महान सर जी

विधायिका प्रजातंत्र का पहला स्तम्भ है। दूसरा महत्वपूर्ण स्तम्भ कार्यपालिका है। तीसरे पर न्यायपालिका आती है और चौथा और अंतिम स्तम्भ प्रेस या मीडिया को माना गया। इनमें कार्यरत लगभग सभी का उद्देश्य आज राष्ट्र निर्माण नहीं बल्कि अधिकतम धन को सोखना है। धन सोखने के चक्कर में प्रजातंत्र का चौथा स्तम्भ तो कब का नहीं गिर गया है। तीसरे स्तम्भ की बात करें तो धन के भार ने उसे आधा झुका दिया है। शेष दो खम्भे इतने मोठे हैं कि उनमें सारी अर्थव्यवस्था समा सकती है। 'पैसा फेको और भजन कराओ' के धंधे से जब मिडिया की टीआरपी गिरी तो सर जी लोगों ने मौके का फायदा उठा लिया और उन्हें हैक करने लगे। अपने धंधे की जमीन खिसकते देख मिडिया सर जी पर उखड़ पडी। अब सरजी और मिडिया की तू-तू-मैं-मैं से एक दूसरे की पोल खुलने लगी। सर जी लोगों का उद्देश्य कोई देश को शिक्षित करने का नहीं है, नहीं तो वे सबको इंजिनियर, डाक्टर, कलेक्टर बनाने के बजाय मिस्तरी, कारीगर, उद्योगी या उत्पादक भी बना रहे होते। उनके पढ़ाने से नहीं बल्कि उनकी सेटिंग से उनके बच्चे प्रतियोगी परीक्षा पास होते है। बस यहीं छोटी पूंजी वाले गुरूजी लोगों का धंधा देश भर में बंद होता है और केवल कुछ महान सर जी के पास बच्चे ध्रुवीकृत हो जाते हैं, जैसे पूंजीपति छोटे धंधों का भोजन करते हैं। महान सर के पास इतना पैसा होता है कि उनकी सेटिंग सरकारी तंत्र से होती है। दोनों मिलकर नौकरी खा जाते हैं और गरीब किन्तु योग्य बच्चे आरक्षण हड्डी में फंस कर रह जाते हैं। इन शिक्षा माफिया पर जब तक सिकंजा नहीं कैसा जायेगा तब तक योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होता रहेगा। साथ ही चौथे स्तम्भ ने यदि अपनी नैतिकता का निर्वहन नहीं किया तो वह स्वयं तो समाप्त होगा ही माफिया भी देश लूटःने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।

Comments

Popular posts from this blog

आचार्य प्रवर महामंडलेश्वर युगपुरुष श्री स्वामी परमानन्द गिरी जी महाराज द्वारा प्रवचन - प्रस्तुति रमेश चन्द्र तिवारी

100th episode of PM Modi’s Man-ki-Baat

Festivals With Poetic Greetings