आरक्षण हटाओ आन्दोलन




आरक्षण संशोधन की मांग को लेकर आज सवर्ण समाज जन्तर-मन्तर पर इकठ्ठा हो गया है। एक भारी भीड़ वहां पहुंच रही है और पुलिस बैरिकेटिंग लगाकर उन्हें शामिल होने से रोक रही है। इतना ही नहीं सारी मीडिया इस सम्बन्ध में कोई खबर नहीं चला रही है। सारा कुछ केवल सोसल मीडिया पर चल रहा है। सरकार ने इन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए परमिशन भी नहीं दिया है यद्यपि परमिशन की आवश्यकता भी नहीं होती केवल सूचना देना ही पर्याप्त होता है ताकि सरकार उनके लिए आवश्यक सामाग्री मुहैया कराये। यहाँ भोजन पानी की व्यवस्था तो छोड़ो सरकार ने उनके लिए लट्ठ की व्यवस्था करके रखी है।
 
अतिउत्साह में सरकार बहादुर ने अपने पैरों पर उस दिन कुल्हाड़ी मारी थी जिस दिन यूजीसी लागू किया था। उन्होंने बड़े भावुक ढंग से कहा था "गोली मारनी है तो मुझे मारो मेरे दलित भाइयों को क्यों मार रहे हो, समाज की एकता को क्यों नष्ट कर रहे हो!" उसके बाद दलितों पर पैलेट गन चल जाते हैं। उन पर क्रूरता की हद हो जाती है। सरेआम झूठ बोलना है साहब को। सवर्ण बेचारा दलितों से पहले ही भयभीत है कि कहीं एससी/एसटी धारा न लग जाय, वह उनकी गाली खाता है, फिर भी उन्हें अपना बनाना चाहता है - क्या वह दलितों पर अत्याचार कर सकता है ?
 
आप सवर्णों को ही नहीं दलितों को भी धोखा दे रहे हैं। देश के सारे संशाधन पर केवल सत्ता की रोटी सेक रहे हैं। आप अमीरों को बार-बार आरक्षण देकर पहले तो उन्हें भारतीय संस्कृति के वागी बना रहे हैं, उनमें जातीय नफ़रत भर रहे हैं और फिर उनके माध्यम से विधर्मियों की संख्या बढ़वा रहे हैं। बात तो आप हिन्दू एकता की करते हैं और काम उन्हें तोड़ने का कर रहे हैं। जो भी हो आप सवर्णों के खिलाफ पिछड़े/दलित को भड़का रहे हैं किन्तु सच यह है कि वे आपके विरुद्ध अधिक भड़क रहे हैं।

हिन्दू समाज टूट रहा है, विखर रहा है और देश गुलामी की और बढ़ रहा है। यदि ईमानदारी से आप गरीब दलितों का उत्थान चाहते हैं तो सवर्ण को कोई आपत्ति नहीं है। गरीब और वंचित को उनका हक़ मिलना चाहिए किन्तु उनके नाम पर सनातन के विरुद्ध भ्रमित अमीरों को नहीं मिलना चाहिए।
 
बहुत बड़ी संख्या में दलित केवल मजदूरी जानता है और कुछ नहीं जबकि गरीब मुसलमान मोबाईल से लेकर हवाई जहाज की कारीगरी जानता है। आप यदि दलितों के प्रति ईमानदार हैं तो अति गरीब दलितों के बच्चो को उनके घर से निकाल कर मुफ्त में पालन पोषण करें और उन्हें सनातनी ज्ञान के साथ रोजगार परक शिक्षा दें ताकि किसी भी लाभ के वे पात्र बन सकें। आप केवल सरकारी नौकरियों में सबको क्यों फंसाये बैठे हैं?
 
आरक्षण केवल समाज बाँट रहा है गरीबों तक नहीं पहुंच रहा है। आरक्षण नीति में संशोधन आवश्यक है या स्थितियां बदल गयी हैं, सरकारी नौकरियाँ लगभग समाप्त हो रही हैं तो ऐसे में आरक्षण का आज के अनुसार प्रभावी नया स्वरुप तैयार किया जाना चाहिए।

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