मंदिर लूट लिया
मंदिर लूट लिया जिसने भी, चाहे भगवाधारी हो,
चाहे कमल उपासक हो, या चाहे संत पुजारी हो,
वंशज है तैमूर लंग का, बाबर का वह नाती है,
गज़नी की सेना का सैनिक, काला वह कुलघाती है।
चोर पकड़ने वाले लगते, चोरों के हितकारी हैं,
धूल झोकने वाले भी, सत्ता के अधम पुजारी हैं।
पाखंडी हैं, वेधर्मी हैं, शातिर सत्तावादी हैं,
चोर, लुटेरे, झूठे, कातिल, सारे ये अपराधी हैं।
धर्म ध्वजा के रक्षक जागो, जागो पूत सनातन के !
राष्ट्रवाद के पोषक जागो, जिनको प्रेम पुरातन से !
नवयुग का निर्माण करो, अब नए तंत्र का मन्त्र बनो,
उलझे भारत को अब कोई, सुलझाने का ग्रन्थ लिखो।
चाहे कमल उपासक हो, या चाहे संत पुजारी हो,
वंशज है तैमूर लंग का, बाबर का वह नाती है,
गज़नी की सेना का सैनिक, काला वह कुलघाती है।
चोर पकड़ने वाले लगते, चोरों के हितकारी हैं,
धूल झोकने वाले भी, सत्ता के अधम पुजारी हैं।
पाखंडी हैं, वेधर्मी हैं, शातिर सत्तावादी हैं,
चोर, लुटेरे, झूठे, कातिल, सारे ये अपराधी हैं।
धर्म ध्वजा के रक्षक जागो, जागो पूत सनातन के !
राष्ट्रवाद के पोषक जागो, जिनको प्रेम पुरातन से !
नवयुग का निर्माण करो, अब नए तंत्र का मन्त्र बनो,
उलझे भारत को अब कोई, सुलझाने का ग्रन्थ लिखो।
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