दैत्य और दानव के मध्य विकल्प
लोग पूछते हैं अब विकल्प क्या है? इन्हें कौन बताये कि दैत्य और दानव के मध्य विकल्प नहीं होते। ये भोंपड़े फिर कहते हैं, "देश सोरोस के हाथों सौंप दोगे, देश द्रोहियों को आमंत्रित करोगे, देश को पकिस्तान बना दोगे?" अब कोई इन गधों से पूछे अभी कौन सा हिन्दू राष्ट्र बना जा रहा है? मंदिरों से उन्हें राम नहीं चाहिए बल्कि पैसे चाहिए। जिसके कारण गो कट रही है, गुरु अपमानित है और गंगा गंदी हो रही है। दिल ठण्डा करने वाला डायलॉग आता है "एक रहोगे तो सेफ रहोगे"। कुछ ही दिन बाद: "बोल कालिया कितनी जातियां हैं रे ! सबके टुकड़े-टुकड़े होकर रहेंगे।" उन्होंने प्रतिज्ञा की "सबका साथ सबका विकास।" और होने लगी इनके कैश से उनकी ऐश। आखिर कौन सी हलुवा, पूड़ी मिली जा रही है हमें? हमारे बच्चों के लिए विद्यालय प्रतिबंधित करने की शाजिश चल रही है, हम गाली खाते रहें किन्तु जवाब भी नहीं दे सकते, हर कदम पर हमारे लिए कांटे बिछे हैं - कब जेल हो जाय कोई पक्का नहीं, हमारे लिए एक के बाद एक नौकरियों के दरवाजे बन्द होते जा रहे हैं - आरक्षण 100 प्रतिशत की ओर बढ़ रहा है, हमारी अपने ही देश में वो हालत है जो अंग्रेजों के समय देशी लोगों की थी। अरे उल्लू के पट्ठों, तुम उनके लिए देश बचाने की बात कर रहे हो जो तुम्हें देश से निकाल देना चाहते हैं। जो लोग देश में बंगलादेश बसा देना चाहते हैं, सरकार बहादुर उन्हीं के मुंह चाट रही है तुम्हें नहीं दिखता? तुम्हें नहीं दिखता कि सरकार यूजीसी, एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण के नित्य नए दीपों से उन्हीं की आरती उतार रही है? तुम्हारे बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं तुम्हें दया नहीं आती? यहां 800 वर्षों तक मुग़ल रहे। ये मत सोचो कि सारे हिन्दू हिन्दू हैं। एक बहुत बड़ी संख्या में पाखंडी हिन्दुओं की नशों में मुगलिया रक्त बह रहा है। तुम्हें न पक्ष न विपक्ष, दोनों से लड़ना होगा, एक नई व्यवस्था या नए राष्ट्र की ओर चलना होगा, तुम्हें घास में नहीं बल्कि अपने मैदान में उगना होगा।
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