हिन्दी दिवस 2026

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् - बहराइच ने "साहित्य सदन" सिसई हैदर में टी. आर. मिश्र की अध्यक्षता में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन करके हिन्दी दिवस मनाया। परिषद् के पूर्व अध्यक्ष शिव कुमार सिंह रैकवार मुख्य अतिथि एवं जनपद के लोकप्रिय साहित्यकार राम सँवारे द्विवेदी विशिष्ठ अतिथि थे। राम सुरत वर्मा 'जलज' ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में सरस्वती बंदना एवं बन्दे मातरम गीत गायन किया गया । किसान डिग्री कालेज के पूर्व विभागाध्यक्ष गंगोत्री प्रसाद त्रिपाठी ने हिन्दी भाषा के अंतरराष्ट्रीय विकास पर ज्ञानवर्धक जानकारी से बड़ी संख्या में उपस्थिति श्रोताओं को लाभान्वित किया। कार्यक्रम के आयोजक रमेश चन्द्र तिवारी ने कहा: "एक समय था जब लोगों को अंग्रेजी के सामने हिन्दी में बोलने पर हीन भावना महसूस हुआ करती थी किन्तु आज हिन्दी बोलने के लिए सारा विश्व लालायित है। अमेरिका में हिन्दी ने दूसरा स्थान प्राप्त कर लिया है।" राधा कृष्ण पाठक ने पढ़ा : "मैं तो एक सरल हिन्दी हूँ मेरा कोई देश नहीं। जगह जगह मैं घूमा करती मेरा कोई वेश नहीं। तुलसी और कबीर, शूर की विमल स्वरों की सरिता हूँ। तीर्थ-तीर्थ में बहती बहती, जनमानस में पलती हूँ।" सुभाषित श्रीवास्तव 'अकिंचन' ने पढ़ा : "तुलसी के राम की कौन नहीं जाने भला, सूर के श्याम की पुजारी हिंदी भाषा है।" गुलाब चन्द्र जायसवाल ने पढ़ा :"संविधान औ लोकतंत्र सारी दुनिया में न्यारा है, भारत विश्व गुरु होवे ऐसा संकल्प हमारा है।" देशराज सिंह 'आजाद' ने गाया : "त्याग और बलिदान मांगती है मांटी, खोया हिन्दुस्तान मांगती है मांटी।" शालिनी शर्मा, आर पण्डित मशरिक़ी, छोटे लाल गुप्त, मुकुल जौहरी, विनोद कुमार पांडेय, बजरंग कुमार मिश्र, राकेश कुमार रस्तोगी, पंकज शुक्ल 'नूतन', अम्ब्रीश पाठक, नन्द किशोर शुक्ल, नीरज प्रकाश आदि ने अपने ग़ज़ल, गीत, कविता, भाषण के माध्यम से हिन्दी भाषा के इतिहास पर, इसके संपर्क भाषा एवं राजभाषा पर विस्तृत प्रकाश डाला। हिन्दी राष्ट्र भाषा बने इस हेतु साहित्यकारों व् प्रत्रकारों की क्या भूमका हो सकती है इस विषय पर भी चर्चा हुई। निश्कर्ष यह निकला कि हिन्दी इतनी समर्थ भाषा के रूप में उभर रही है कि वह मात्र साहित्य ही नहीं अपितु वाणिज्य और विज्ञान की सरलतम अभिव्यक्ति का माध्यम बन चुकी है। डिजिटल मीडिया के माध्यम से वह भारत क्या सम्पूर्ण विश्व में लोकप्रिय हो रही है। अंत में गत सप्ताह दिवंगत सत्यवती मिश्रा को विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद् एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। आप विश्व कल्याण परिषद् के राष्ट्रिय अध्यक्ष कलराज मिश्र की धर्म पत्नी थी।

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