कमल कानून

पंजा कानून मुंह पर वायलेंट झपट्टा मारता है किन्तु कमल कानून पंखुड़ी में छिपा निहाय होता है। कमल कानून 2018 के अनुसार एससी /एसटी छात्रों को पढ़ाना किसी सवर्ण या ओबीसी शिक्षक के लिए आग से खेलने जैसा कार्य है। यह क़ानून दलित वर्ग को प्रत्येक केश में 12 लाख रुपयों का लालच देकर अन्य सभी वर्ग के अधिक से अधिक लोगों को दौड़-दौड़ कर फंसाने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह कानून अन्य वर्गों के लिए सहज उपलब्ध हथियार है जिससे वे आपस में एक दूसरे को घायल कर सकते हैं। गनीमत इस बात की है कि दलित समाज का 95 प्रतिशत हिस्सा अभी भी हिन्दू धर्म में आस्था रखता है और अपने समाज से मिलकर चल रहा है। उसका केवल 5 प्रतिशत क्रीमीलेयर हिस्सा ही सक्रीय है तब यह स्थिति है। ये क्रीमीलेयर देश के लिए आतंक बन चुके हैं। ये देश के संशाधन का सर्वाधिक लाभ उठा रहे हैं। आरक्षण के लगातार लाभ से इनके पास पैसों की कमी नहीं है। खूब ऐश करते हैं, भारतीय संस्कृति से नफरत करते हैं। इनके आस-पास किसी अन्य का जीवन नर्क है। इतना ही नहीं, यदि यूजीसी लागू हो जाय तो सभी उच्च शिक्षण ससस्थान सवर्णों के लिए काल कोठरी बन जाएंगे क्योंकि सबमें एससी /एसटी और ओबीसी छात्र होंगे ही जो उन्हें अकारण ही, ब्लैकमेल कर सकते हैं, जेल भेज सकते हैं, या रस्टीकेट करवा सकते हैं। कमल कानूनों में जनकल्याण या तर्क की कोई गुंजाईश नहीं है। वे धीरे-धीरे हिन्दू समाज को एक साथ रहना मुश्किल कर रहे हैं। परिणामतः देश में बंटवारे की स्थिति बनती जा रही है। तीन खण्डों में एक और पकिस्तान की मांग हो सकती है। अभी तक सरकार मुस्लिम को विलेन बना रही थी अब सवर्णों को बनाने लगी है।महाभारत में ऋषि श्राप से उत्पन्न प्रभास क्षेत्र अर्थात गुजरात के सोमनाथ तट पर उगे एरका नाम की नुकीली घास सम्पूर्ण यदुवंश के विनाश का कारण बनी थी। वही स्थिति आज हिन्दू विनाश की बन रही है जो गुजरात से ही पैदा हुई है। हिन्दू प्रधान सेवक ने हिन्दुओं के विरुद्ध ईर्ष्या, घृणा और बदले की भावना के सैकड़ों संकेत दिए होंगे किन्तु किसी ने समझने के कोशिश नहीं की।

Comments

Popular posts from this blog

आचार्य प्रवर महामंडलेश्वर युगपुरुष श्री स्वामी परमानन्द गिरी जी महाराज द्वारा प्रवचन - प्रस्तुति रमेश चन्द्र तिवारी

100th episode of PM Modi’s Man-ki-Baat

Festivals With Poetic Greetings