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Showing posts from October 11, 2026

दैत्य और दानव के मध्य विकल्प

लोग पूछते हैं अब विकल्प क्या है? इन्हें कौन बताये कि दैत्य और दानव के मध्य विकल्प नहीं होते। ये भोंपड़े फिर कहते हैं, "देश सोरोस के हाथों सौंप दोगे, देश द्रोहियों को आमंत्रित करोगे, देश को पकिस्तान बना दोगे?" अब कोई इन गधों से पूछे अभी कौन सा हिन्दू राष्ट्र बना जा रहा है? मंदिरों से उन्हें राम नहीं चाहिए बल्कि पैसे चाहिए। जिसके कारण गो कट रही है, गुरु अपमानित है और गंगा गंदी हो रही है। दिल ठण्डा करने वाला डायलॉग आता है "एक रहोगे तो सेफ रहोगे"। कुछ ही दिन बाद: "बोल कालिया कितनी जातियां हैं रे ! सबके टुकड़े-टुकड़े होकर रहेंगे।" उन्होंने प्रतिज्ञा की "सबका साथ सबका विकास।" और होने लगी इनके कैश से उनकी ऐश। आखिर कौन सी हलुवा, पूड़ी मिली जा रही है हमें? हमारे बच्चों के लिए विद्यालय प्रतिबंधित करने की शाजिश चल रही है, हम गाली खाते रहें किन्तु जवाब भी नहीं दे सकते, हर कदम पर हमारे लिए कांटे बिछे हैं - कब जेल हो जाय कोई पक्का नहीं, हमारे लिए एक के बाद एक नौकरियों के दरवाजे बन्द होते जा रहे हैं - आरक्षण 100 प्रतिशत की ओर बढ़ रहा है, हमारी अपने ही देश में वो हाल...

दुश्मनी नहीं फिर भी सभी दुश्मन

आज आप अपने ही समाज में सहज नहीं हैं। बात करते समय आपको ध्यान रखना पड़ता है कि आप किस जाति के व्यक्ति से बात कर रहे हैं। किसी से कोई दुश्मनी नहीं फिर भी सभी एक दूसरे के दुश्मन हैं। एक जाति वाला दूसरे जाति वाले को ऐसे देखता है कि जैसे दोनों ने एक दूसरे के बाप की ह्त्या की हो। दलित से बातें करना तो बिजली के तार पर काम करने जैसा है। सरकारी कार्यालयों में डेलीवेज चपरासी अधिकतर सवर्ण होते हैं - उन्हें तो ये लोग बात-बात में माँ बहन की गाली देते रहते हैं और दूसरों को ब्रम्हास्त्र की धमकी। सनातन समाज में मूल रूप से वर्ण व्यवस्था थी। ब्राह्मण, क्षत्री, वैश्य, शूद्र पदवी या उपाधियाँ होती थी - जो जिस योग्य होता था उसे वही पदवी मिलती थी। जब विदेशियों की घुसपैठ होने लगी तब भारतीय नस्ल को बचाने के लिए इसे जन्म से जोड़ दिया गया था। पौधे, फसलें, जानवर सब एक जैसे नहीं होते - सबकी जातियां होती हैं। क्या सभी को ब्राह्मणों ने बनाया है? यदि मानते हो कि ब्राह्मणों ने बनाया है तो वह ईश्वर है। जातिवाद सरकारें करें, जातिवाद सभी करें और दोष ब्राह्मण को? जिसने आर्थिक अथवा शारीरिक असमर्थता के अतिरिक्त जाति के आधार प...