अनुसूचित बच्चों की शिक्षा ही नहीं पालन पोषण

 

अनुसूचित जनजातियां अधिकतर जंगलों में रहने वाले लोग हैं वे विकासशील सभ्यता में शामिल नहीं हो सके। अतः आरक्षण उनके लिए अति आवश्यक है। अनुसूचित जाति में सैकड़ों जातियां हैं वे मुख्य रूप से गावों में मजदूरी और शहरों में सफाई कार्य करते थे। अधिकतर लोग आज भी वही कर रहे हैं। चूंकि ये लोग ऐसे व्यवसाय में रहे हैं जहां इनकी खुद की सोच कभी विकसित हुई ही नहीं इसलिए इन्हें आरक्षण चाहिए। अब यह स्पष्ट हो गया कि इन्हें आरक्षण मिलना चाहिए किन्तु जिसने हवाई जहाज कभी देखा ही न हो उसे पायलेट बना दो तो क्या हवाई जहाज उड़ेगा? अतः आरक्षण देने से पहले इन्हें हुनरमंद अथवा शिक्षित करने की आवश्यकता है। क्या मजदूरों, वनवासियों या सफाई कर्मियों के बच्चो को शिक्षा के लिए समुचित प्रयास किये गए ? यदि शिक्षित किये गए होते तो मजदूरों के बच्चे आज भी मजदूर नहीं बन रहे होते। अब बताओ आरक्षण को लागू हुए आठ दशक होने वाले हैं तो अब तक आरक्षण का लाभ फिर किसे मिल रहा है? उत्तर मिलेगा कि उन लोगों को जो जाति से तो अनुसूचित थे किंतु वे पहले से ही सामान्य वर्ग के समानांतर शिक्षित व् सम्पन्न जीवन जी रहे थे। कोई भी वर्ग कितना ही पिछड़ा क्यों न हो उसमें कुछ विशेष क्षमता या योग्यता लोग होते ही हैं। यही पूरे दलित वर्ग के आधे प्रतिशत लोग बारम्बार सपरिवार बड़े साहब बन रहे हैं और अपने ही गरीब भाइयों को वेवकूफ बना कर उनकी जनसँख्या का लाभ उठा रहे हैं। सरकार बोलती है कि हम दलितों का जीवन स्तर सुधार रहे हैं और सुधरे हुए ऐश कर रहे हैं। यदि मजदूरों या सफाई कर्मियों के प्रति किसी पार्टी में सहानुभूति हो तो उनके बच्चों की शिक्षा ही नहीं अपितु उनके पालन पोषण की बात करें और फिर आरक्षण में उनके हक़ को सुनिश्चित करें। किया आज तक किसी पार्टी ने ? यदि प्रारम्भ से ऐसा हुआ होता तो देश ने चीन के बराबर विकास किया होता क्योंकि देश की कमाई का एक बड़ा हिस्सा खैरात में न खर्च हो रहा होता और शिक्षित होने की वजह से देश की आबादी नियंत्रित होती।

Comments

Popular posts from this blog

100th episode of PM Modi’s Man-ki-Baat

आचार्य प्रवर महामंडलेश्वर युगपुरुष श्री स्वामी परमानन्द गिरी जी महाराज द्वारा प्रवचन - प्रस्तुति रमेश चन्द्र तिवारी

Festivals With Poetic Greetings