश के विकास के लिए बाकी विकसित देशों के साथ कदम से कदम मिला कर हमें चलना ही होगा | हमारे ग्र...

हे भोले !

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हे भोले ! आप संपूर्ण जगत के जीव हो, जड़ हो आप सबके जन्म हो, जीवन हो, और मृत्यु हो | हे महादेव ! आप समुद्र के अपार जल व उसके हिमगिरि हो आप उसकी लहरें हो और तूफान भी हो | हे त्रिपुरारी ! आप पर्वत शृंखला की विशालता हो आप वायु हो, अग्नि हो, और वनस्पति हो | हे महाकाल ! आप सूर्य, चंद्रमा, ग्रह, नक्षत्र, आकाश गंगा हो सबकी गति हो, उनके प्रकाश हो | हे देवादिदेव ! आप ब्रह्मांडो के ब्रह्माण्ड, अनंत हो आप सम्पूर्ण क्रिया हो, द्रव्य और उर्जा हो | हे आशुतोष ! आप शून्य हो, आप ही संपूर्ण चेतना व अस्तित्व हो संपूर्ण इकाइयाँ भोक्ता किन्तु भर्ता आप हो | हे अवढर दानी ! आपके लिए कुछ असंभव नहीं, मेरे लिए कुछ संभव नहीं - मेरा जीवन प्रकाशित और प्रसन्न कर दो | - रमेश तिवारी

Govind’s Flute

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Shyam, your flute calls Radha, Radha, And to the haunting beautiful melody The whole Brij chants Radha Radha. Whether it is the banks of the Yamuna Or the tree under which you play it, All echo with the entrancing notes. People are beguiled by the exotic sound. Now they do not know who they are. Intoxicated are birds, flowers and plants - They do nothing but look towards you. Who is that who is not a slave to it? Govind’s flute fills our lives with delight If only we could listen to what it sings. Shyam, loves all who recite Radha, Radha, The name of all that exists!!! Shyam, your flute calls Radha, Radha.

भारतीय जीवन बीमा निगम, बहराइच में हिन्दी दिवस

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भारतीय जीवन बीमा निगम परंपरागत रूप से १४ सितंबर से प्रारंभ एक पखवाड़े तक हिन्दी भाषा पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करती है | बहराइच शाखा ने अब तक उन कार्यक्रमों को क्रमबद्ध ढंग से करते हुए आज हिन्दी भाषा पर आधारित माननीय मुख्य प्रबंधक , श्री टी. आर. मिश्र , की अध्यक्षता में एक गोष्ठी का आयोजन किया | जिसमें मुख्य अतिथि किसान डिग्री कालेज के हिन्दी के विभागाध्यक्ष डाक्टर नीरज कुमार पांडेय ने विस्तार पूर्वक हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य पर व्याख्यान दिया | उन्होने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि “ हिन्दी की लिपि देवनागरी अत्यंत ही वैज्ञानिक है । यह विश्व भर में नब्बे करोड़ लोगों के द्वारा बोली जाती हैं । संस्कृत से नवीन शब्द रचना और शव्द संपदा हिन्दी को विरासत में प्राप्त है । अन्य भाषाओं के शब्दो सहित देशी बोलियों के अपार शब्द संग्रह उसे संप्रेषण की उच्चतम क्षमता प्रदान करते हैं । भारत को स्वतंत्र कराने में हिन्दी का महत्वपूर्ण योगदान था और आज भी वह देश में राष्ट्र प्रेम की भावना को प्रवाहित कर रही है । १४ सितम्बर सन् १९४९ को हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया थ...

BHU

If the university administration cannot provide a safe evening for girl students, it has no right to use police force against the girl protesters at BHU. However, liberty and security cannot go hand in hand in the case of girls. Often girls do not show self-restraint. It is not because they do not want to show but because they are helpless against their natural instinct. So girls are as bad as boys – they attract problems. Practically speaking, the administration did no wrong to impose ban on their evening strolls. BHU is BHU – it should not go like JNU where the campus stinks of perversity.   

माँ दुर्गा

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माँ के आँचल में ही हम माँ को खोजा करते हैं, माँ के दर्शन उनको होते माँ प्रेमी जो होते हैं । सागर तेरे चरण धुलें माँ चँवर डुलावे पुरवाई, दिशा दिशाएं कीरति गावें वन बागों की शहनाई । धरती पर सब तेरे बच्चे उछल-कूद माँ करते हैं, माँ के दर्शन उनको होते माँ प्रेमी जो होते हैं । सारा नभ दरबार सज़ा माँ सूर्य चंद्र से आलोकित, निशा दिवस पहरे देते हैं तारों से मण्डप शोभित । मेघों के संगीत सुहाने मन मोहित कर लेते हैं, माँ के दर्शन उनको होते माँ भक्ति जो करते हैं । माँ के आँचल में रहकर हम माँ को खोजा करते हैं, माँ के दर्शन उनको होते माँ प्रेमी जो होते हैं । रमेश तिवारी