भेड़ों के ग्राहक होते हैं शेरों के नहीं

 मीडिया ईरान, अमेरिका, यूक्रेन, रूस, चीन गई है। विद्वान प्रवक्ता दुनिया देख रहे हैं जन्तर-मन्तर नहीं। पक्ष-विपक्ष पार्टियां सभी काकरोचों को पालने में लगे हैं, गरुण को नहीं - अदाकारों, भेड़ों के ग्राहक होते हैं शेरों के नहीं ! आज सभी पार्टियों के लिए जंतरमंतर किष्किंधा है। आँख के अंधों, किष्किंधा में राम आएंगे और तुम अपने को बालि समझते हो, तुम सभी को ढेर होना ही है। आरक्षण के नाम पर सरकार का विरोध किया नहीं कि मेढक टों टों करके कांग्रेसी कहने लगते हैं। गुलामी के पौधों, आज बीजेपी भी कांग्रेस ही है, सभी पार्टियां कांग्रेस हैं और हम सभी का वहिष्कार करते हैं। देश की खिचड़ी आबादी में रामभक्तों का दम घुट रहा है - हमें अलग राष्ट्र चाहिए।


मेढक कहे कि कोयल ने मुझे संगीत सीखने नहीं दिया तो क्या इसमें कोयल की कोई गलती है? बेर कहे कि ताड़ ने मुझे बड़ा होने नहीं दिया तो क्या ताड़ ने उन्हें रोका था? आरक्षण प्रेमियों, तुम्हारा विकास कभी नहीं हो सकता। जिस दिन नौकरी चली गई उस दिन तुम फिर जैसे थे वैसे हो जाओगे। कारण प्रमुख रूप से दो हैं : पहला तो तुम लोग राम द्रोही हो और दूसरा तुम्हारी सोच में पुरुषार्थ का भोजन अर्जित करना नहीं, बल्कि सदैव भीख पर आश्रित रहना है। पुरुषार्थी ही देश की संपत्ति है और भिखारी देश पर बोझ है। जिस दिन पुरुषार्थ की सोचोगे उस दिन तुम श्रेष्ठ बन जाओगे और उसी दिन तुम्हारा देश भी महाशक्ति बन जाएगा। आरक्षण वालों, यदि तुम्हें खैरात ही चाहिए तो नेताओं और भ्रष्ट व्यवसाइयों के पास अकूत धन और विशाल भूखंड हैं - उसमें हिस्सा की मांग क्यों नहीं करते?

सवर्ण आरक्षण नहीं असहाय कल्याण योजना की मांग करता है। सरकार ने 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस के क़ानून से सवर्णों को कलंकित किया है। जिस समाज के समाने जितनी बड़ी चुनौतियां आती हैं वह समाज उतना अधिक विकास करता है। जन्तर-मन्तर पर आराजकता, अत्याचार और भ्रष्टाचार के विरुद्ध बच्चे अकेले संघर्ष कर रहे हैं। यही उनका जीवन है, यही उनकी श्रेष्ठता है। आरक्षण भेदभाव पैदा करता है, आरक्षण राष्ट्र की कीमत पर नेताओं को समृद्धि प्रदान करता है, आरक्षण की वजह से नेता राष्ट्र निर्माण नहीं बल्कि स्वनिर्माण के उद्द्श्य से शासन चलाते हैं। आरक्षण एक बड़ी आबादी और देश के लिए अभिशाप है। हमारे बच्चे इसलिए आरक्षण का विरोध करते हैं।

ओबीसी एक सक्षम वर्ग है। देश के प्रति उसका योगदान सवर्णों के समानांतर है। इतिहास गवाह है कि उन्होंने स्वाभिमान से जीवन जिया है, देश के लिए वलिदान दिया है तथा उनमें कोई एक ऐसी जाति नहीं है जो भिखमंगी रही हो। उनमें से बहुत सी जातियों ने देश पर राज किया है। कुर्मी और यादव देश की पालनहार जातियां हैं जिनका सारे देश को आभार व्यक्त करना चाहिए। लोध, लोहार, गड़ेरिया, प्रजापति ने देश का निर्माण किया है। सोच कर देखो देश इनका कर्जदार है। ऐसे श्रेष्ठ और सक्षम नागरिकों के लिए तो आरक्षण होना ही नहीं चाहिए क्योंकि जो देश को खिलाता है वह भला खैरात खाना चाहेगा?

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