नौटंकी से जनता फुसलाई जा सकती है - देश नहीं चलता

 

हिन्दूवाद के दरवाजे से अटल और आडवाणी जी ने सत्ता में प्रवेश किया था। पाकिस्तान प्यार की खिड़की से अटल जी अपने गुड फील के साथ बाहर निकल गए और जिन्ना मोह की सुरंग से आडवाणी जी। अब आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने बयान दिया है कि हमें पाकिस्तान के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखने चाहिए। इसका समर्थन करते हुए सम्बद्ध संगठन वनवासी कल्याण आश्रम के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के लोग अंततः अपने इतिहास को समझेंगे और भारत में अपने ‘पूर्वजों की जड़ों और परंपराओं’ की ओर लौटेंगे। यदि ज़रा भी इतिहास और बायलॉजी का ज्ञान हो तो सोचो अखंड भारत का मुस्लिम सभी कन्वर्टेड नहीं है बल्कि अधिकतर अनुवांशिक है। सोचो क्या संभव है कि तालाब का पानी ऊपर चढ़कर झरने से मिलने आ जाय? निश्चित ही नहीं, फिर यदि झरने का पानी बहकर तालाब में मिलेगा तब क्या वह तालाब के पानी को साफ़ करेगा या स्वयं अपनी स्वच्छता को खो देगा? विदेशी टिप्पड़ियों से भयभीत होकर अपने सिद्धांतों से क्यों समझौता कर रहे हो भाई। हमारी कमी सदैव यही रही है कि विवाद से बचने के लिए हम अपने ही बच्चे को दोषी कहकर उसे थप्पड़ जड़ देते हैं। बीजेपी संगठन तो हिन्दुओं के एकता की दुश्मन बन गयी है। हिन्दुओं की एकता में फूट का प्रत्यक्ष परिणाम उनके धर्मांतरण को प्रोत्साहित करना है, साथ ही अपने मूल्यों और अपनी संस्कृति का ह्रास है। जब श्रीमद भागवत को सुनने वाले और सुनाने वाले एक दूसरे के दुश्मन होंगे तो क्या सनातनी परंपरा बची रह सकती है? जैसे पौधे, जानवर और अन्य सूक्ष्मजीव मौसम, मिट्टी, पानी और जलवायु के साथ मिलकर एक संपूर्ण जीवन चक्र और संतुलन बनाते हैं उसी तरह हिन्दू के चारों वर्ण एक दूसरे पर निर्भरता से एक संगठित और सशक्त समाज बनाया करते थे। सामाजिक संतुलन विगाड़ कर हिन्दुओं को क्यों कमजोर कर रहे हो भाई? चीन ने अमेरिका को धमकाया है या अपनी जनता को? क्या युद्ध से पहले ईरान विद्रोहियों से डरकर अपने इस्लामिक मूल्यों से समझौता कर लिया था? यदि नहीं तो आप फर्जी के 56 इंची हो? अमेरिका के उलूल-जुलूल बयानों से विचलित क्यों होते हो? नौटंकी से जनता फुसलाई जा सकती है - देश नहीं चलता !

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