एक पति/पत्नी व्रती


करवा चौथ पति-पत्नी के मध्य निष्ठा और प्रेम स्थापित करने का व्रत है। एक पति/पत्नी व्रती का परिवार प्रारम्भ से अंत तक सुखी और स्वस्थ रहता है। कुछ महिलाओं का कहना है कि हमें 40 वर्ष की उम्र में दूसरी शादी कर लेनी है तो करवा चौथ व्रत का क्या मतलब, पति की लम्बी उम्र हो या कल मर जाय इससे हमें क्या लेना-देना है। रामायण में सूर्पणखा इन्हीं महिलाओं की प्रतीक है। उसकी नाक कट गई ! ऐसी महिलाओं के दांत कम उम्र में गिर जाते हैं, बाल पक जाता है और शकल चुड़ैल सी हो जाती है। इसके अतिरिक्त, वे वृद्धावस्था में जो घोर नर्क भोगती हैं वह अवर्णीय है। कुछ अन्य महिलायें करवा चौथ को पुरुषों की गुलामी का प्रतीक मानती हैं। कुछ कहती हैं कि यह ब्राह्मणों के द्वारा बनाया हुआ ढकोसला है, पाखंड है - इसके पीछे कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। त्योहारों में इन्हें वैज्ञानिक प्रमाण चाहिए, सर के दर्द के लिए पैरों की मालिश चाहिए। पूर्वजों की बनाई हुई मान्यताओं और परम्पराओं को तुम जैसे घनचक्कर समझ सकते तो यह धरती स्वर्ग होती। हमारे सारे त्योहारों का आधार मनोविज्ञान है न कि भौतिक विज्ञान। पश्चिमी सभ्यता ने विज्ञान के चक्कर में कभी पर्यावरण संरक्षण को नहीं सोचा, सम्भोग के अतिरिक्त कभी मनोवैज्ञानिक भूख को नहीं समझा, परिणामतः आज वे अवसादग्रस्त हैं और दानव की तरह सारे संसार में बीमारी फैला रहे हैं। इतनी घनी आबादी के बावजूद कोरोना का दुष्प्रभाव भारत में उतना नहीं हुआ जितना अमेरिका में हुआ था। निरंकुश महिलाएं सारे समाज को गंदा कर देती हैं। देश भर में फैलता हुआ व्यभिचार सरकार की महिला सशक्तीकरण का परिणाम है। समाज को कोई कीमत चुकानी क्यों न पड़े सरकार को इससे कोई वास्ता नहीं, उसे वोट चाहिए, ठीक उस महिला की तरह जो नौजवानी में 72 शादियां करती है।

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