आंधी-तूफ़ान के पहले असहनीय उमस का मौसम

 

भारतीय समाज बहुत तेजी से संक्रमित हो रहा है। गाली, अभद्रता युक्त मस्खरी सोसल मीडिया पर अत्यंत लोकप्रिय हो रही है। नयी पीढ़ी में अनुशासन तो भूल जाओ। बच्चों में न माँ-बाप का डर है न ही शिक्षकों का। इसका दोषी आज की शिक्षा पद्यति है क्योंकि पाठ्यक्रमों मे नैतिक शिक्षा केवल औपचारिकता है। इसमें समाज भी उतना ही दोषी है क्योंकि भौतिकता के इस युग में मानव को पैसों के आगे सदाचार एवं शिष्टाचार बकवास की चीज लगती है। पेशेवर-नैतिकता के अभाव में आकंठ भ्रष्टाचार है। एक समय था जब लोग पुस्तक को विद्या देवी का स्वरुप मानते थे। आज बच्चों में पुस्तक पढ़ने का धैर्य समाप्त हो चुका है। पढ़ना तो छोड़ो कोई पुस्तक देखना नहीं चाहता। परिणाम यह हुआ कि लोगों में मानव जीवन से सम्बंधित गंभीर जानकारी शून्य हो रही है। युवा किसी व्यसन, किसी आदत, किसी आचरण के परिणाम से अनभिज्ञ हो रहे हैं। सभ्य जीवन की परिभाषा मांस मदिरा बन गया है। राजनीति में मानव मूल्यों के लिए कोई स्थान शेष नहीं है। समाज इतना व्यभिचारी हो गया है कि वह पशु से भी गिरा गुजरा बन गया है। ब्राह्मण के प्रति उसकी शिक्षा पर आश्रित जनसमूह में घृणा की राजनीति भारतीय आदर्श की शत्रु बन चुकी है। अभी कुछ दिन पहले प्रेमानन्द जी महाराज के भक्तों में राधे राधे का अनुपम वातावरण बना हुआ था, बागेश्वर बाबा हनुमान भक्ति में जनमानस को आह्लादित किये हुए थे, रामभद्राचार्य की कथा, देवकीनंदन ठाकुर का जनता में सनातन के पक्ष में विमर्श सब कुछ एक झटके में यूजीसी ने फीका कर दिया। भारतीय जब भी राम से विमुख हुए हैं तब तब शुभ परिणाम से वंचित हुए हैं। निश्चित ही आपने पश्चिम बंगाल में सराहनीय कार्य किये हैं किन्तु भीम आर्मी से उत्तर मध्य भारत को तमिलनाडु या केरल क्यों बना देना चाहते हो? ज़रा इस पर भी गौर करो। राम कथा सुनने वाली भीड़ को भीम आर्मी के साथ क्यों जोड़े दे रहे हो भाई। सावधान हो जाओ, सनातन समाज के विष हैं ये लोग, भारतीय राजनीति रुपी तालाब में एमके स्टालिन, उदयनिधि स्टालिन जैसी जलकुम्भी पैदा कर देने वाले लोग हैं ये! सनातन की चारों जातियों को एक दूसरे पर आश्रित रहने दो। उनके आपसी प्रेम में खटाई मत डालो, नहीं तो देश एक विशाल पकिस्तान बन जाएगा। जैसे तबाही लाने वाली आंधी-तूफ़ान के पहले असहनीय उमस का मौसम बनता है ठीक वैसे आज का सामाजिक वातावरण विश्वयुद्ध के पहले का संकेत है।

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